भोपाल। 25 सितंबर को राजधानी के जंबूरी मैदान में होने वाले भाजपा के महाकुंभ ने नेताओं की पेशानी बड़ा दी हैं। भाजपा नेताओं को इन दिनों दोहरी चिंता सताए जा रही है। पहली ये की कितने लोग आ सकते हैं और दूसरी बात ये कि जिस तरह से प्रदेशभर में बीते दिनों पार्टी के नेताओं के साथ जो घटनाएं घटी हैं वैसी कोई स्थिति यहां न बन जाए। एससीएसटी एक्ट भाजपा के लिए गले की फांस बन गया है। भाजपा के लिए 25 सितंबर को महाकुंभ के लिए भीड़ जुटाना मुश्किल हो रहा है। पार्टी ने दावा किया था कि उसके महाकुंभ में आठ लाख तक लोग आ सकते हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है ताजा हालात को देखते हुए बताई गई संख्या आधे आंकड़े को भी छूले तो बड़ी बात है। ऐसा इसलिए की ग्वालियर-चंबल संभाग, बुंदेलखंड सहित विंध्य क्षेत्र के सवर्णों ने किसी भी रातनीतिक पार्टी के कार्यक्रम का बहिष्कार का फैसला किया है।
हर जगह विरोध-
बीते एक महीने में प्रदेश की कोई जगह ऐसी नहीं हैं जहां इसका विरोध नहीं हुआ हो। सवर्ण समाज के विरोध को देखते हुए मंत्रियों को अपने पहले से तय दौरे निरस्त करना पड़े विरोध अभी भी हो रहा है। इधर प्रदेश के कई गांवों में लोगों ने बैनर लगा दिए हैं, जिनपर लिखा है - ये गांव सवर्णों का है वोट मांगकर शर्मिंदा नहीं करें। सर्वण समाज के विरोध को देखते हुए सत्तापक्ष भी बैकफुट पर आ गया है।
ओबीसी महाकुंभ हुआ था निरस्त-
भोपाल में होने वाले महाकुंभ को लेकर प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह हर दिन समीक्षा कर रहे हैं। आयोजन में भीड़ ज्यादा से ज्यादा आए इसके लिए मंत्री और बड़े नेता जुटे हुए हैं। भाजपा को डर है कि अगर एससी एसटी एक्ट को लेकर सवर्णों में इसी तरह से नाराजगी बनी रही तो इस महाकुंभ पर जुटने वाली भीड़ पर बड़ा असर पड़ सकता है। सवर्णों के विरोध के चलते ही भाजपा ने 10 सितंबर को होने वाला ओबीसी महाकुंभ निरस्त कर दिया था।
