जयपुर (राजस्थान)अगर कोई बीवी अपने पति से कहे कि वह उसे तो प्यार करती ही है, लेकिन किसी और से भी उसे प्यार है और वह दोनों में से किसी को नहीं छोड़ना चाहती. तो क्या होगा? एक अनसुनी कहानी. मैं चाहती तो छुपा सकती थी लेकिन मैंने छुपाया नहीं. अपने पति को उस आदमी के बारे में बता दिया जिससे मुझे प्यार हो गया था.' फिर पति पत्नी के रिश्ते में एक मनमुटाव हुआ. स्वाभाविक तौर पर पति हैरान रह गया था और वह अपनी बीवी को हर तरह से वापस पाने की कोशिश करने लगा. लेकिन, एक अनहोनी हुई रिश्ते में और सामने आई लव, सेक्स और धोखे की एक अनसुनी कहानी. मालिनी मिडिल क्लास की औरत का एक चेहरा है. उसे बचपन से ही महाभारत की द्रौपदी का किरदार बहुत पसंद था और उसकी अपनी फैंटेसी की वजह भी. वह सोचती थी कि क्यों एक औरत एक से ज़्यादा आदमियों के साथ प्यार नहीं कर सकती? वह बड़ी हो रही थी और उसे समझ आ रहा था कि यह पुरुष प्रधान समाज इसकी इजाज़त क्यों नहीं देता और ऐसा करने वाली औरत को क्या-क्या कहा जाता है? समाज से लड़ने का मालिनी का कोई इरादा नहीं था. वह समाज के बने नियमों पर चलने के लिए खुद को मना चुकी थी. कहानियों की फैंटेसी कहानियों तक ही ठीक है, हकीकत में नहीं, यह भी वह मान चुकी थी. उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली मालिनी की शादी उसी तरह हुई जैसे बाकी लड़कियों की होती है. वह राजस्थान के जयपुर में ससुराल में उसी तरह रही, जैसे अमूमन सभी लड़कियां रहती हैं. शादी के बाद एक बच्चा हुआ और सब कुछ सामान्य जीवन की तरह ही था.
मालिनी : मैं चाहती तो ये सब तुम्हें कभी न बताती. मेरे कुछ दोस्त हैं जिनके शादी के बाद भी अफेयर चल रहे हैं लेकिन वो अपने पार्टनर से तो क्या बल्कि कई लोगों से छुपाते हैं. सच कबूल नहीं करते. लेकिन, मुझे ठीक नहीं लगता विजय. तुम मेरे पति हो और मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूं इसलिए मैं चाहती हूं कि तुम वो सब जानो जो मेरे मन और जीवन में चल रहा है.
विजय : तुम कह रही हो कि मैं ये समझूं कि तुम किसी और से प्यार करने लगी हो? आर यू मैड मालिनी?
मालिनी : किसी और से नहीं, किसी और से भी. ऐसा नहीं है कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती. लेकिन मैं उससे भी प्यार करने लगी हूं.
बात यहां तक कैसे पहुंची थी? अस्ल में, मिडिल क्लास की जद्दोजहद में मालिनी के पति विजय मसरूफ होता चला गया. दोनों के रिश्ते से रोमांस, एक दूसरे का साथ वक्त बिताना और सुख दुख बांटने का सिलसिला खत्म होता चला गया. विजय अपनी दफ्तरी उलझनों में घिरा रहता और मालिनी के साथ उसका रिश्ता वैसे ही चलने लगा, जैसा अक्सर मिडिल क्लास में चलता है. बोरिंग, एक मशीन की तरह, रोज़ वही सब करना. मालिनी पढ़ी लिखी और समझदार औरत थी इसलिए उसके कुछ दोस्त जयपुर में भी थे. दोस्तों के साथ घुलना मिलना और कुछ पार्ट टाइम करना उसके जीवन का हिस्सा शादी के बाद से ही रहा था. विजय के साथ शादी का रिश्ता जब मशीनी सा होने लगा तब मालिनी के जीवन में कपिल आया. कपिल एक शरीफ, शादीशुदा और समझदार आदमी था. कपिल की शादी भी उसी तरह चल रही थी जैसी विजय की. यानी वह भी अपने काम में ज़्यादा बिज़ी होने की वजह से बीवी और घर को समय नहीं दे पाता था. फ्रेंड सर्किल में हुई कपिल और मालिनी की मुलाकात रंग लाने लगी. दोनों की ट्यूनिंग एक ही बार में बन गई. दोनों एक दूसरे के नज़दीक आने लगे. कपिल पूरे एहतियात के साथ मालिनी से मिलता और उसकी बातों को ध्यान से सुनकर इस तरह रिएक्ट करता कि मालिनी को यह एहसास होता कि कपिल उसके विचारों व भावनाओं को समझकर उनकी इज़्ज़त भी करता है. ये सब बातें मालिनी को और आगे बढ़ने के लिए धकेल रही थीं. कपिल के साथ मालिनी का रिश्ता कुछ अंतरंग स्पर्शों तक पहुंच चुका था. ऐसे में, उसे खयाल आया कि विजय से ये सब छुपाना धोखा होगा. उसने तय किया कि वह विजय को सब कुछ बताएगी. उसने कपिल के साथ अपनी मुलाकात के साथ ही इस बारे में विजय को सब कुछ बताया कि उसके मन में कपिल के लिए क्या फीलिंग्स पैदा हो चुकी थीं. मालिनी की कुछ बातें विजय को समझ में आ रही थीं और बहुत सी नहीं. उसे एहसास हो रहा था कि शादी के बाद बहुत सी ज़रूरी बातें उससे इग्नोर हो गईं. उसे खयाल आ रहा था कि पिछले कुछ वक्त में रोमांस, सेक्स, साथ वक्त बिताना और घूमना फिरना सब कुछ बहुत कम हो चुका था. इसलिए मालिनी के जीवन में जो खालीपन आया, उसे किसी और ने भर दिया. विजय ने कहा कि उसे अपनी गलती का एहसास था और वह हर कोशिश करने के लिए तैयार था जिससे मालिनी वापस वैसी ही हो जाए, जैसी थी. कभी परेशान हुआ, कभी रोमैंटिक तो कभी ज़रूरत से ज़्यादा खयाल रखने की हर कोशिश विजय ने करना शुरू कर दी थी. मालिनी सब महसूस कर रही थी. और, वह उसे समझाना चाहती थी कि वह ये सब बेवजह कर रहा है.
मालिनी : आय लव यू विजय. तुम ये सब क्यों कर रहे हो? मैं तुमसे अलग नहीं होना चाहती बाबा. मैं सिर्फ ये कह रही हूं कि जो भी हुआ, उसकी वजह से मेरी ज़िंदगी में एक और आदमी आ गया है, जिसे मैं चाहने लगी हूं. तुम अच्छे हो, वो भी अच्छा है. तुम मुझे प्यार करते हो, मेरा खयाल रखते हो, मेरी खुशी चाहते हो और वो भी तो.
विजय : मैं क्या करूं मालिनी? मैं ये बर्दाश्त कैसे करूं कि तुम्हें मुझसे कोई बांट रहा है?
मालिनी कई बार विजय को समझाती और विजय अपनी उलझनों में मालिनी के परिवार में किसी से कुछ कहता तो कभी अपनी फैमिली में. इसके साथ ही, विजय ने बिस्तर पर मालिनी के साथ बहुत कुछ नया करना शुरू कर दिया था. उसकी मानसिक हालत ऐसी थी कि वह हर हाल में साबित करना चाहता था कि वह उस आदमी से बेहतर था जिसे मालिनी पसंद करने लगी थी. मालिनी को पता था कि विजय खुद के साथ एक किस्म का धोखा महसूस कर रहा था इसलिए वह उसे कभी कभी अनचाहे ही बिस्तर पर टॉर्चर तक करने लगा था. मालिनी समझाती भी और विजय की इन सारी कोशिशों के बारे में कपिल को भी बताती. कपिल सब समझकर कहता कि वह रास्ते से हटने को तैयार है लेकिन मालिनी नहीं चाहती थी कि वह उसकी ज़िंदगी से जाए. आखिर, मालिनी ने विजय को बार-बार समझाकर इस बात पर मना लिया कि एक बार वह कपिल से मुलाकात कर ले. विजय को समझ नहीं आया कि वह उस आदमी से कैसे मिले, जो उसकी बीवी से प्यार करता है. तुम मुझे नौजवानी की उम्र से चाहते हो. बरसों से मुझे प्यार करते हो. क्या मैं इस लायक नहीं हूं कि मुझसे कोई प्यार करे? एक बार मिलकर तो देखो कि वो कौन आदमी है जो मुझे उस कदर प्यार करता है, जितना तुम करते हो. तुम्हारी जगह मैं होती तो मैं तो ज़रूर मिलना चाहती.' मालिनी की यह बात सुनकर विजय ने कपिल से मिलना तय किया.
विजय : मुझे नहीं पता कि मैं क्या कहूं? लेकिन, तुम मेरी बीवी से प्यार करते हो और मेरी बीवी भी तुमसे... क्यों करते हो उससे प्यार?
कपिल : क्योंकि वो स्पेशल है. वो सच कहना और समझना जानती है. वो रिश्ते बनाना और निभाना जानती है. उसमें वो हर क्वालिटी है, जो एक आदमी एक औरत में चाहता है.
विजय : हां, वो तो है. अच्छा, मेरी जगह तुम होते, मतलब तुम्हारी बीवी ऐसा करती और मैं उसका आशिक होता तो तुम क्या करते?
कपिल : अगर मेरी बीवी मालिनी होती तो यकीनन वो वही करती जो वो कर रही है और मैं भी वही कर रहा होता, जो तुम कर रहे हो.
विजय और कपिल की पहली मुलाकात बहुत लंबी थी और जब खत्म हुई तो एक ऐसे मोड़ पर जिसकी दुआ तो मालिनी कर रही थी लेकिन उसे यकीन नहीं था.
विजय : आय एम हैपी मालिनी कि तुमने कपिल से मिलवाया. वो वाकई सुलझा हुआ और अच्छा बंदा है. अच्छा लगा उससे मिलकर. सच.
मालिनी : ओ विजय! थैंक यू विजय कि तुमने ठंडे दिमाग और साफ दिल से सब कुछ महसूस किया. आय लव यू.
विजय : मुझे लगता था कि प्यार एक बार हो गया तो हो गया. लेकिन, प्यार तो प्यार है मालिनी, कभी भी किसी से भी हो सकता है. मैं समझ सकता हूं कि तुम गलत नहीं थीं. अब बस यह तय करना रह गया है कि इसे प्रैक्टिकली कैसे एक्सेप्ट करना है.
विजय और कपिल की मुलाकातें और बातचीत आगे भी जारी रहीं और दोनों अच्छे दोस्त बन गए. मालिनी दोनों को यह बात साफ तौर पर बता चुकी थी कि वह दोनों से प्यार करती है और किसी की वजह से किसी के लिए भी उसके मन में कोई कॉम्पटीशन या कम्पैरिज़न की भावना नहीं है. वह दोनों के साथ रिश्ता रखते हुए जीवन गुज़ारना चाहती थी. और धीरे-धीरे विजय ने भी इस बात को मंज़ूर कर लिया कि उसकी ज़िंदगी औरों जैसी नहीं बल्कि अलग है और वह इसके लिए तैयार था. कहानी एक तरह से यहीं खत्म हो गई लेकिन मालिनी की मुश्किलें इसके बाद भी जारी हैं. उसके कुछ दोस्त और परिचित समझते हैं कि वह ओपन सेक्स में विश्वास रखती है. कुछ ऐसे भी हैं जो मालिनी के इस डिसीज़न के बाद मानने लगे कि मालिनी 'अवेलेबल' है यानी वो उसके साथ उस तरह फ्लर्ट करते हैं, जैसे बाज़ार की किसी लड़की के साथ आम तौर से किया जाता है. मालिनी कहती है कि प्यार और सेक्स में फर्क करना सोसायटी को अभी सीखना है.
(यह कहानी हफपोस्ट के एक लेख पर आधारित है जिसमें एक महिला ने अपने रिश्ते के बारे में यह खुलासा किया था. कहानी में नाम वास्तविक नहीं हैं क्योंकि मूल लेख में वास्तविक नामों का खुलासा नहीं किया गया है.)
