दिल्ली। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp लगातार यह दावा कर रहा है कि वह फेक न्यूज के खिलाफ कदम उठा रहा है. WhatsApp की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार कंपनी ने एक मशीन लर्निंग सिस्टम बनाया है. इसके जरिए उन अकाउंट्स की पहचान की जाती है, जो एक साथ कई यानी बल्क मैसेज करते हैं. WhatsApp का कहना है कि ऐसा करने के पीछे उसकी कोशिश है कि गलत कंटेंट शेयर किये जाने से रोका जा सके.
एक बयान में कहा गया है, 'दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की तरह लोग WhatsApp का भी गलत इस्तेमाल करते हैं. कुछ लोग ऐसे लिंक्स भेजते हैं जो दूसरों की निजी जानकारी इकट्ठा करने के लिए बनाया गया होता है. ऑटोमैटिक और बल्क मैसेज भेजना हमारी शर्तों और नियमों का उल्लंघन करते हैं. हमारी प्राथमिकता है कि हम ऐसी चीजों को रोकें.'
WhatsApp ने दावा किया है कि उसने मशीन लर्निंग सिस्टम के जरिए हर महीने 20 लाख से ज्यादा अकाउंट्स बैन किया है. इससे पहले बुधवार को WhatsApp ने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रही है.
कंपनी का कहना है कि WhatsApp के जरिए फेक न्यूज़ फैलाए जा रहे हैं. WhatsApp ने इसको लेकर पार्टियों को चेतावनी भी दी है. भारत में करीब 20 करोड़ लोग WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं. पिछले साल राजस्थान और मध्य प्रदेश में चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने दर्जनों ग्रुप बना कर WhatsApp का जम कर इस्तेमाल किया था.
बीजेपी और कांग्रेस के मीडिया प्रभारी का कहना है कि वे लोग WhatsApp के जरिए फेक न्यूज़ नहीं फैलाते हैं. पिछले साल व्हाट्सऐप की भारत में जम कर आलोचना हुई थी. WhatsApp पर फेक न्यूज़ के चलते भारत में कई जगह मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई थी.
