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Monday, July 23, 2018

बड़ी खबर कचरा बीनने वाले के बेटे का एम्स में चयन, राहुल गांधी व सीएम शिवराज सिंह ने दी बधाई- देखे तस्वीरों सहित खबर

मध्य प्रदेश के देवास जिले के विजयागंज मंडी के पलास्टिक बिनने वाले रंजीत चौधरी के बेटे आशाराम ने एम्स की परीक्षा पास कर इतिहास रचा है।
भोपाल प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और ना ही अमीरी और गरीबी में फर्क देखती है। कठिन परिश्रम और लगन से पढ़ाई करने वाले छात्र अपनी मंजिल पा लेते हैं। ऐसा ही एक छात्र ने मेडिकल परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। मध्य प्रदेश के देवास जिले के विजयागंज मंडी के प्लास्टिक बीनने वाले रंजीत चौधरी के बेटे आशाराम ने एम्स की परीक्षा पास कर इतिहास रचा है। 
छात्र की इस सफलता पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पत्र लिखकर बधाई दी है। राहुल गांधी ने पत्र में लिखा कि आपकी कड़ी मेहनत और त्याग ने महात्मा गांधी की याद दिला दी। जिन्होंने कहा था कि शक्ति शारीरिक गतिविधियों से नहीं आती बल्कि दृढय इच्छाशक्ति से आती है। आप पर हम सभी को गर्व है। 
आपसे दूसरे बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी। पत्र में कहा गया, "मुझे पता है कि सभी चुनौतियों के बावजूद आप एक अच्छी रैंक हासिल करने में सक्षम थे। आशाराम चौधरी ने अभावों के बीच कड़ी मेहनत और लगन से सफलता के उस शिखर को छुआ, जिस पर सुविधा संपन्न परिवार के किसी भी युवा को रश्क हो सकता है। 
दो माह पहले आयोजित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की प्रतिष्ठित चयन परीक्षा में उन्होंने साढ़े 4 लाख परीक्षार्थियों के बीच 707वीं और ओबीसी श्रेणी में 2 लाख विद्यार्थियों के बीच 141वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने जोधपुर के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन ले लिया है और डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। 23 जुलाई को एमबीबीएस की पहली कक्षा अटेंड करेगा। देवास से लगभग 40 किमी दूर विजयागंज मंडी में रणजीत चौधरी और ममता बाई के घर वर्ष 2000 में जन्मे आशाराम ने बचपन से ही अपने घर में मुफलिसी को करीब से देखा है। 
घर के नाम पर घास-फूस का एक झोपड़ा-
पिता पन्नियां बीनकर और खाली बोतलें जमाकर घर का खर्च चलाते हैं। कभी-कभी खेतों में काम भी करना पड़ता है। उनके पास जमीन के नाम पर छोटा सा टुकड़ा तक नहीं है। वे कहते हैं कि जायदाद तो उनका हीरे जैसा बेटा आशाराम ही है। मां गृहिणी है। एक छोटा भाई है जो नवोदय विद्यालय में 12 की पढ़ाई कर रहा है। परिवार की पृष्ठभूमि से समझा जा सकता है कि आशाराम की पढ़ाई किसी नामी स्कूल में नहीं हुई होगी। गांव के पास ही सरकारी स्कूल में उनकी प्रारंभिक पढ़ाई हुई। चौथी कक्षा में दत्तोतर के मॉडल स्कूल में प्रवेश लिया। आशाराम बताते हैं बचपन से पढ़ाई में कोई कोताही नहीं बरती छठी में जवाहर नवोदय विद्यालय चंद्रकेशर में पहुंच गए।

बोले पिता इतना तो कभी सोचा न था-
देवास से 40 किमी दूर विजयागंज मंडी में रंजीत चौधरी और ममता बाई के पुत्र आसाराम माता पिता के साथ झोपड़ी में रहते हैं और वहीं रहकर पढ़ाई करते थे. उनके पिता रंजीत के पास कोई जमीन नहीं थी इस वजह से वे पन्नी और खाली बोतलें बीनने के अलावा कभी-कभी खेतों में मजदूरी करते हैं. मां गृहिणी हैं। आसाराम की सफलता पर पिता रंजीत कहते हैं कि मेरे लिए तो यह सब सपने जैसा है, क्योंकि इतना तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था. आसाराम की पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई है।