अब तक के सबसे प्लॉप सांसद साबित हुए नरेन्द्र सिंह तोमर, सोन चिरैया मुद्दे का हल आज तक नही निकला
दबंग सौरभ भार्गव
दबंग सौरभ भार्गव
करैरा विधानसभा में आज जो पिछड़ापन छाया है आज वह नेताओ की उदासीनता के कारण छाया है। करैरा में इस समय केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर खेमे का बोलबाला है । जिस मंत्री की पकड़ नरेंद्र मोदी के खासमखास नेताओ में शुमार हो , लेकिन वह खासमखास का फायदा उस विधानसभा को नही मिल रहा जिसने नरेंद्र सिंह तोमर को जीत दिलवाने में महत्तपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका निभाई । करैरा विधानसभा में करीब 15 हजार की बढ़त के बाद जो प्रत्याशी मात्र 25 हजार मतों से प्रचंड मोदी लहर में जीत पाया हो तो स्वभाविक है कि वह मंत्री को जनता से ज्यादा मोदी लहर ने जिताया था । लेकिन चमचागिरी की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि करैरा विधानसभा में दर्जनों मोदी बनकर ज्ञान बांटते है कि दिन रात एक कर दिया तब जाकर करैरा विधानसभा से जितवा पाये । करैरा में दिहायला बैल्ट ने एक तरफा नरेंद्र सिंह तोमर के लिये दिन रात एक कर दिया कि मंत्री बनने के बाद कही सोनचिरैया मुद्दे का हल निकलेगा लेकिन आज पूरी जनता रुष्ठ है । आज देश के लोकप्रिय सांसदों के नामो में शुमार नरेंद्र सिंह तोमर का स्तर करैरा में केवल और केवल जी हजूरी बाले कार्यकर्ताओ तक सीमित रह गया है। जमीनी कार्यकर्ता से सांसद को जीहजूरी बाले लोग मिलने नही देते । इसका खामियाजा भी सांसद को भुगतना पड़ेगा जो 15 हजार की बढ़त करैरा विधानसभा में मिली थी वह बढ़त घटकर 20 हजार तक पिछड़ सकती है । हो सकता है आज तक अपना एक स्थायी क्षेत्र तैयार नही कर पाये नरेंद्र सिंह तोमर भोपाल या मुरैना लोकसभा जा सकते है।
जमीनी कार्यकर्ताओ की नही करते कोई अधिकारी सुनवाई
भाजपा के जो कार्यकर्ताओ बास्तिविक रुप से संगठन के लिये कार्य करते है वह आज उदास होकर घर बैठ गये है क्योंकि तोमर साहव के अगल बगल चिपके लोग कार्यकर्ताओ को उनसे मिलने का मौका नही देते एवं जब तक वह दौरे पर रहते है तो वह सांसद के अगल बगल मंडराते रहते है । उन कार्यकर्ताओ की कोई अधिकारी वर्ग सुनता है एवं शायद जी हजूरी बाले कार्यकर्ताओ की संख्या जब जब जिस पार्टी में बढ़ती है तो उसका सत्ता में रहना भी मुश्किल होता है क्योंकि पब्लिक सब जानती है।
