वॉर हीरो। मुल्क को आजादी मिलने के बाद भी देश को उसके दुश्मनों से बराबर खतरा बना हुआ था। मुल्क के बटवारे के बाद पाकिस्तान भारत के लिए एक नया सिरदर्द बनकर उभरा। मजहब के नाम पर जिहाद उसकी फितरत का हिस्सा हमेशा से रहा है। कश्मीर उसके लिए हमेशा नासूर रहा और जब भी इसको लेकर उसने कोई गुस्ताखी की उसने मुंह की खाई है। 1971 का युद्ध एक ऐसा ही यादगार और हमारे जांबाजों की बहादुरी के कारनामों की दास्तान लिखने वाला युद्ध रहा है।
हवा में छुड़ाए थे दुश्मन के छक्के:-
1971 की जंग में पाकिस्तान को नाको चने चबाने के साथ घुटनों के बल बैठने को मजबूर कर दिया गया था। हमारे शूरवीर सैनिकों ने वीरता के साथ जंग लड़ी और कई सैनिकों के हिस्से शहादत आई। ऐसे ही एक जांबाज थे फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों, जिन्होंने हवा में दुश्मन के छक्के छुड़ाते हुए उसको करारी मात दी थी। निर्मलजीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई, 1943 को पंजाब में लुधियाना के रूरका गाँव में हुआ था। निर्मलजीत सिंह भारत-पाक युद्ध के वक्त श्रीनगर वायु सेना के हवाई अड्डे पर मुस्तैदी से तैनात थे। जंग का जब आगाज हुआ उससे कुछ समय पहले ही उनकी शादी हुई थी।
आसमान में दी थी दुश्मन को मात:-
वह 14 दिसम्बर 1971 का दिन था। अचानक आसमान में हवा को चीरती हुई तेज आवाज आई। फ्लाइंग ऑफिसर सेखों को यह समझने में देर नही लगी की श्रीनगर में दुश्मन देश ने हमला बोल दिया है। पाकिस्तानी वायुसेना के छह सैबर जेट विमान श्रीनगर के आसमान में मंडरा रहे थे। सुबह आसमान में धुंध छाई हुई थी और इससे पहले 8 बजकर 2 मिनट पर चेतावनी मिल चुकी थी कि दुश्मन ने आक्रमण कर दिया है। फ्लाइंग ऑफिसर सेखों के साथ फ्लाइंग लैफ्टिनेंट घुम्मन भी पूरी तरह से मुस्तैद होकर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी में थे।
थोड़ी देर में दोनों आसमान में दुश्मन का मुकाबला करने के लिए दुश्मन के सामने थे। पाक सेना के ये विमान बड़ी तबाही के मकसद से आए थे। फ्लाइंग ऑफिसर सेखों के उड़ान भरने के बाद दो पाक विमानों ने रनवे पर दो विस्फोट किए। फ्लाइंग ऑफिसर सेखों ने देखा कि दो विमान हमला करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। तब उन्होंने अपने जेट से उनका पीछा करना शुरू किया। फ्लाइंग ऑफिसर सेखों उन दोनों विमानों से लड़ रहे थे तभी उनके पीछे दो और दुश्मन देश के विमान आ गए। अब फ्लाइंग ऑफिसर सेखों अकेले चार विमानों से मुकाबला कर रहे थे। तभी उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया और एक के बाद एक दो पाक विमानों को मार गिराया। उसके बाद उनका आखिरी संदेश प्राप्त हुआ, ' शायद मेरा जेट भी निशाने पर आ गया है, घुम्मन, अब तुम मोर्चा संभालो।'
वायुसेना को दिलवाया गौरव:-
इसके बाद उनका विमान बड़गाम के पास क्रेश हो गया और इसके साथ ही फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। शहादत के वक्त उनकी उम्र सिर्फ 26 साल थी। उनकी बहादुरी की वजह से दुश्मन देश के बाकी विमान दुम दबाकर भाग खड़े हुए। अदभुत और अदम्य साहस के लिए उनको देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वो देश के पहले और अभीतक के इकलौते वायुसैनिक है, जिनको परमवीर चक्र प्राप्त हुआ है।