भोपाल। मध्यप्रदेश में सियासी उठापटक के बीच कांंग्रेस के बागी 22 विधायकों में से 5 सिंधिया समर्थक विधायकों की वापसी होने की खबर आ रही है। बताया जाता है कि ये वे ही विधायक हैं जिनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं।
वहीं इनमें से इमरती देवी जरूर अभी वापस नहीं आईं हैं। इनके देर रात भोपाल में पहुंचने की सूचना है, लेकिन अब तक अधिकारिक तौर पर इनकी वापसी की पुष्टि नहीं हुई है।
ये विधायक वापस आए!
बताया जाता है कि कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत, प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया भोपाल वापस लौट आए हैं। ये सभी विधायक सिंधिया
कौन कहां से विधायक:-
इनमें से गोविंद सिंह राजपूत सुरखी विधानसभा चुनाव से चुने गए, जबकि प्रभुराम चौधरी सांची विधानसभा क्षेत्र से,तुलसी सिलावट सांवेर विधानसभा क्षेत्र से, प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर सीट से, महेंद्र सिंह सिसोदिया बमोरी (गुना) विधानसभा से वर्ष 2018 में विधायक चुने गए थे। वहीं इनके अलावा इमरती देवी का भी इस्तीफा मंजूर किया गया था, जो डबरा से विधायक चुनी गईं, लेकिन इमरती देवी के भोपाल नहीं आने की सूचना आ रही है।
कल फ्लोर टेस्ट की संभावना:-
विधायकों की वापसी की बात समाने आने के बाद कुछ जानकारों का मानना है कि सरकार कल यानि रविवार को ही फ्लोर टेस्ट के लिए कह सकती है। वहीं कुछ जानकार रात में ही किसी बड़ी स्थिति के निर्माण होने की बातों पर संभावना जता रहे हैं।
कल तक का दिया था समय:-
वहीं इससे पहले 22 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने 15 मार्च को शाम 5 बजे तक पेश होने के लिए नोटिस जारी किया था।
इधर, इन छह कांग्रेस के विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने किया बर्खास्त:-
वहीं दूसरी ओर विधायकों के आने से पहले मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने शनिवार शाम को बागी विधायकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के छह बागी विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर लिया है और सदन ने उन्हें अयोग्य ठहराया है। ये सभी विधायक सिंधिया खेमे के थे। अयोग्य ठहराए गए सभी विधायक पूर्व में कमलनाथ की सरकार में मंत्री थे। मंत्री पद से उन्हें पहले ही हटा दिया गया है।
इससे पहले सिंधिया गुट के इन छह मंत्रियों ने बेंगलुरू से बीजेपी नेताओं के जरिए अपना इस्तीफा भेज दिया था। उसके बाद वीडियो जारी कर भी इस्तीफे की बात कही थी। इस्तीफे के बाद विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने उन्हें उपस्थित होकर बात रखने को कहा था, लेकिन शुक्रवार को वह सदन में नहीं पहुंचे।
