करैरा (शिवपुरी)। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा कस्बे में बाबा भानगिरी की तपोभूमि कहे जाने वाले करैरा के बाबा का बाग बगीचा मंदिर में लोगों की मान्यताएं जिसमे संतान प्राप्ति सहित अन्य तो पूरी होती ही है साथ ही इस मंदिर में स्थानीय लोग अपने आपसी विवाद सुलझाने के लिए आते हैं पुलिस व कोर्ट जाने से पहले लोग यहां पर आकर एक दूसरे के प्रति जो भी कहते हैं उस पर भी भरोसा करके आपसी सुलह करते हैं स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा का बाग बगीचा मंदिर में कोई भी व्यक्ति झूठ नहीं बोलता और ना ही झूठी कसम खाता है यदि किसी ने गलती से झूठी कसम खा ली तो 24 घण्टे के भीतर अंजाम सबके सामने होता है।
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मंदिर के प्रति लोगों की ऐसी आस्था है कि स्थानीय लोग अपना विवाद सुलझाने के लिए एक बार जरूर इस मंदिर में आते हैं यही नहीं यह मंदिर पूरे अंचल में लोगों के विवादों का न्याय करने के लिए प्रसिद्ध है इसी कारण प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को हजारों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि मंदिर में आपसी विवादों का न्याय भी होता है और पुलिस व कोर्ट जाने से पहले लोग यहां आपसी सहमति से भी मामले सुलझा लेते हैं मान्यता है कि यहां आकर कोई झूठी कसम नहीं खाता है किसी भी लालच या कारण वश झूठ बोलने वाले व्यक्ति को इसका प्रतिफल भोगना ही पड़ता है श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा का बाग बगीचा मंदिर पर सच्चे मन से मनौती मांगने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं मंदिर पर सैकड़ों की संख्या में चढ़ाए गए घंटे इस बात के प्रमाण हैं।
बाबा भानगिरी ने ली समाधि:-
यह मंदिर बाबा भानगिरी महाराज की तपोभूमि है जहां उन्होंने जिंदा समाधि ली थी यह हनुमान जी की प्रतिमा की स्थापना उन्होंने ही कराई थी क्षेत्र के लोगों का यह प्रसिद्ध आस्था का केंद्र है तथा वे यहां आकर अपना छल कपट छोड़कर जो भी सच्चा होता है उसे स्वीकार कर लेते हैं।
चल रहा है भव्य राम मंदिर निर्माण:-
बाबा के बाग बगीचा में इन दोनों भव्य राम मंदिर निर्माण किया जा रहा है हनुमान जी मंदिर के पास में चल रहे इस निर्माण के बारे में बाबा के बाग बगीचा के महंत बताते हैं कि हनुमान जी शिव जी परशुराम जी मंदिर के साथ-साथ यहां अब भगवान राम के दर्शन भी भक्तों को होंगे मंदिर निर्माण में भक्तों द्वारा सहयोग किया जा रहा है।
106 वर्ष से की जा रही है अखंड रामधुन,:-
नगर के बाबा का बाग बगीचा स्थित हनुमान मंदिर पर ब्राह्मण समाज द्वारा जन कल्याण के लिए 106 वर्षों से अखंड संगीतमय श्रीरामधुन का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भक्तों द्वारा 2-2 घंटे की पालियों के माध्यम से अखंड धुन का जाप किया जाता है। जो 24 घंटे चलता है। रामधुन के साथ भक्तों द्वारा अखंड दीप प्रज्ज्वलित भी किया जाता है। मंदिर के महंत का कहना है कि अखंड रामधुन के साथ अखंड ज्योति से भगवान को प्रसन्न कर जन कल्याण व सुख समृद्धि का वरदान भक्तों द्वारा प्रार्थना कर मांगा जाता है। जिससे न केवल जनता का कल्याण होता है बल्कि जन कल्यण में कुष्ठ रोगों सहित अन्य रोगों से मुक्ति मिलती भी है।
पत्थर रखने से होती है मनोकामना पूर्ण:-
कस्बे के बाबा के बाग बगीचा में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर की ऐसी मान्यता है कि यहां पर दर्शन कर परिसर में पत्थर रखने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इसलिए यहां दर्शन कर भक्तों द्वारा पत्थर रखा जाता है। मनोकामना पूरी होने पर कथा अनुष्ठान कराकर भक्त अपना पत्थर हटवा देते हैं। इसलिए मंदिर में लोग प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को संगीतमय सुंदरकांड सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालु यहां लगातार करते रहते हैं।
कुष्ठ रोग मिटाने की रामधुन की शुरुआत:-
बगीचा मंदिर के महंत जी की माने तो यहां छोटा सा हनुमान जी का मंदिर बना हुआ था। जिसे माधवराव सिंधिया ने अपनी 25वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर मंदिर का निर्माण कराने के लिए तत्कालीन तहसीलदार मौसर राव एवं मजिस्ट्रेट हरि गणेश को पैसा देकर मंदिर निर्माण कराने की जिम्मेदारी दी गई। मंदिर के निर्माण के दौरान खंडे सहित कुछ अन्य सामग्री कम पड़ गई। जिसे अधिकारियों ने अपने रौब में आकर नजदीकी प्राचीन मठ से कुछ सामग्री उठाकर मंदिर का निर्माण में उपयोग कर ली थी। जिससे उनको कुष्ठ रोग हो गया था। किसी वैद्य ने उन्हें बताया कि आप बाबा के बाग में चैत्र नवरात्रि में अखंड रामधुन का जाप करवा दो। तो आप इस रोग से मुक्ति पा सकते हैं। तहसीलदार और मजिस्ट्रेट द्वारा रामधुन का आयोजन कराया गया। जिससे वे कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए। तभी से शुरू हुई रामधुन का ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजन अब जनकल्याण के लिए कराया जा रहा है।
