भोपाल मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले जोड़ तोड़ का खेल जोरों पर है, टिकट की चाह में नेता पार्टी बदलने में देर नहीं कर रहे हैं| बीजेपी हो या कांग्रेस, चुनावी समय में दोनों ही पार्टियों के नेता दल बदल रहे हैं। बीजेपी में टिकट न मिल पाने की संभावनाओं के चलते बड़े नेता कांग्रेस का हाथ थाम रहे हैं, वहीं चुनाव से पहले सिर्फ टिकट के आश्वासन पर भी नेता दल बदलता है, ऐसी स्तिथि में उनसे किये वादे को पूरा करना भी जरूरी है| जिसके चलते अन्य दलों से कांग्रेस में आये नेताओं के टिकट पक्के माने जा रहे हैं| वहीं इन नेताओं के आने से उन क्षेत्रों से टिकट की दावेदारी कर रहे कांग्रेस नेताओं में नाराजगी भी देखी जा रही है। जिसको बीजेपी छोड़कर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई पद्मा शुक्ला का टिकट तय है, विधानसभा चुनाव 2013 में कटनी की विजयराघौगढ़ सीट से संजय पाठक के सामने पद्मा शुक्ला थीं और इस बार भी लगभग इन्हीं दोनों के बीच मुख्य मुकाबला होने की संभावना है। मगर इस बार दोनों के दलों में अदला-बदली है। राहुल गाँधी ने भोपाल में साफ़ कहा था कि चुनाव के समय ऊपर से टपकने वाले पैराशूट वाले नेताओं को टिकट नहीं मिलेगी। लेकिन अब यह मजबूरी है कि जो अन्य दल छोड़कर कांग्रेस में आये हैं उन्हें टिकट दिया जाए| हालांकि सिर्फ दमदार नेताओं को ही टिकट देने पर विचार किया जा रहा है। कमलनाथ भी यह कह चुके है कि जिताऊ चेहरा चाहे कांग्रेस का हो या बीजेपी से आया हो टिकट दिया जायेगा।
कमलनाथ जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने तब गैर कांग्रेसी पूर्व विधायकों ने उनसे संपर्क किया था। वहीं कमलनाथ बार बार यह भी कहते रहे हैं कि बीजेपी के विधायक भी उनके संपर्क में हैं। लेकिन अभी तक किसी विधायक ने कांग्रेस ज्वाइन नहीं की है। टिकट बंटवारे के बाद स्तिथि साफ़ होगी| रतलाम से निर्दलीय विधायक रहे पारस सकलेचा और भाजपा के पूर्व विधायक व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा के भाई गिरिजाशंकर शर्मा ने कमलनाथ से मुलाकात की थी। सकलेचा ने दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ली थी। वे रतलाम शहर से विधायक रहे थे और उनका विधानसभा चुनाव में रतलाम से प्रत्याशी बनना लगभग तय माना जा रहा है। नाथ से पहले दौर में मुलाकात करने वाले गिरिजाशंकर शर्मा ने अभी कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है, लेकिन वे आने वाले सप्ताह में कभी भी पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि उनकी हाईकमान से लगातार बातचीत चल रही है। वे सोहागपुर से चुनाव मैदान में उतरने को तैयार हैं और अपने भाई डॉ. सीतासरन शर्मा के अलावा होशंगाबाद की दूसरी किसी सीट से भी पार्टी के आदेश पर प्रत्याशी बन सकते हैं।
हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में गए दो पूर्व विधायकों के वापस आने पर टिकट भी तय माने जा रहे हैं। शेखर चौधरी और सुनील मिश्रा ने अभी पार्टी ज्वाइन की है। शेखर चौधरी गोटेगांव से हैं। सूत्र बताते हैं कि उन्हें टिकट का आश्वासन दिया गया है। ऐसे में गोटेगांव से पूर्व मंत्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति के टिकट पर संकट आ सकता है। वहीं, कटनी के मुडवारा से आने वाले सुनील मिश्रा के लिए टिकट में ज्यादा परेशानी नहीं होगी, क्योंकि इस सीट से पार्टी 2013 में करीब 47 हजार वोट से हारी थी।
अभय मिश्रा का टिकट पक्का-
रीवा जिला पंचायत के अध्यक्ष अभय मिश्रा ने कमलनाथ के आने के बाद कांग्रेस ज्वाइन की है। उनकी पत्नी विधायक नीलम मिश्रा ने सदन के भीतर पति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर जिस तरह सरकार के खिलाफ धरना दिया था, उससे सरकार कठघरे में खड़ी हो गई थी। इसके कुछ दिन बाद ही अभय मिश्रा ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी। उनकी टिकट पक्की मानी जा रही है, कांग्रेस उन्हें रीवा जिले के सेमरिया से चुनाव लड़ाएगी। इसके अर्जुन आर्य को भी बुधनी में मुख्यमंत्री के सामने खड़ा करने की रणनीति बनाई जा रही है। आर्य को भी हाल ही में पार्टी ज्वाइन कराई गई है। उन्होंने सपा के ऑफर को ठुकराकर कांग्रेस ज्वाइन की है।
