नई दिल्ली। कड़कड़डूमा फैमिली कोर्ट में पत्नी ने राजीनामे से तलाक की शर्त पर पति को तिहाड़ जेल से आजाद कराया। बुधवार को न्यायाधीश वीके खन्ना की अदालत में पत्नी ने छह महीने से जेल में बंद पति को तलाक की शर्त पर माफ कर बिना गुजारा भत्ता लिए अपना केस वापस ले लिया। शिकायतकर्ता की शादी 11 अक्टूबर 2004 को मुस्लिम रीति रिवाजों से हुई और उनके दो बेटे भी हैं। शादी के कुछ वर्षों बाद ही पति-पत्नी में झगड़े होने लगे, इस कारण एक अप्रैल 2010 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। पत्नी ने 2012 में गुजारे भत्ते की मांग के लिए अपील की और न्यायाधीश ने पति को हर महीने 3750 रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद भी पति ने खर्चा नहीं दिया और फरार हो गया। इसके बाद पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने 24 जुलाई 2018 को पति को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में बंद कर किया। बुधवार को कड़कड़डूमा फैमिली कोर्ट में न्यायाधीश वीके खन्ना के सामने पत्नी ने पिछला सारा खर्चा माफ कर केवल तलाक की शर्त पर अपना केस वापस लेने की अर्जी दी। पति ने पुलिस गिरफ्त में ही तीन बार 'मैं तुम्हें तलाक देता हूं' बोलकर तलाक के पेपर पर साइन कर पेपर कोर्ट में भेज दिए। इसके बाद कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पति को जेल से छोड़ने के आदेश जारी कर दिए। इस मामले में अधिवक्ता प्रदीप चौहान ने बताया कि पति-पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक के बाद दोनों बेटों में से शाहिद (13) की कस्टडी पति और आर्यन (11) की कस्टडी पत्नी ने ली। इसके अलावा महीने में एक बार पति-पत्नी अपने दोनों बच्चों से मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों से पति खर्चा न दे पाने के कारण तिहाड़ जेल में बंद था, लेकिन पत्नी ने तलाक की शर्त पर उसे को माफ कर अपना केस वापस लिया।
