मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार अभी तक आधे पुलिस थानों में भी महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से शौचालय नहीं बनवा सकी है।
दीपक शर्मा
भोपाल: मध्यप्रदेश के दो शहर देश के सबसे साफ़ शहरों की फेहरिस्त में पहले और दूसरे पायदान पर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत को लेकर मिशन मोड में होने का दावा करते हैं. नारा बेटी पढ़ाने, बेटी बढ़ाने का भी है. महिला सशक्तिकरण को लेकर भी दावे बड़े-बड़े हैं, लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार अभी तक आधे पुलिस थानों में भी महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से शौचालय नहीं बनवा सकी है. राज्य के 65 फीसदी थानों में महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट नहीं हैं. वहीं राजधानी भोपाल के 60 फीसदी थानों की महिला पुलिस कर्मी अलग से टॉयलेट न होने के चलते शर्मिंदगी ओर बीमारियां झेल रही हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद पुलिस थाने के बाहर महिला पुलिसकर्मी का पोस्टर है, जिसमें वो सैल्यूट देती कह रही हैं हम उन्हें सलाम करते हैं, जो कानून का सम्मान करते हैं. लेकिन ये तंत्र पुलिस का कितना सम्मान करता है, ये देखना है तो थाने के पीछे चले आएं. तीन शौचालय हैं, जिसका इस्तेमाल तकरीबन 70 पुलिसवाले करते हैं. एक का दरवाजा टूटा है तो दूसरा बेकार. बाहर वॉश बेसिन लगा है, लेकिन पानी बूंद से टपकता है. और हां ये बताना भी ज़रूरी है कि 4 महिला पुलिसकर्मियों के लिए यहां अलग से कोई शौचालय नहीं थाने के इंचार्ज इंस्पेक्टर संजीव चौकसे ने कहा, यहां महिलाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है, पीछे कॉमन टॉयलेट है उसका इस्तेमाल कर रहे हैं. मिसरोद से हम अशोका गार्डन थाने पहुंचे यहां महिला डेस्क देखकर खुशी हुई. इसी डेस्क के अंदर बने कमरे में महिलाकर्मियों-फरियादियों के लिए एक शौचालय है. वैसे ये घुसते ही बंद हो जाता है, लेकिन यहां तैनात सब इंस्पेक्टर रूपा मिश्रा इंतजाम से खुश हैं, क्योंकि इससे पहले वो जहां तैनात थीं वहां इतनी सुविधा भी नहीं थी. यहां तैनात सब इंस्पेक्टर रूपा मिश्रा ने बताया यहां 60 लोगों का स्टाफ है, जिसमें 4 महिला पुलिसकर्मी हैं. यहां शौचालय है जिसे महिला पुलिसकर्मी और फरियादी दोनों इस्तेमाल करते हैं. लेकिन उन्होंने बातचीत में बताया कि कैसे दूसरे थानों जैसे एमपी नगर में महिला पुलिसकर्मियों को दिक्कत होती है।
दीपक शर्मा
भोपाल: मध्यप्रदेश के दो शहर देश के सबसे साफ़ शहरों की फेहरिस्त में पहले और दूसरे पायदान पर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत को लेकर मिशन मोड में होने का दावा करते हैं. नारा बेटी पढ़ाने, बेटी बढ़ाने का भी है. महिला सशक्तिकरण को लेकर भी दावे बड़े-बड़े हैं, लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार अभी तक आधे पुलिस थानों में भी महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से शौचालय नहीं बनवा सकी है. राज्य के 65 फीसदी थानों में महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट नहीं हैं. वहीं राजधानी भोपाल के 60 फीसदी थानों की महिला पुलिस कर्मी अलग से टॉयलेट न होने के चलते शर्मिंदगी ओर बीमारियां झेल रही हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद पुलिस थाने के बाहर महिला पुलिसकर्मी का पोस्टर है, जिसमें वो सैल्यूट देती कह रही हैं हम उन्हें सलाम करते हैं, जो कानून का सम्मान करते हैं. लेकिन ये तंत्र पुलिस का कितना सम्मान करता है, ये देखना है तो थाने के पीछे चले आएं. तीन शौचालय हैं, जिसका इस्तेमाल तकरीबन 70 पुलिसवाले करते हैं. एक का दरवाजा टूटा है तो दूसरा बेकार. बाहर वॉश बेसिन लगा है, लेकिन पानी बूंद से टपकता है. और हां ये बताना भी ज़रूरी है कि 4 महिला पुलिसकर्मियों के लिए यहां अलग से कोई शौचालय नहीं थाने के इंचार्ज इंस्पेक्टर संजीव चौकसे ने कहा, यहां महिलाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है, पीछे कॉमन टॉयलेट है उसका इस्तेमाल कर रहे हैं. मिसरोद से हम अशोका गार्डन थाने पहुंचे यहां महिला डेस्क देखकर खुशी हुई. इसी डेस्क के अंदर बने कमरे में महिलाकर्मियों-फरियादियों के लिए एक शौचालय है. वैसे ये घुसते ही बंद हो जाता है, लेकिन यहां तैनात सब इंस्पेक्टर रूपा मिश्रा इंतजाम से खुश हैं, क्योंकि इससे पहले वो जहां तैनात थीं वहां इतनी सुविधा भी नहीं थी. यहां तैनात सब इंस्पेक्टर रूपा मिश्रा ने बताया यहां 60 लोगों का स्टाफ है, जिसमें 4 महिला पुलिसकर्मी हैं. यहां शौचालय है जिसे महिला पुलिसकर्मी और फरियादी दोनों इस्तेमाल करते हैं. लेकिन उन्होंने बातचीत में बताया कि कैसे दूसरे थानों जैसे एमपी नगर में महिला पुलिसकर्मियों को दिक्कत होती है।
