लाइफस्टाइल डेस्क। कभी पढ़ाई का प्रेशर, कभी काम का दबाव तो कभी प्यार या रिश्ते में धोखा मिलना, ऐसे में व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। डिप्रेशन में जाने की कोई उम्र निर्धारित नहीं होती है। किशोर, युवा, प्रौढ़ उम्र की किसी भी अवस्था में यह हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन आगाह कर चुका है कि अगले साल यानी कि 2020 तक डिप्रेशन यानी कि अवसाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बन जाएगी। कहीं आप भी तो डिप्रेशन में नहीं? यहां जानें इसके लक्षण डिप्रेशन:-
उदासी, आत्मविश्वास की कमी:-
अकसर मन में खालीपन और उदासी महसूस होना डिप्रेशन की निशानी हो सकती है। अगर खुद से नफरत होने लगे और ऐसा लगने लगे कि इस दुनिया में लोगों के लिए आपकी अहमियत नहीं रह गई है, तो यह डिप्रेशन के लक्षण हैं।
नींद नहीं आना:-
कभी कभी नींद नहीं आना गंभीर बात नहीं है, लेकिन आपको लंबे समय से अनिंद्रा की शिकायत है, रातों को अक्सर नींद नहीं आती है तो समझ लेना चाहिए कि आप किसी डिप्रेशन में हैं।
बिस्तर नहीं छोड़ना:-
अनिंद्रा से इतर कभी-कभी अतिनिंद्रा भी होने लगती है। कभी-कभी है तो ठीक, लेकिन अक्सर जब रात भर सोने के बावजू सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करे तो इसे अनदेखा न करें। यह डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।
किसी चीज पर फोकस नहीं कर पाना:-
तनाव की स्थिति में आप किसी एक चीज पर फोकस नहीं कर पाते हैं। आप आसानी से किसी जरुरी काम के प्रति भी एकाग्रचित नहीं हो पाते हैं। रोज के कामों में भी आपकी एकाग्रता भंग होने लगे तो इसे डिप्रेशन का लक्षण समझा जाता है।
आलस्य होना और मूड खराब होना:-
अगर किसी जरुरी काम में भी आप हद से ज्यादा आलस्य दिखा रहे हैं या फिर काम करने में नर्वसनेस या तनाव महसूस कर रहे हैं। बिना किसी बात के मूड खराब रहता हो या फिर अक्सर लगने लगे कि गड़बड़ होने वाला है तो यह डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है।
गलत कदम उठाने का ख्याल आना:-
अगर किसी बात को लेकर ऐसा लगने लगे कि इस दुनिया में आपके लिए कुछ नहीं बचा हो और यह जीवन बेकार लगने लगे, लगने लगे कि अब जिंदा रहने का कोई कारण नहीं बचा है, तो इसे बहुत गंभीर माना जाता है। डिप्रेशन के ऐसे गंभीर लक्षण दिखे तो तुरंत मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए।
दृढ़ निश्चय करें और डिप्रेशन को मात दें:-
अक्सर लोगों के जीवन में डिप्रेशन आ जाता है। इससे हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि इस स्थिति से लड़ना चाहिए। यह एक कठिन लड़ाई है, लेकिन यकीन मानिए कि नामुमकिन नहीं है। समय रहते इसका निवारण खोजने की कोशिश करें। इसके लिए मेडिकल रीहैबिलिटेशन और डॉक्टरी इलाज की भी सहायता ली जा सकती है।
