जबलपुर. नगर पालिका विधि संशोधन अध्यादेश 2019 को हाईकोर्ट मे चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि सरकार का ये फैसला निर्दलीय प्रत्याशियों के अधिकार को छीनने वाला है. यदि पार्षद ही मेयर चुनेंगे तो ऐसे में कोई निर्दलीय प्रत्याशी मेयर बन ही नहीं पाएगा. हालांकि कोर्ट ने इस याचिका में एक तकनीकी संशोधन का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी.
सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती:-
मध्य प्रदेश में महापौर पद के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली के बजाय पार्षदों द्वारा करवाए जाने के सरकारी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. जबलपुर के नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मामले पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि नगर निगम अधिनियम में हुए संशोधन से निर्दलीय प्रत्याशियों के महापौर बनने का अधिकार छिन गया है. याचिका में कहा गया है कि जब राजनैतिक दलों के पार्षद ही महापौर का चुनाव करेंगे तो ऐसे में कोई निर्दलीय प्रत्याशी महापौर नहीं बन पाएगा. वहीं याचिका में राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया है कि उसके द्वारा दुर्भावना से प्रेरित होकर ये संशोधन किया गया है, जिससे जनहित प्रभावित हो रहे हैं.
संस्था नहीं व्यक्ति लगाए याचिका:-
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि इस तरह की याचिका संस्था की बजाए कोई व्यक्ति दायर कर सकता है क्योंकि चुनाव संस्था नहीं व्यक्ति की ओर से लड़ा जाता है. ऐसे में जबलपुर हाईकोर्ट ने याचिका में तकनीकि संशोधन के निर्देश दिए हैं और इसके लिए याचिकाकर्ता को एक हफ्ते का वक्त दिया है. हाईकोर्ट में इस मामले पर अगली सुनवाई नवंबर माह के पहले हफ्ते में की जाएगी.
