भोपाल। विधानसभा चुनाव नजदीक हे ऐसे में प्रदेश में राजनैतिक दलों के प्रत्याशी सकते में हे उनकी नींदें उडी हुई नजर आ रही हे। वोटर कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहा हे मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ उम्मीदवार चयन की जटिल प्रकिया से सभी सियासी दल जूझ रहे हैं। जिताऊ उम्मीदवार की खोज के लिए दोनों पार्टियों द्वारा अंतिम दौर के चुनावी सर्वे कराए जा रहे हैं, जिनके लिए मौजूदा विधायक एवं दूसरे दावेदार क्षेत्र से बाहर कदम रखने से भी हिचक रहे हैं। सर्वे में किसकी लाटरी खुलेगी और किसकी लुटिया डूबेगी, इसे लेकर दावेदारों की नींद उड़ी हुई है। भाजपा में एक चर्चा यह भी है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी एक गोपनीय सर्वे करा रहे हैं, जिसकी भनक राज्य इकाई तक को नहीं है। लगातार 15 साल से सत्ता से बाहर बैठी कांग्रेस इस चुनाव में करो या मरो की नीति के तहत काम कर रही है। पार्टी के सारे बड़े नेता पिछले एक माह से सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह किसी न किसी यात्रा के बहाने जनता से रूबरू होकर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस जानती है कि इस बार यदि वह सफल नहीं हुई तो मध्यप्रदेश भी उसके लिए यूपी, बिहार, बंगाल व तमिलनाडु की तरह दूर की कौड़ी हो जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जानबूझकर किसी एक नेता को प्रोजेक्ट न कर सभी के बीच संतुलन बैठाने का काम किया, जिसका असर यह रहा कि सभी बराबरी से मेहनत में जुटे हुए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष अब तक एक सर्वे करा चुके हैं। इस सर्वे के आधार पर वे कई सारे नेताओं को चुनाव लड़ने का इशारा कर चुके हैं। कई नेताओं को तो उन्होंने भोपाल आने से इंकार कर दिया है। उनका दूसरा सर्वे जारी है। सूत्र बताते हैं कि दूसरा सर्वे वही कंपनी कर रही है, जिसने गुजरात में सर्वे किया था। नाथ के करीबी नेताओं का कहना है कि उस कंपनी से सर्वे कराने का सुझाव राहुल गांधी ने दिया था, क्योंकि उसके नतीजे चुनाव परिणामों के बेहद नजदीक थे। सूत्र बताते हैं कि कुछ मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की संभावना के चलते उनमे घबराहट फैली हुई है। इसके विपरीत भाजपा में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सर्वे कराया जा रहा है। चौहान ने पिछले माह भाजपा विधायकों से वन-टू-वन मुलाकात के दौरान इस बात के संकेत दिए थे कि सर्वे चल रहा है उसमे यदि पास हुए तभी टिकट मिलेगा। सूत्र बताते हैं कि इस सर्वे के आधार पर लगभग आधे विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। इससे पहले हुए दो चुनावी सर्वे में भी 70 के करीब विधायकों की स्थिति क्षेत्र में दयनीय बतायी गई थी। एक चर्चा यह भी है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी कोई गोपनीय सर्वे करा रहे हैं जो वे दिल्ली में होने वाली टिकट वितरण की अंतिम बैठक के समय उजागर करेंगे।
खरा उतरे तो टिकट-
कांग्रेस पार्टी ने गुजरात और कर्नाटक में भी चुनावी सर्वे कराए थे, जिसके परिणाम उत्साहजनक रहे। पिछले अनुभवों के आधार पर प्रदेश अध्यक्ष मप्र में सर्वे करा रहे हैं। इस सर्वे के मापदंडों में जो दावेदार खरा उतरेगा, उसे टिकट मिलेगा। पंकज चतुर्वेदी, प्रवक्ता, मप्र कांग्रेस कमेटी
कई स्तर पर फीडबैक-
भाजपा चुनाव के पहले कई स्तरों से फीडबैक जुटाती है। फीडबैक जुटाने का कुछ काम संगठन के स्तर पर और कुुछ काम प्रोफशनल एजेंसियों से कराया जाता है। इनका उद्देश्य यह होता है कि व्यक्ति और मुद्दों के बारे में बारीकी से अध्ययन कराना, ताकि चुनाव में उनका पार्टी की बेहतरी के लिए इस्तेमाल किया जा सके। डॉ. दीपक विजयवर्गीय, प्रवक्ता मप्र भाजपा
