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Sunday, April 26, 2020

मात्र 300 रुपये में पता चल सकेगा कि मरीज कोरोना पॉजिटिव हैं या निगेटिव

इंदौर। कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने और उसकी जांच आसान व सस्ती बनाने के लिए आशा की एक और किरण नजर आ रही है। देशभर से अब ऐसे मरीजों के चेस्ट एक्सरे एकत्र किए जा रहे हैं जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई हो या निगेटिव। इन एक्सरे से होने वाली स्टडी से पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि मरीज को होने वाला निमोनिया कोरोना की वजह बन सकता है या नहीं। यदि यह शोध सफल हुआ तो आज कोरोना की जिस जांच में करीब तीन हजार रुपये का खर्च आता है, वह सिर्फ 300 रुपये आएगा। वहीं, जांच प्रक्रिया और भी आसान व तेज होगी। यह कोशिश शुरू भी हो चुकी है और देशभर से एक लाख एक्सरे में से 20 हजार संग्रहित किए जा चुके हैं। इंदौर के राज्य कर्मचारी बीमा निगम आदर्श चिकित्सालय से भी एक्सरे भेजे जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भी अनुमति दी है।
मल्टी-सेंटरिक प्रोजेक्ट 'नोवेल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम टू स्क्रीन कोविड 19 पेशेंट्स फ्रॉम एक्सरे, सीटी स्केन ऑफ थ्रॉक्स एंड वोकल सैंपलिंग थ्रू अराउंड एप्प एंड स्ट्रॉन्ग थ्रू क्लाउड' के तहत यह कार्य किया जा रहा है। इसे क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया ने भी मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत संबंधित एक्सरे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम में भेजा जाएगा। वहां सॉफ्टवेयर की मदद से यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि कोरोना पॉजिटिव और निगेटिव आने वाले मरीजों के एक्सरे किस तरह दिख रहे हैं। इसके अध्ययन की रिपोर्ट के बाद यह जानकारी आईसीएमआर को भेजी जाएगी। इस प्रयोग के जरिए अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आकलन 99 प्रतिशत सही रिपोर्ट देगा। देशभर में किए जा रहे इस प्रयोग के तहत प्रदेश से कर्मचारी राज्य बीमा निगम आदर्श चिकित्सालय में पदस्थ पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ तथा को-इन्वेस्टिगेटर डॉ. राजकुमार सिसोदिया को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक 250 से ज्यादा कोरोना के सस्पेक्टेड केस का अध्ययन कर चुके डॉ. सिसोदिया बताते हैं कि यह प्रोजेक्ट बेंगलुरु, उदयपुर और जोधपुर के मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी और आईटी एक्सपर्ट ने बनाया है। इस प्रोजेक्ट के संरक्षक सांसद डॉ. विकास महात्मे हैं।
एक्सरे कराना है ज्यादा सहज:-
डॉ. सिसोदिया के अनुसार पहले एक्सरे और उसकी रिपोर्ट इन्वेस्टिगेटर को भेजी जाएगी। उनके अध्ययन के बाद आईसीएमआर को भेजी जाएगी। यह प्रयोग सफल हुआ तो महज 300 रुपये में एक्सरे कराकर यह पता लगाया जा सकेगा कि मरीज कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव। हमारे देश में एक्सरे करना आसान और कम खर्चीली प्रक्रिया है। इसके साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र या जहां कोरोना जांच की किट भी नहीं है, वहां भी वक्त पर जांच कराई जा सकेगी। एक्सरे जब सुलभ माध्यम होगा तो उससे रिपोर्ट मिलना भी आसान हो जाएगा और परिणामस्वरूप रिपोर्ट भी जल्दी मिल जाएगी। कम खर्चीला होने से लोग इसे कराने में भी कतराएंगे नहीं।