नई दिल्ली: अप्रैल में अंतरिक्ष से एक ऐस्टरॉइड (Asteroid) यानी क्षुद्रग्रह धरती से टकरा सकता है. इस ऐस्टरॉइड की रफ्तार 31 हजार किमी./घंटा बताई जा रही है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये ऐस्टरॉइड हिमालय जितना बड़ा बताया जा रहा है. नासा (NASA) ने इस ऐस्टरॉइड के धरती के बेहद करीब से गुजरने की पुष्टि की है. वैज्ञानिकों को आशंका है कि अगर ये ऐस्टरॉइड धरती से टकराया, तो महाविनाश होगा, हो सकता है कि दुनिया से पूरी मानवसभ्यता का ही अंत हो जाए. तो क्या वाकई ये खबर दुनिया के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चिंता बन गई है? क्या वाकई दुनिया बचाने के लिए हमारे पास सिर्फ एक महीने का ही वक्त बचा है? जानिए इस खबर की सच्चाई.
अरबों साल पहले महाविनाश हुआ था:-
धरती से तबाही मचाने वाला ऐस्टरॉइड टकराया था. ऐस्टरॉइड के टकराने से डायनासोर युग का अंत हुआ था. 2020 में ऐसा ही डर, ऐसा ही खौफ एक बार फिर पूरी दुनिया पर मंडराने लगा है. बड़े-बड़े वैज्ञानिकों की नींद उड़ी है. सुपरपावर अमेरिका तक घबराया हुआ है क्योंकि नासा ने पुष्टि की है कि ऐसा ही एक विशाल ऐस्टरॉइड एक बार फिर से धरती के बेहद करीब से गुजरने वाला है. दुनिया बदल देने वाली ये तारीख 29 अप्रैल हो सकती है. नासा की मानें तो फिलहाल चिंता की बात नहीं है. लेकिन कई वैज्ञानिक इसके बाद भी आशंका जता रहे हैं कि अगर इसकी टाइमिंग में कुछ सेकंड का भी अंतर हुआ तो ये ऐस्टरॉइड धरती से टकरा सकता है और तब बहुत मुमकिन है कि इसके बाद डायनासोर की तरह पूरी मानव सभ्यता का अंत हो जाए.
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ऐस्टरॉइड का नाम:-
इसे 52768 (1998 IR2) नाम दिया गया है. इसकी रफ्तार 19 हजार मील/घंटा है. वैज्ञानिकों को अंदाजा है कि ये ऐस्टरॉइड माउंट एवरेस्ट जितना विशाल हो सकता है. और धरती पर टकराया तो तबाही मच सकती है. 6.6 करोड़ साल पहले जिस एस्टेरॉयड के धरती पर टकराने से डायनासोर खत्म हो गए थे, उसकी रफ्तार 40 हजार मील प्रति घंटा थी, उस वक्त एस्टेरॉयड की टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि इससे धरती पर जीवन को तीन बार खत्म किया जा सकता था. हालांकि 2020 के इस एस्टेराइड के बारे में कहा जा रहा है कि इसकी रफ्तार डायनासोर युग को खत्म करने वाले एस्टेराइड की आधी है लेकिन इसी से आप अंदाजा लगाइए कि दुनिया पर अंतरिक्ष से आ रहा ये खतरा कितना बड़ा है और क्यों वैज्ञानिक इसके लेकर चिंतित ज्यादा हैं.
ऐसे हुआ था डायनासोर युग का अंत:-
6.6 करोड़ साल पहले मेक्सिको के युकटॉन प्रायद्वीप से ऐस्टरॉइड टकराया था जिससे वहां 111 मील चौड़ा और 20 मील गहरा गड्ढा बन गया था. वैज्ञानिकों ने इस गड्ढे की जांच की तो वहां की चट्टान में सल्फर कम्पाउन्ड पाया गया. ऐस्टरॉइड की टक्कर से ये चट्टान वाष्प में बदल गई थी जिसने हवा में धूल का बादल बना दिया था. नतीजा ये हुआ कि पूरी धरती ठंडी हो गई और एक दशक तक इसी स्थिति में बनी रही. उन हालात में अधिकतर जीवों की मौत हो गई और डायनासोर युग का भी अंत हो गया था.
