भोपाल। मध्य प्रदेश में साल के अंत में होने वाला विधान सभा चुनाव रोचक होने वाला है। मुख्य राजनीतिक दल बीजेपी-कांग्रेस के अलावा इस बार कई छोटे दल भी मैदान में उतरेंगे। वहीं सामान्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज संगठन ने आज राजधानी भोपाल में राजनीतिक पार्टी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। साथ ही सपाक्स समाज ने प्रदेश कार्यकारिणी का भी ऐलान कर दिया है। पूर्व आईएएस अधिकारी हीरालाल त्रिवेदी को राजनीतिक सपाक्स पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया है| पार्टी में 4 उपाध्यक्ष की भी नियुक्ति की गई है| ई पी एस परिहार को संयोजक और सुरेश तिवारी को संगठन महासचिव बनाया गया है| चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद चुनाव चिन्ह मिलेगा| सपाक्स के संरक्षण हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि पार्टी सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जल्द ही प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया जाएगा। त्रिवेदी आज राजधानी में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सपाक्स समाज आरक्षण और पिछड़ें का विरोधी नहीं है। जो पिछड़े हैं उन्हें आगे लाने के लिए आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन यह जाति या धर्म के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए। जिन्हें एक बार आरक्षण मिल गया है, उन्हें फिर से नहीं मिलना चाहिए। एससी-एसटी में एक विशेष वर्ग आरक्षण का लाभ ले रहा है, जबकि पिछड़ों को लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार से हम 2 साल से मांग कर रहे हैं। अब राजनीतिक दल के रूप में ही हम इस व्यवस्था को सुधारेंगे। सपाक्स समाज लोकसभा चुनाव भी लड़ेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल के पंजीयन का मामला चुनाव आयोग में लंबित है। यदि चुनाव से पहले पंजीयन नहीं होता है फिर भी सपाक्स पार्टी चुनाव लड़ेगी।सपाक्स का चुनाव लड़ना भाजपा- कांग्रेस दोनों दलों को झटका माना जा रहा है।लेकिन कांग्रेस से ज्यादा नुकसान भाजपा को बताया जा रहा है।
दरअसल, सपाक्स संस्था सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था मध्य प्रदेश के अधिकारियों कर्मचारियों का संगठन है।चुनाव में सपाक्स का मुख्य मुद्दा एससी-एसटी एक्ट और पदोन्नति मे आरक्षण का है। दो दिन पहले राजधानी भोपाल में एससी-एसटी को लेकर सवर्णों ने शिवराज सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था। इस आंदोलन से सवर्णों ने हुंकार भरी और ऐलान किया कि वह मध्यप्रदेश से शिवराज सरकार को उखाड़ फेंकेंगे और विधानसभा से लेकर लोकसभा तक अपने प्रतिनिधि भेजेंगे। विधानसभा चुनाव से पहले एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे सपाक्स ने सियासत के अखाड़े में बीजेपी-कांग्रेस को चुनौती दे दी है। सपाक्स को करणी सेना समेत कई और संगठनों का समर्थन भी मिला। उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि सपाक्स इस विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोल सकती है। सपाक्स की सियासत मजबूत पार्टियों के लिए आखिर कितनी मुश्किल पैदा करेगी ये आने वाला वक्त ही बताएगा।
मध्यप्रदेश में वोटों का गणित-
मध्यप्रदेश विधानसभा की 230 में से करीब 70 सीटें ऐसी हैं जो जातिगत आधारित हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा रीवा, सतना, ग्वालियर और सीधी में जातिगत समीकरण के आधार पर चुनाव लड़ा जाता है। यहां ब्राह्मण, ठाकुर और पटेल जाति के लोग चुनावी समीकरण बनाते और बिगाड़ते हैं। मध्यप्रदेश में कुल 5 करोड़ वोटर हैं। इनमें 40 लाख से ज्यादा ब्राह्मण वोटर जिस कारण यह कहा जा सका है कि इस चुनाव में ब्राह्मण फैक्टर मजबूत असर दिखा सकता है। विंध्य, महाकौशल, चंबल और मध्य क्षेत्र की करीब 60 सीटें ऐसी हैं जहां ब्राह्मण सीधा असर डालते हैं। विधानसभा चुनाव 2013 में प्रदेश में 7 फीसदी से ज्यादा ब्राह्मण वोटों का बिखराव देखने को मिला था। जबकि प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 35 सीटें एससी और 47 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। सपाक्स का मुख्य मुद्दा एससी-एसटी एक्ट का विरोध है ऐसे में अगर सपाक्स 230 सीटों पर चुनाव लड़ती है तो उसे 82 आरक्षित सीटों पर भी चुनाव लड़ना है।
