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Saturday, February 29, 2020

2/29/2020 07:18:00 AM

गृह मंत्री अमित शाह ने दंगों को लेकर दिया बड़ा बयान, CAA पर कही यह बड़ी बात

भुवनेश्वर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नागरिकता कानून पर विपक्ष पर अफवाह फैलाकर दंगे भड़काने का आरोप लगाया. शाह ने कहा कि विपक्ष ने साजिश के तहत अफवाह फैलाई. गृह मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि नागरिकता कानून से किसी मुस्लिम या अल्पसंख्यक की नागरिकता नहीं जाएगी.  शाह ने भुवनेश्वर में पार्टी कार्यकर्ताओं की रैली में ये बातें कहीं. 
शाह ने कहा, "नागरिकता कानून पर कांग्रेस, ममता दीदी, सपा, बसपा ये सारे लोग विरोध कर रहे हैं. ये कह रहे हैं कि इससे अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार चले जाएंगे. लेकिन इतना झूठ क्यों फैला रहे हैं. नागरिकता कानून से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी. यह नागरिकता देने का कानून है, नागरिकता लेने का नहीं."  
शाह ने कहा, "नागरिकता हम पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में पीड़ित हिंदुओं को दे रहे हैं. क्या इन लोगों को नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए? क्या इन लोगों को घर नहीं मिलना चाहिए? उनके मानवाधिकार का क्या? कांग्रेस पार्टी का हर नेता 50 के दशक में बोला है कि हम पीड़ित नागरिकों को नागरिकता देंगे. नरेंद्र मोदी जी आए, लाखों-करोड़ों लोगों को नागरिकता कानून पास कराया." 
शाह ने कहा, "नरेंद्र मोदी सरकार ने 70 से अटके मामलों को हल किया है. कश्मीर से धारा 370 हटाई. हमारा कश्मीर जो 70 साल से अलग-थलग था, उसे मोदी जी ने भारत का मुकुट बना दिया है. कांग्रेस पार्टी ने राम मंदिर नहीं बनने दिया. मोदी सरकार ने ट्रस्ट बनाकर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है. जल्द ही अयोध्या में आसमान छूटा राम मंदिर बनेगा." 
गौरतलब है कि भुवनेश्वर में आज पूर्वी क्षेत्र परिषद की 24वीं बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता गृहमंत्री अमित शाह ने की. बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक शामिल हुए. पूर्वी जोनल काउंसिल के  बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सदस्य हैं. दौरान सीएम पटनायक ने गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के लिए दोपहर का भोज भी रखा. हालांकि इस बैठक में झारखंड के मंत्री हेमंत सोरेन ने हिस्सा नहीं लिया.

Thursday, February 27, 2020

2/27/2020 07:02:00 AM

रिटायर्ड कर्नल ने पत्नी की हत्या कर शव के किया सेंकडो टुकड़े टिफिन से बरामद, मिली उम्रकैद

भुवनेश्वर: अपनी पत्नी की हत्या कर उसके 300 टुकड़े करने वाले आर्मी के रिटायर्ड कर्नल को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई है. रिटायर्ड कर्नल सोमनाथ परीदा ने करीब 6 साल पहले अपनी 61 वर्षीय पत्नी की हत्या कर उसके शव के 300 टुकड़े कर उसे टिफिन बॉक्स में डाल दिया था. ओडिशा (Odisha) की स्थानीय अदालत ने मंगलवार को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई.
खुरदा की जिला व सत्र न्यायालय ने परीदा को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी पाया. कोर्ट ने 24 गवाहों और साइंटिफिक टीम के प्रमाणों के आधार पर ये फैसला सुनाया है. दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. सरकारी वकील बीरेन कुमार पांडा ने बताया कि सजा सुनते ही परीदा अदालत में फूट-फूटकर रोने लगा. उसने कोर्ट से सजा कम करने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने उसकी एक नहीं सुनी.
क्या है पूरा मामला:-
ये पूरा मामला जून 2013 का है. रिटायर्ड कर्नल सोमनाथ परीदा और उसकी पत्नी उषाश्री के बीच किसी बात को लेकर अनबन हुई. इसके बाद गुस्से से लाल परीदा ने अपनी पत्नी के सिर पर टॉर्च से वार कर दिया. हमले में महिला की मौत हो गई. जुर्म छुपाने के लिए दोषी ने सर्जरी वाले उपकरण से शव के 6-6 इंच के 300 टुकड़े किए और उसे 22 टिफिन में पैक कर दिया.
दंपति के बच्चे अमेरिका में रहते हैं. 22 जून, 2013 को परीदा की बेटी ने अपनी मां से बात करने के लिए उसे फोन किया. लेकिन कई बार फोन करने के बावजूद उसकी मां से बात नहीं हो पाई. शक होने पर लड़की ने अपने ननिहाल वालों से इस बारे में बात की. इसके बाद उषाश्री का भाई और उसके परिवार के अन्य लोग भुवनेश्वर स्थित परीदा के घर पहुंचे.
रिश्तेदारों को देखकर परीदा ने दरवाजा भीतर से बंद कर दिया. काफी कहने के बाद भी उसने दरवाजा नहीं खोला. इसके बाद रिश्तेदारों ने खिड़की से झांकने की कोशिश की तो उन्हें घर के भीतर से बदबू आई. रिश्तेदारों ने पुलिस को इसकी जानकारी दी और परीदा को गिरफ्तार कर लिया गया. घर की तलाशी के दौरान एक बक्से में से टिफिन से उसकी पत्नी के शव के टुकड़े बरामद हुए. 
भयावह घटना को अंजाम देने के बावजूद भी परीदा के शांत स्वभाव को देखकर पुलिस भी हैरान थी. सुनवाई के दौरान वह बार-बार यही कहता रहा कि उसकी पत्नी ने आत्महत्या की है. उसने उसके शव को इसलिए संभालकर रखा था ताकि उसे शिरडी ले जाकर अंतिम संस्कार कर सके. चार्जशीट दाखिल होने के बाद से आज तक कर्नल भुबनेश्वर के झारपड़ा जेल में बंद था. 

Tuesday, December 10, 2019

12/10/2019 09:02:00 AM

भीड़ में दिखा 18 साल पुराना दोस्त तो प्रोटोकॉल भूले राष्ट्रपति कोविंद, मंत्री को भेजकर दोस्त को मंच पर बुलवाया, साथ बिठाया

ओडिशा। दुनिया में दोस्ती एक मात्र ऐसा रिश्ता होता है जिसमें पद, कद और पैसा कोई मायने नहीं रखता और दोस्त एक दूसरे पर जान छिड़कते हैं. ऐसा ही एक नजारा सोमवार को उस वक्त देखने को मिला जब एक कार्यक्रम के दौरान देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भीड़ में अपने 12 साल पुराने दोस्त को पहचान लिया और झट से अधिकारियों को आदेश देकर उन्हें अपने पास बुलवाया और मंच पर पास की कुर्सी पर बिठा लिया.
दरअसल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में उत्कल विश्वविद्यालय के प्लैटिनम जयंती समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे थे. जहां उन्हें लोगों के बीच अपने मित्र और ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सदस्य बीरभद्र सिंह दिख गए.
दरअसल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में उत्कल विश्वविद्यालय के प्लैटिनम जयंती समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे थे. जहां उन्हें लोगों के बीच अपने मित्र और ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सदस्य बीरभद्र सिंह दिख गए.
राष्ट्रपति होते हुए भी जमीन से जुड़े होने के लिए चर्चित रामनाथ कोविंद अपने मित्र को देखते ही प्रोटोकॉल भूल गए. कोविंद ने सफेद पगड़ी को देखकर दर्शकों के बीच बैठे बीरभद्र सिंह को पहचान लिया और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से कहा कि वह कार्यक्रम समाप्त होने के बाद तुरंत उन्हें मंच पर बुलाएं. प्रधान ने भी ऐसा ही किया जिसके बाद दोनों दोस्तों आपस में मिलकर बेहद खुश नजर आ रहे थे. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाई.वहीं दूसरी तरफ बीरभद्र सिंह भीड़ के बीच भी राष्ट्रपति के इशारे पर चकित हो गए थे. अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वह 12 वर्षों के बाद राष्ट्रपति से मिले. उन्हें कोविंद के साथ काम करने का अवसर उस वक्त मिला था जब वह 2000 और 2006 के बीच राज्यसभा के सदस्य थे. उन्होंने कहा 'हम दोनों उस अवधि में एसटी/एससी समिति के सदस्य थे और हमने कम से कम दो साल तक एक साथ काम किया था.
वहीं दूसरी तरफ बीरभद्र सिंह भीड़ के बीच भी राष्ट्रपति के इशारे पर चकित हो गए थे. अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वह 12 वर्षों के बाद राष्ट्रपति से मिले. उन्हें कोविंद के साथ काम करने का अवसर उस वक्त मिला था जब वह 2000 और 2006 के बीच राज्यसभा के सदस्य थे. उन्होंने कहा 'हम दोनों उस अवधि में एसटी/एससी समिति के सदस्य थे और हमने कम से कम दो साल तक एक साथ काम किया था.
बीरभद्र सिंह ने यह भी बताया कि उन्हें राष्ट्रपति को कार्यक्रम में गुलाब भेंट करने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण ऐसा करने की अनुमति नहीं मिली. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने उन्हें राष्ट्रपति भवन आने के लिए आमंत्रित किया है.

Friday, November 15, 2019

11/15/2019 06:17:00 PM

दावा:- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की हत्या नही बल्कि दुर्घटना में हुई थी मौत, छिड़ा विवाद CM मांगे माफी

भुवनेश्‍वर. ओडिशा में एक सरकारी पुस्तिका में महात्‍मा गांधी जी की मौत से जुड़े एक दावे के बाद विवाद छिड़ गया है. इसमें दावा किया गया है कि महात्मा गांधी की मृत्यु 'दुर्घटना' के चलते हुई थी. राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से माफी मांगने और इस 'बड़ी भूल' को तत्काल सुधारने को कहा है.
दिया गया जांच का आदेश:-
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर प्रकाशित दो पेज की पुस्तिका ‘आमा बापूजी: एका झलक’ में उनकी शिक्षाओं, उनके कार्यों और ओडिशा से उनके जुड़ाव की संक्षिप्त जानकारी दी गई है. इसमें दावा किया गया है कि गांधी जी का 'दिल्ली के बिड़ला हाउस में 30 जनवरी, 1948 को अचानक हुए घटनाक्रम में दुर्घटना के चलते निधन हो गया.'
पुस्तिका पर मचे बवाल के बीच पटनायक नीत सरकार ने यह पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया है कि स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने ऐसी जानकारी प्रकाशित क्यों की. इस पुस्तिका को राज्य सरकार के स्कूलों और राज्य सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों में वितरित करने के लिए प्रकाशित किया गया था.
सीएम पटनायक पर कांग्रेस का निशाना:-
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नरसिंह मिश्रा ने कहा कि सरकार के प्रमुख होने के नाते मुख्यमंत्री को पुस्तिका में प्रकाशित गलत सूचना के लिए माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने इस गलती को 'अक्षम्य कृत्य' बताया. कांग्रेस विधायक दल के नेता ने कहा, 'पटनायक को इस बड़ी भूल की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, माफी मांगनी चाहिए और पुस्तिका तत्काल वापस लेने के लिए निर्देश जारी करने चाहिए.'
मिश्रा ने बीजद सरकार पर गांधी जी से नफरत करने वालों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि महात्मा गांधी की हत्या किसने की और उनकी हत्या किन परिस्थितियों में की गई. उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपिता से नफरत करने वालों को खुश करने के लिए उनके निधन की जानकारी इस प्रकार दी गई.'
'बच्‍चों को सच बताया जाना चाहिए:- 
भाकपा के राज्य सचिव आशीष कानूनगो ने भी आरोप लगाया कि यह कदम इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने और सच को छुपाने के लिए राज्य के रचे षड्यंत्र का हिस्सा है. कानूनगो ने कहा, 'हर कोई जानता है कि नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की हत्या की, जिसके बाद उसे पकड़ा गया, उसके खिलाफ मुकदमा चलाया गया और मौत की सजा सुनाई गई. बच्चों को सच बताया जाना चाहिए और पुस्तिका को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए.
बच्‍चों को गुमराह करने की कोशिश:-
माकपा नेता जनार्दन पति ने भी कहा कि सरकार ने बच्चों को गुमराह करने की यह 'कोशिश जानबूझकर' की है. उन्होंने कहा, 'चालाकी से असत्य बताया गया है. मुख्यमंत्री को इस बड़ी भूल के लिए माफी मांगनी चाहिए.'
जाने माने शिक्षाविद प्रोफेसर मनोरंजन मोहंती ने सरकारी प्रकाशन में गलत तथ्य पेश करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की. सामाजिक कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतारा ने दावा किया कि 'गोडसे से सहानुभूति रखने वालों ने लेखक एवं प्रकाशक को प्रभावित किया होगा'. उन्होंने सही जानकारी प्रकाशित कर संशोधित पुस्तिका छात्रों में पुन: वितरित करने पर जोर दिया. सूत्रों ने बताया कि सरकार ने स्कूलों से पुस्तिका वापस लेने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है.