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Friday, December 20, 2019

प्रदेश के इस शहर में मिला यह दुर्लभ पक्षी नाम है ‘एलबिनो’, दुनिया भर में है चर्चा का विषय

जबलपुर. प्रदेश का पहला सबसे रेयर एलबिनों जबलपुर में पाया गया है। इस पक्षी को लेकर वन्य अमला और खोजने वाले वन्य प्राणी विशेषज्ञ भी आश्चर्यचकित हैं। पहली बार इस पक्षी को प्रदेश में देखा गया है। सफेद रंग का यह पक्षी नाईट हैरान और कारमोरेंट प्रजाति का है। इस को लुकआउट करने के बाद वन विभाग के अमले के समक्ष इसे उसके प्राकृतिक आवास के लिए छोड़ा गया। जानकारों के अनुसार अभी तक इस प्रजाति के मिलने वाले पक्षियों का रंग भूरा अथवा चितकबरा होता था। लेकिन पहली बार है कि जब सफेद एलबिनो को पाया गया है। शेड्यूल एक में इस पक्षी को रखा गया है। शेड्यूल एक वह होता है जिसमें लुप्तप्राय: वन्य प्राणियों को रखा जाता है। इन वन्य प्राणियों में टाईगल, किंग कोबरा, चिम्पाजी जैसे वन्य प्राणी आते हैं। इन प्राणियों का शिकार करने अथवा इन्हें अपने पास रखना वन्य प्राणी अधिनियम के खिलाफ माना जाता है। अभी तक भूरे मटमेले रंग के पक्षियों की पहचान की गई थी। इस पक्षी को डिप्टी रेंजर कमल सिंह एवं वन रक्षक रोहित पासी की मौजूदगी में प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया।
58 दिन रखा रेस्क्यू सेंटर में:- 
बीएसएनएल मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय परिसर में लगे वृक्षों को अफसरों की शह पर काटकर जिस बेरहमी के साथ पक्षियों के कुनबे को उजाड़ा गया था लेकिन पक्षी प्रेमी, वेटरनरी के स्टूडेंटों को यह दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने पक्षियों को बचाने रेस्क्यू किया। मां-बाप से बिछडे घायल पक्षियों के चूजों को 58 दिन तक सहेजकर डुमना नेचर रेस्क्यू सेंटर में इलाज किया गया। टीम में पक्षी विशेषज्ञ धनंजय घोष, जगत फ्लोरा, रुद्राक्ष पाठक, आकाश बर्मन, सिद्धार्थ दीक्षित, संदेश, शिवांशु, अपर्णा तिवारी, मून थापा आदि ने गुरुवार को करीब 150 पक्षियों को उनके सुरक्षित आवास पर छोड़ा।
हमें बड़ी सफलता मिली है जिसमें शेड्यूल वन में आने वाला पक्षी मिला है। यह एक लाख पक्षियों में से एक मिलता है। इसकी पहचान जबलपुर में होने पर हमें बेहद खुशी है।
जगत फ्लोरा, पक्षी विशेषज्ञ