भोपाल मध्य प्रदेश में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कम्प्यूटर बाबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. कम्प्यूटर बाबा ने आरोप लगाया कि सरकार संत समाज की उपेक्षा कर रही है. उन्होंने कहा, 'सरकार धर्म के प्रति नहीं चलना चाहती है. सरकार मेरी भी नहीं सुन रही है.इससे पहले कम्प्यूटर बाबा ने सरकार से मांग की कि प्रदेश में एक नर्मदा मंत्रालय भी बनाया जाए. कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि नर्मदा नदी अच्छी स्थिति में नहीं है, इसके लिए एक मंत्रालय की भी आवश्यकता है और कई अन्य मंत्रालयों को स्थापित करना होगा.कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि जितना सुख सुविधा गौमाता के लिए चाहिए उतना ही नर्मदा के लिए भी चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री जो भी आवश्यक सोचते हैं, वह करेंगे.अपने इस्तीफे में कम्प्यूटर बाबा ने लिखा, 'मैं भारी मन से आपसे अनुरोध कर रहा हूं कि मैं संत-पुजारियों के हित में मठ-मंदिर सरंक्षण, गो संरक्षण, नर्मदा संरक्षण के साथ-साथ अनेकों धार्मिक कोर्यों के लिए अथक प्रयास करने के बाबजूद अपनी बात सरकार से मनवाने में नाकाम रहा. इसलिए संतों के भारी दबाव के कारण मैं अपना त्यागपत्र मुख्यमंत्री कार्यालय प्रेषित कर रहा हूं. तत्काल स्वीकृत करने का कष्ट करें.'उन्होंने इस्तीफे के बाद कहा कि मुझे ऐसा लगा कि शिवराज धर्म के ठीक विपरीत हैं और धर्म का काम कुछ करना ही नहीं चाहते हैं. मैंने गायों की स्थिति और नर्मदा से हो रहा अवैध उत्खनन के बारे में चर्चा की थी. लेकिन मुझे कुछ भी करने के लिए इजाजत नहीं दी गई. मैं संतों के विचार सरकार के सामने नहीं रख सका और इस लिए मैं ऐसी सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहता. उन्होंने गो मंत्रालय की तरह नर्मदा मंत्रालय बनाने की मांग भी की है.बता दें कि कंप्यूटर बाबा उन पांच बाबाओं में शामिल हैं जिन्हें शिवराज सरकार ने राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा था. इससे पहले कंप्यूटर बाबा तब चर्चा में आए थे जब वे राजधानी भोपाल पहुंचे और सरकारी गेस्ट हाउस की छत पर धूनी रमाकर बैठे थे।
