सीहोर। मप्र शासन अभी नई रेत नीति के तहत नर्मदा नदी की खदानों की नीलामी की तैयारी कर रही है। जिसमें सीहोर जिले की 20 से अधिक खदानों की नीलामी की जानी है, लेकिन इससे पहले ही पांच घाटो पर 50 से अधिक कश्तियां नदी में उतरकर नदी के बीच बने टापुओ से रेत खनन में जुट गए हैं। साथ ही रेत का खनन कर ऊंचे-ऊंचे ढेर लगाने के साथ ही रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है। इतना ही नहीं बुधनी, नसरुल्लागंज, गोपालपुर, रेहटी, लाड़कुई थाने के सामने से बड़ी संख्या में रेत के अवैध व ओवरलोड रेत के डंपर निकलकर इंदौर, भोपाल तक पहुंच रहे हैं, लेकिन प्रशासन इक्का-दुक्का कार्रवाई कर चुप्पी साध लेता है।
जिले में नर्मदा नदी की संचालित 20 से अधिक रेत खदानों पर 15 जून से 30 सितंबर तक रेत खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था, वहीं 11 स्टाकों पर भी रोक लगा दी थी। इसके बाद भी प्रशासन अवैध रेत खनन व परिवहन पर पूर्ण रोक लगाने में नाकाम साबि रही। खास बात तो यह है कि मप्र शासन नमर्द क्षेत्र की खदानों की नीलामी करने की तैयारी कर रही है, वहीं रेत माफिया नर्मदा तटो पर खदानाें का सर्वे कर रहे है, लेकिन उससे पहले ही स्थानीय रेत माफिया नदी में कश्तियां उतार चुके हैं, जो तेज धार की बीच अवैध खनन व परिवहन में जुटे हुए हैं। इतना ही नहीं जगह-जगह रेत के ढेर लगाकर व डंपरों से प्रतिबंध होने के बाद भी अवैध परिवहन किया जा रहा है। हालांकि पुलिस, खनिज व प्रशासनिक अमले को भी मामले की पूरी जानकारी है, लेकिन छुट-पुट कार्रवाई ही की जा रही हैं।
एक हजार में खरीदकर तीन हजार में बेचते हैं रेत:-
इस समय लगातार बारिश होने के कारण भरपूर रेत जमा हो गई है, लेकिन अभी तक खदानों की नीलामी नहीं होने के कारण व किनारों पर पानी भरा होने के कारण रेत माफिया कश्ती के माध्यम से नदी के बीच में बने टापू पर से प्रतिदिन रेत खनन में जुटे हुए है। नर्मदा नदी में अवैध तरीेके से घाट पर इंजन से चलने वाली 50 से अधिक कश्तियां रेत का परिवहन कर रही हैं। एक कश्ती में 5 से 7 मजदूर होते हैं, जो दिन भर में 6 से 7 कश्ती रेत का परिवहन कर स्थानीय रेत माफियाओं को देते हैं। प्रति कश्ती के मजदूर एक हजार रुपए लेते हैं। यह कश्तियां मजदूरों की ही होती है, जिसमें अन्य मजदूर भी उनके होते हैं, जो टापू से एक कश्ती में करीब डेढ़ बरास रेत भरकर लाते हैं। इस रेत को स्थानीय रेत माफिया ट्रैक्टर-ट्रालियों से ले जाकर आसपास 3 हजार रुपए में बेचते हैं, जो रेत घाट से नहीं बिक पाती उसे ठेकेदार के ट्रकों द्वारा स्टाक पर रात में एकत्रित कर ली जाती है। ऐसा नहीं है कि खनिज विभाग और पुलिस-प्रशासन को नहीं पता है। सब कुछ पता होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से मां नर्मदा को रेत माफिया छलनी करने में लगे हुए हैं।
नदी में बिछा कश्तियों का जाल, इन घाटो पर हो रहा खनन:-
इस समय जहां नर्मदा तट की खदानों की नीलामी चल रही है और किनारों पर नदी का पानी भी भरा हुआ है, लेकिन रेत माफिया इस कदर हावी हैं कि नीलामी से पहले ही अवैध खनन शुरू कर दिया है। रेत माफिया नर्मदा तट के छीपानेर, चौरसाखेड़ी, आवलीघाट, शीलकंठ में कश्तियों से रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। यह रेत हर रोज परिवहन भी की जा रही है, लेकिन बुधनी, नसरुल्लागंज, रेहटी, गोपालपुर, लाड़कुई थानों के सामने से परिवहन होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
लगाई जाएगी ड्यूटी:-
यदि कश्तियों से रेत का अवैध खनन व परिवहन किया जा रहा है, तो इसको लेकर एक इंस्पेक्टर को मौके पर तैनात किया जाएगा। साथ ही कश्ती जब्त कर रेत माफियाओं पर मामले दर्ज किए जाएंगे।