इंदौर .नगर निगम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और बेलदार असलम खान की 25 करोड़ की 67 संपत्तियों को अटैच करने को आयकर विभाग के ट्रिब्यूनल ने मंजूरी दे दी है। विभाग की बेनामी विंग ने 30 मार्च को इन संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ असलम ने ट्रिब्यूनल में अपील की थी, जो खारिज हो गई।
लोकायुक्त ने अगस्त 2018 में असलम के घर पर छापा मारा था। अपील खारिज होने से बेनामी एक्ट के तहत असलम के साथ ही जिनके नाम पर संपत्तियां ली गईं, उन पर भी केस चलेगा। आरोप साबित होने पर सात साल की सजा के साथ संपत्ति के मूल्य के बराबर पेनाल्टी का प्रावधान है। इंदौर में यह पहली संपत्ति है, जो बेनामी एक्ट आने के बाद अटैच की गई थी। अफसरों के मुताबिक, कुछ संपत्तियां बेचकर असलम ने शेयर खरीदे थे। उन्हें भी विंग ने बेनामी कमाई से खरीदा मानते हुए जब्त कर लिया है।
इन संपत्तियों का खरीदी मूल्य चार करोड़ रुपए करीब था, लेकिन अब इसका बाजार मूल्य 25 करोड़ रुपए हो चुका है। अब ये संपत्तियां तभी छूट पाएंगी, जब वह आय से अधिक मामले में निर्दोष साबित होने के साथ ही उच्च अपील स्तर पर इनके वैधानिक आय स्त्रोत साबित कर सके।
42 बीमा पॉलिसी, बैंक खातों के जरिए सवा तीन करोड़ का लेनदेन:-
असलम ने परिजनों के नाम पर 42 बीमा पॉलिसी खरीदीं। यह सभी एश्योर्ड रिटर्न वाली थीं। जांच में सामने आया कि उसने मां बिलकिश खान, पत्नी रेहला और नाबालिग बच्चों के नाम पर ज्यादातर प्रॉपर्टी खरीदी। इन्हें खरीदने के लिए उसने परिजन के 10 बैंक खातों के जरिए सवा तीन करोड़ रुपए का लेनदेन किया था।
मप्र में 500 से अधिक संपत्तियां हो चुकीं अटैच:-
बेनामी एक्ट लागू होने के बाद मप्र में आयकर विभाग 500 से अधिक संपत्तियां अटैच कर चुका है। इसमें 200 से अधिक अटैचमेंट को न्यायाधिकरण से भी मंजूरी मिल चुकी है। अधिकांश मामलों में तो लोकायुक्त ने अभी तक आरोपियों के खिलाफ चालान ही पेश नहीं किया।
जांच में खुलासा:-
आय का कोई स्रोत नहीं लोकायुक्त से संपत्तियों की जानकारी मिलने के बाद आयकर विभाग की बेनामी विंग ने पड़ताल में पाया कि असलम के परिजनों के पास आय का कोई ऐसा स्रोत नहीं है, जिससे इतनी संपत्तियां खरीदी जा सकें। प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि सारी प्रॉपर्टी उसकी ही थी। महू में 20 हजार वर्गफीट की कृषि भूमि को छोड़ उसके सारे प्लॉट, एक फ्लैट और एक कमर्शियल प्रॉपर्टी छोटी साइज की थी। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि असलम के पास नगर निगम से जुड़ी कुछ ऐसी अहम जानकारियां थीं, जिसे वह रियल एस्टेट डेवलपर व अन्य प्रभावशाली लोगों को देता था। इसके बदले में उसे प्रॉपर्टी मिलती गई।
