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Wednesday, December 25, 2019

नगर निगम का बर्खास्त बेलदार निकला करोड़पति, लोकायुक्त कार्रवाई में मिली इतनी संपत्ति

इदौर। लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम ने मंगलवार सुबह इंदौर नगर निगम के बर्खास्त बेलदार रियाजुल हक अंसारी के घर देव छाया अपार्टमेंट स्नेह लता गंज में कार्रवाई की। यहां जांच के दौरान रियाजुल और उसके परिजनों के नाम से भवन, भूखंड और दुकान होने की जानकारी मिली, जिनकी कीमत करीब एक करोड़ से अधिक आंकी गई है। देव छाया अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर 303, 404 एवं पेंटहाउस मिला। पाकिजा लाइफस्टाइल में एक प्लाट ए-22 जिसमें वर्तमान में मकान निर्माणाधीन है। 78.79 नाहर शाहवली कंपाउंड, खजराना में बहन के नाम पर मकान। जेल रोड में एक दुकान जिसे बेच दिया गया है, इनकी जानकारी लगी।
तलाशी के दौरान रियाज अंसारी के घर से इन अचल संपत्ति के साथ सोने, चांदी के गहनों के साथ 50 हजार रुपए नकद भी मिले। इसके अलावा बैंकों में खाते होने की जानकारी भी प्राप्त हुई है, जिनकी जांच की जाएगी। बर्खास्त बेलदार के घर के पास से एक डस्टर कार और दो टू व्हीलर वाहन भी मिले हैं।
20 दिसंबर को बर्खास्त कर दिया था बेलदार को:-
रियाजुल हक अंसारी के घर लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद यह जानकारी सामने आई कि इंदौर नगर निगम आयुक्त आशीष सिंह ने 20 दिसंबर को ही बेलदार को बर्खास्त कर दिया था। उसने नगर निगम की छवि धूमिल करने के साथ अफसरों के खिलाफ बयानबाजी भी की थी
संपति कर वसूलता था बेलदार:-
लोकायुक्त के शिकंजे में आया बेलदार रियाज अंसारी पार्षदों और अधिकारियों का खास था। इसी कारण विजय नगर जोन पर रहते हुए रियाज को संपत्ति कर वसूलने की जिम्मेदारी दे रखी थी। सूत्रों के मुताबिक उसके पास हमेशा संपत्ति कर वसूली के लिए रसीद कट्टा रहता था। लोगों पर रौब झाड़ने के लिए उसने अपना विजिटिंग कार्ड भी छपवा रखा था, जबकि नियमानुसार दरोगा स्तर के कर्मचारी को कार्ड रखने की पात्रता नहीं है। निगम सूत्रों के मुताबिक 2015 में विजय नगर जोन में 51 करोड़ का घोटाला सामने आया था। तब रियाज लोगों से नकद संपति कर वसूलता था, लेकिन पैसा समय पर जमा नहीं करता था। बाद में फर्जी चेक लगाकर बाउंस करवा देता था। इससे निगम को राजस्व का नुकसान होता था। मामले की जांच अधिकारियों ने दबा रखी है। शिकायतों के बावजूद नेताओं और अधिकारियों ने रियाज पर मेहरबानी बनाए रखी थी। 2017 में रियाज को कुछ महीने के लिए असिस्टेंट रेवेन्यू ऑफिसर (एआरओ) बनाया गया था।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई:-
इसके पहले भी लोकायुक्त नगर निगम के करोड़पति बेलदार पर कार्रवाई कर चुका है। वर्ष 2018 में लोकायुक्त टीम ने निगम के स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ बेलदार असलम खान के माणिकबाग अशोका कॉलोनी स्थित निवास पर छापा मारा था। 18 हजार रुपए वेतन पाने वाले असलम के घर से टीम ने 25 लाख रुपए बरामद किए थे। इसके अलावा एक किलो सौ ग्राम वजनी सोने का बिस्किट, एक किलो सोने के जेवर, आठ प्लॉट व कृषि भूमि के दस्तावेज, 70 लाख की बीमा पॉलिसी, चार महंगी कारें और पांच दो पहिया वाहन मिले थे। बैंक खातों में हुए करोड़ों के लेनदेन की जानकारी मिलने पर आयकर और ईडी को भी सूचना दी गई थी। बाद में आयकर विभाग ने कार्रवाई करते हुए असलम खान की करीब 25 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली थी।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को कैसे सौंप देते हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी:-
असलम पर कार्रवाई के बाद इस बात की छानबीन भी हुई थी कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बेलदार जिसका कार्य साफ-सफाई और गड्ढे आदि खोदना होता है, लेकिन उसे सालों तक महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारीपूर्ण काम सौंपे जाते रहे। वह अपने घर से सामानांतर नक्शा विभाग ही चलाता रहा, लेकिन अफसर आंखें मूंदे रहे।