भोपाल मध्यप्रदेश 2019 के चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस की प्रयोगशाला में तब्दील हो गया है. पीएम मोदी से लेकर राहुल गांधी तक एमपी इलेक्शन के जरिए अगले साल होने वाले चुनाव का खाका खींचने में जुट गए हैं. और यहीं कारण है कि चुनाव आचार संहिता से पहले पीएम मोदी और राहुल गांधी ने एमपी में अपने दौरे बढ़ा दिए हैं, ताकि केंद्र की सत्ता के लिए छिड़ने वाले संग्राम से पहले एमपी के चुनाव चुनावी संग्राम से जीत हासिल की जा सके.क्या मध्यप्रदेश, बीजेपी और कांग्रेस के लिए 2019 के चुनाव की प्रयोगशाला बन गया है. ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अगले साल होने वाले देश की सत्ता के संग्राम से पहले पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी ने एमपी में जीत के प्रयोग करना शुरु कर दिया है. लोकसभा चुनाव के फाइनल मुकालबे से पहले होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव को दोनों ही दल सेमीफाइनल मुकाबला मान कर चल रहे हैं और यहीं कारण है कि नेताओं के बोलने, रोड शो करने और एकदूसरे पर हमले बोलने के तरीके भी बीते चुनाव के मुकाबले अलग और तीखे दिख रहे हैं.यहीं कारण है कि पीएम मोदी और राहुल गांधी ने एमपी से देश की जीत के लिए लोकसभा की चुनाव की जमीन तैयार करना तेज कर दिया है और इसके लिए नई घोषणाओं, रोड शो और जनसभाएं और मंदिर-मस्जिद को जरिया बनाया जा रहा है. इतना ही नहीं साफ्ट हिंदू बनाम सेक्यूलर छवि बनाने की कोशिशें भी मध्यप्रदेश में फल फूल रही है.
राहुल गांधी के दौरे-
चुनाव के ठीक पहले मंदसौर में किसानों के कर्जमाफी का ऐलान करने वाले राहुल गांधी 17 सितंबर को भोपाल पहुंचे और पूरे प्रदेश से जुटे कार्यकर्ताओं को जीत का मत्र दिया. कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने वाले राहुल गांधी का अगला टारगेट प्रदेश का विंध्य इलाका है. 2013 के चुनाव में सबसे ज्यादा बारह सीटें यहीं से कांग्रेस के खाते में आई था और यहीं कारण है कि विंध्य में बीजेपी को पठखनी देने के लिए राहुल दो दिन 27 और 28 सितंबर को सतना और रीवा में रोड शो करेंगे. उनकी शुरुआत राम की नगरी चित्रकूट में कामतानाथ के दर्शन के साथ होगी.
पीएम मोदी के दौरे-
वहीं एमपी से 2014 के चुनाव में बंपर जीत हासिल करने वाली बीजेपी का फोकस भी अब 2018 और फिर उसी के सहारे 2019 के चुनाव पर टिका है. यहीं कारण है कि चौदह सितंबर को इंदौर आये पीएम मोदी ने सैफी मस्जिद जाकर बीजेपी के सॉफ्ट सेक्युलरिज़्म चेहरे को दिखाने की कोशिश की. पीएम मोदी अब पच्चीस सितंबर को भोपाल में होंगे. जहां वो अब तक के सबसे बड़े बीजेपी कार्यकर्ता महाकुंभ को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी का ये आयोजन करीब ढाई महीने बाद और फिर अगले साल होने वाले लोकसभा के चुनाव पर फोकस होगा.बहरहाल प्रदेश में दिनोंदिन तेज हो रहे सियासी संग्राम में अब बीजेपी और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के फेरों से साफ है कि देश की सत्ता के सेमिफायनल मुकाबले में हर कोई अपने सभी दांव चल कर एक-दूसरे को मात देना चाहता है, ताकि यहां के सफल प्रयोगों के सहारे राजनेता 2019 के चुनाव की राह को आसान बना सके।
