भोपाल प्रदेश में लैंड रिकॉर्ड से होने वाली छेड़खानी से उपजे विवादों को रोकने के लिए राजस्व विभाग एक रिकॉर्ड की पांच से सात कॉपियां तैयार करवाने जा रहा है। ऑनलाइन किए जा रहे रिकाॅर्ड में से अगर एकाध में टेंपरिंग होती भी है तो शेष में इसमें बदलाव करना संभव नहीं होगा। यह ब्लाॅक चेन सिस्टम की तर्ज पर काम करेगा। अब तक लैंड रिकॉर्ड में एक भूमि के कई नामों पर दर्ज होने के मामले सामने आते रहते हैं। यह तय कर पाना बहुत मुश्किल हाेता है कि असली भू-स्वामी कौन है। इसी के साथ भूमि के उपयोग को लेकर भी विवाद की स्थिति बनती है। इस तरह के विवाद बरसों चलते रहते हैं। भू-सुधार के तहत राजस्व विभाग ऐसे किसी भी विवाद को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ लेगा। यह पता चल जाएगा कि रिकॉर्ड में छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।
पायलट प्रोजक्ट होगा शुरू-
लैंड रिकाॅर्ड की कॉपी को ब्लॉक चेेन सिस्टम के तहत रखे जाने की शुुरुआत प्रदेश के दो जिलों से की जाएगी। इनके नाम अभी तय नहीं हुए हैं। इसे शुरू करने के बाद जाे समस्याएं आएंगी उन्हें दूर किया जाएगा और बाद में यह पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी।
अब रिकाॅर्ड में टेंपरिंग संभव नहीं-
राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था में हैकर केवल एक रिकाॅर्ड में ही छेड़छाड़ कर सकता है। एक रिकाॅर्ड की अन्य कॉपियों में टेंपरिंग कर पाना संभव नहीं है। जिस सिस्टम ब्लॉकचेन में इसे रखा जाना है वह डिस्ट्रिब्यूटेड डाटा बेस होती है। इसमें लगातार कई रिकाॅर्ड्स को को संधारित किया जाता है जिन्हें ब्लॉक कहते हैं। इसकी खासियत यह है कि प्रत्येक ब्लॉक अपने पूर्व के ब्लॉक से लिंक रहता है। इस तकीनीक में अनेक कंप्यूटर पर गुप्त रूप से डाटा सुरक्षित रहता है। अधिकारियों का दावा है कि इसमें टेंपरिंग करना संभव नहीं है। ब्लॉकचेन तकनीक डिजिटल करेंसी बिटक्वाइन पर आधारित है।
जमीन से जुड़े विवाद रुकेंगे-
नए सिस्टम में लैंड रिकार्ड में टेंपरिंग नहीं हो सकेगी। भूमि संबंधी विवाद पर भी रोक लगेगी। इस दिशा में काम चल रहा है। एक रिकॉर्ड की कई काॅपियां होने से सब में गलत ढंग से बदलाव नहीं किए जा सकेंगे। तत्काल मिलान भी हो सकेगा।
एम सेलवेंद्रन, सचिव, राजस्व विभाग
