नई दिल्ली/ उत्तरप्रदेश आगामी लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी समेत कई राजनीतिक हस्तियां उत्तर प्रदेश की परंपरागत सीटों से ताल ठोकने वाली हैं। लेकिन, इस दौरान उनका सामना ‘जिंदा मुर्दा’ कैंडिडेट से हो सकता है। यानी वे लोग जो जिंदा तो हैं लेकिन तमाम सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत घोषित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में जिंदा मुर्दों की संख्या काफी ज्यादा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक प्रदेश के मृतक संघ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई दिग्गजों के सामने अपने उम्मीदवार खड़ा करेगा।
खबर के मुताबिक मृतक संघ के अध्यक्ष लाल बिहारी ‘मृतक’ ने बताया कि वे चुनावों में सिर्फ मुर्दों को खड़ा करते हैं ताकि लोग जाने की वे मुर्दा नहीं बल्कि जिंदा हैं। उन्होंने बताया कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि तमाम दस्तावेजों में जीवित लोगों को मृत घोषित किया गया है। अब उन्हें दोबारा अपना नाम दर्ज कराने के लिए काफी भाग-दौड़ करनी पड़ती है। लाल बिहारी (64) आजमगढ़ जिले के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि 1977 में उनके रिश्तेदारों ने राजस्व विभाग के दस्तावेजों से उनका नाम हटवा दिया। रिश्तेदारों ने यह कोशिश उनकी प्रॉपर्टी हड़पने के मकसद से की थी। गौरतलब है कि लाल बिहारी ने खुद को जिंदा घोषित करने के लिए 1988 में इलाहाबाद से वीपी सिंह और कांशी राम के खिलाफ भी उपचुनाव में नामांकन कर चुके हैं। 1989 में भी वह अमेठी से राजीव गांधी के खिलाफ नामांकन दाखिल कर चुके हैं। उन्होंने इसके बाद कुल 6 चुनावों में पर्चा दाखिल किया, जिसके बाद 30 जून, 1994 में उन्हें जीवित घोषित कर दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 17 साल तक मृत घोषित रखने के खिलाफ उन्होंने राज्य सरकार पर 25 करोड़ रुपये का हर्जाना भी ठोक दिया। लाल बिहारी कहते हैं कि इसके बाद उन्होंने अपनी पूरी जिदंगी जिंदा-मुर्दों के न्याय के लिए समर्पित कर दिया।
