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Sunday, May 17, 2020

5/17/2020 05:19:00 AM

देश के 254 गांवों में पीढ़ियों से लॉकडाउन जैसे हालात, जानें क्या है इसकी वजह

कोलकाता। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लागू किया गया है। इस कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार लोगों को लगातार परामर्श दे रही है कि बिना जरूरी कार्यों के वह घरों से बाहर न निकलें।
हालांकि, एक जगह ऐसी भी है जहां वर्षों से लॉकडाउन जैसे हालात हैं। भारत-बांग्लादेश सीमा पर बसे कई गांव पीढ़ियों से लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों में रह रहे हैं। दरअसल, सीमा पर स्थित ये गांव नो मैंस लैंड पर है और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी कंटीले तारों की बाड़ के दूसरी ओर। 
यहां के लोगों को पहले तय समय पर ही बाड़ के जरिए आवाजाही की अनुमति थी, लेकिन अब कोविड-19 की वजह से उनके बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगाई गई है। आपातकाल की स्थिति में ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लोग इन्हें आने-जाने की अनुमति देते हैं।
दरअसल, यह देश के विभाजन के समय सीमा बंटवारे की वजह से हुआ है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमा पर बस ऐसे 254 गांवों के लगभग 70 हजार लोग साल भर लॉकडाउन जैसे हालात में अपना जीवन गुजार रहे हैं।  
देश के विभाजन के समय रेडक्लिफ आयोग को सीमा तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन इस आयोग के प्रमुख सर रेडक्लिफ पहले न तो कभी भारत आए थे, न ही उनको यहां के बारे में कुछ पता था। ऐसे में उन्होंने जिस अजीबोगरीब तरीके से सीमाओं का बंटवारा किया, उसका खामियाजा आज तक लोगों को भरना पड़ रहा है। 
खासकर पश्चिम बंगाल और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तो सैकड़ों गांव ऐसे हैं जिनका आधा हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान में चला गया और बाकी आधा भारत में रह गया। यहीं तक रहता तो भी गनीमत थी। सीमावर्ती इलाकों के गांवों में तो कई घर ऐसे हैं जिनका एक कमरा अगर भारत में है, तो दूसरा बांग्लादेश में।
10 जिलों में फैली है सीमा:-
भारत से लगी बांग्लादेश की 4,096 किमी. लंबी सीमा में से 2,216 किमी. अकेले बंगाल के उत्तर से दक्षिण तक फैले दस जिलों से लगी है। सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाए जाने के बाद कोई 254 गांवों के 70 हजार लोग बाड़ के दूसरी ओर ही रह गए। बाड़ में लगे गेट भी उनके लिए निश्चित समय के लिए ही खुलते हैं। ऐसे में सात दशकों से हजारों लोग लॉकडाउन जैसी हालत में जिंदगी गुजार रहे हैं।

Tuesday, March 3, 2020

3/03/2020 07:04:00 AM

कहीं आप चीन से लाया गया जहरीला लहसुन तो नहीं खा रहे हैं? ऐसे करें पहचान

कोलकाता। कहीं आप चीन से इंपोर्टेड लहसुन तो नहीं खा रहे हैं? वाणिज्य मंत्रालय ने पांच साल पहले चीन से लहसुन की खरीद बिक्री पर रोक लगाई थी लेकिन कोलकाता में हाल ही में चीनी लहसुन पाया गया है.  जानकारों का कहना है कि चीन से आने वाले लहसुन के ऊपरी भाग देखने से तो सफेद है लेकिन उसके अंदर के बीज गुलाबी या थोड़े काले रंग की होते हैं. साथ ही इनका आकर बड़ा होता है.
फिलहाल, चीन में कोरोना वायरस से हुई हजारों मौत से लोगों के अंदर डर फैला हुआ है. अगर चीनी लहसुन के बात करें तो इसे क्लोरीन से ब्लीच किया जाता है ताकि ये देखने में ऊपर से एकदम सफेद दिखे. इसमें कीड़ा मारने वाली औषधि उपयोग किया जाता है. जानकारों ने ये भी बताया कि चीनी लहसुन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और कासीनजन (carcinogenic) और  जहरीला (toxic ) होता है. लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने पर स्वास्थ्य रोग होने की संभावना है.
पश्चिम बंगाल  टास्क फोर्स के सदसय कमल दे ने बताया कि जब से चीनी लहसुन की खरीद बिक्री बंद किया गया तबसे एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट और टास्क फोर्स की टीम सभी मंडियों और दुकानों में जाकर जांच करते हैं  ताकि ये आम जनता तक न पहुंचे. उन्होंने ये भी कहा कि ये लहसुन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, आम लोगों तक ये सुचना पहुंचाने के लिए मीडिया और अख़बार के जरिये लोग को आगाह किया जा रहा है.
जाधवपुर यूनिवर्सिटी फूड टेक्नोलॉजी एंड बायो केमिकल डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉक्टर प्रशांत कुमार विस्वास की मानें तो लहसुन एक औसधि के रूप में काम करता है. इसमें भरपूर एल्लीसिन होती है. ये ब्लड प्रेशर रोकने में काम आता है, लेकिन चीनी से आने वाले लहसुन लंबे समय तक स्टोर करने पर उसमें एल्लीसिन नहीं रहता है. इसमें फंगस जल्दी लगता है. कई बार ये भी देखा गया है कि इसको ताजा बनाए रखने के लिए भारी मात्रा में कासीनजन (carcinogenic) इस्तेमाल किया जाता है.
कोलकाता के कई मंडियों में इस लहसुन के बेचे जाने की खबर है. भारत देश लहसुन उत्पादन में नंबर 2 पर है इसलिए हमें आयात करने के कोई जरूरत नहीं है. काले बाजार के जरिये बांग्लादेश और म्यांमार से बंगाल में लाया गया है और लगभग 400 बोरी कस्टम डिपार्टमेंट ने पकड़ा गया है.

Friday, February 21, 2020

2/21/2020 07:10:00 AM

पांच साल तक शादी का झांसा देकर किया 'रेप', फिर छोटी बहन से कर ली शादी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के दमदम रोड इलाके में रहने वाली एक 20 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि एक युवक ने शादी का वादा करके उसके साथ पांच साल तक बलात्कार किया। महिला का आरोप है कि युवक ने इस साल की शुरुआत में उसके साथ सभी संबंध तोड़ दिए और पिछले रविवार को उसकी बहन से शादी कर ली। सिंथी पुलिस ने मामले में बलात्कार और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की है। एफआईआर में आरोपी की मां का नाम शामिल किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि उसे आरोपी की मां ने भी धमकी दी थी।
एफआईआर के मुताबिक, 'पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2015 और 2020 की शुरुआत के बीच आरोपी ने शिकायतकर्ता से दोस्ती की। दोनों के करीब आने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसे अपने घर पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाया। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी आरोपी ने युवती को शादी करना का झूठा भरोसा दिलाकर शारीरिक संबंध बनाए। शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ कई बार मारपीट भी की।'
एफआईआर में कहा गया है कि जब पीड़िता ने आरोपी से शादी करने के लिए कहा तो उसने और उसकी मां ने उसके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद आरोपी ने पीड़िता के साथ सभी संबंध खत्म कर दिए और उसकी बहन से पिछले रविवार को शादी कर ली। पुलिस ने कहा कि उन्होंने आरोपियों को जांच के लिए बुलाया गया है।एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'हम मामले की विस्तार से जांच करेंगे और दोनों ओर के परिवार के लोगों के बयान दर्ज करेंगे। पीड़िता की बहन का बयान भी महत्वपूर्ण होगा।

(डिस्क्लेमर: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक इस खबर में पीड़िता की निजता का सम्मान करते हुए उनकी पहचान उजागर नहीं की गई है।)

Thursday, February 20, 2020

2/20/2020 10:12:00 AM

इस महीने खुलेगा दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर, एक लाख वर्ग फीट में बना, 10 हजार लोग एक फ्लोर में बैठ सकेंगे

कोलकाता। दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर इस महीने खुलने वाला है। मंदिर की पहली मंजिल में फिनिशिंग का काम अपने अंतिम चरण में है। वैदिक तारामंडल वाले इस मंदिर का निर्माण एक लाख वर्ग फीट किया गया है, जो पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के मायापुर में स्थित है। वैदिक तारामंडल के मंदिर में दुनिया में कई चीजें पहली बार होंगी। मंदिर दुनिया भर में लाइव प्रार्थना को दिखाएगा। यह अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी वाले आधुनिक समय के किसी महल से कम नहीं है, जहां सबसे बड़ा झूमर लगाया गया है।
इस्कॉन या इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शसनेस का मुख्यालय मायापुर है। इस मंदिर की कई विशेषताएं हैं, जो इसे अद्वितीय बनाती हैं। इसका निर्माण कार्य एक दशक पहले शुरू हुआ था और संरचना के निर्माण में दो करोड़ किलो से अधिक सीमेंट का इस्तेमाल हो चुका है। इसमें हर मंजिल का एक लाख वर्ग फुट का होगा, जो इसे और भी खूबसूरत बनाता है और साथ ही मंदिर में सबसे बड़ी गुंबद बनी है।
वैदिक ज्ञान पर आधारित एक वैज्ञानिक और आधिकारिक प्रस्तुति के माध्यम से दुनिया भर में वैदिक संस्कृति और ज्ञान का प्रसार करने के इरादे से इस मंदिर को बनाया गया है। 380 फीट ऊंचे मंदिर में विशेष ब्लू बोलिवियन संगमरमर का उपयोग किया गया है, जो मंदिर में पश्चिमी वास्तुकला के प्रभाव दिखाता है।
वैदिक तारामंडल मंदिर के प्रबंध निदेशक, सदबुझा दास ने कहा कि यह मंदिर पूर्व और पश्चिम का मिश्रण है। संगमरमर वियतनाम से आयात किया गया है। हमने भारत से भी संगमरमर खरीदा है। मंदिर अद्वितीय है क्योंकि इसमें पुजारी मंजिल 2.5 एकड़ में फैली है और मंदिर का फर्श 60 मीटर व्यास का है। देवताओं का घर भी अनोखा है। हम 20 मीटर लंबी वैदिक झूमर (vedic chandeliers) का निर्माण कर रहे हैं।
मंदिर इतना विशाल है कि इसकी एक मंजिल में एक बार में 10,000 से अधिक श्रद्धालु बैठ सकते हैं, भगवान कृष्ण के सामने प्रार्थना कर सकते हैं, गा सकते हैं और नृत्य भी कर सकते हैं। मंदिर में संचार प्रमुख सुब्रतो दास ने कहा कि हमारे संस्थापक आचार्य प्रभुपाद कुछ ऐसा निर्माण करना चाहते थे, जो पूरे विश्व को मायापुर की ओर आकर्षित करे। मायापुर चैतन्य महाप्रभु की जन्मस्थली रहा था।
वे चाहते थे कि सभी लोग आएं। मंदिर के दरवाजे सभी समुदायों, सभी जातीय पृष्ठभूमि, सभी धार्मिक पृष्ठभूमि के लिए खुले रहेंगे। लोग यहां आ सकते हैं, जाप कर सकते हैं, प्रभु के सामने नृत्य कर सकते हैं और "संत कीर्तन आंदोलन" का हिस्सा बन सकते हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मायापुर में हर साल लगभग 70 लाख लोग आते हैं। हाल ही में सीएम ममता बनर्जी ने मायापुर को हेरिटेज सिटी घोषित किया था।

Sunday, February 16, 2020

2/16/2020 06:00:00 AM

वैलेंटाइन डे पर IAS अधिकारी ने अपनी IPS प्रेमिका से की सादगीपूर्ण शादी

पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में तैनात एक आईएएस अधिकारी ने अपनी आईपीएस प्रेमिका से वैलेंटाइन डे पर शादी कर ली। दोनों ने वैलेंटाइन डे को यादगार बनाने के लिए इस दिन को चुना था। भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी ने शुक्रवार को एक भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी से शादी की। बंगाल कैडर के 2015 बैच के आईएएस तुषार सिंगला ने बिहार कैडर के 2018 बैच की आईपीएस नवजोत सिम्मी से शादी की। दोनों ही पंजाब के रहने वाले हैं। बता दें कि अभी नवजोत सिम्मी पटना में एसीपी के पद पर तैनात हैं। दोनों ने मैरिज रजिस्ट्री के जरिए शादी की और फिर इसके बाद नवविवाहित मंदिर गए और पूजा-अर्चना की। दोनों की शादी बहुत ही सादगी से हुई। शादी के मौके पर सिम्मी ने लाल साड़ी पहनी तो वहीं तुषार कोट पेंट पहने हुए हैंडसम नजर आए। दोनों की मुलाकात पंजाब में हुई थी। तभी से वो एक दूसरे को जानते थे। लेकिन दोनों की शादी को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। दोनों ने डीएम ऑफिस में मैरिज रजिस्ट्री की सभी प्रक्रिया को पूरा किया। 

Thursday, November 14, 2019

11/14/2019 06:05:00 PM

45 वर्षीय विधवा मां के लिए आत्मनिर्भर योग्य वर खोजता बेटा, फेसबुक पर हो रहा ट्रोल

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में फ्रेंच कॉलोनी रहा चंदननगर अक्सर जगद्धात्री पूजा और बिजली के कारीगरों की वजह से सुर्खियों में रहता है। लेकिन इस बार वो इलाके के एक युवक गौरव अधिकारी के फेसबुक पर लिखे इस पोस्ट के कारण सुर्खियों में है। इसी महीने आस्था नामक एक युवती ने भी अपनी मां के लिए 50 साल के एक सुंदर व्यक्ति की तलाश में एक ट्वीट किया था। वो ट्वीट काफी वायरल हुआ था।
आस्था ने कहा था कि वह अपनी मां के लिए जो आदमी तलाश रही हैं उसे जीवन में काफी स्थापित और शाकाहारी होना चाहिए। इसके अलावा वो शराब नहीं पीता हो। पांच साल पहले गौरव के पिता का निधन हो गया था। उसके बाद उनकी 45 वर्षीया मां घर में अकेले ही रहती हैं। 
लेकिन आखिर उन्होंने फ़ेसबुक पर ऐसी पोस्ट क्यों लिखी...?
गौरव बताते हैं, "मेरे पिता कुल्टी में नौकरी करते थे। वर्ष 2014 में उनके निधन के बाद मां अकेले पड़ गई हैं। मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं। मैं सुबह सात बजे ही नौकरी पर निकल जाता हूं और लौटने में रात हो जाती है। पूरे दिन मां अकेले ही रहती हैं। मुझे महसूस हुआ कि हर आदमी को साथी या मित्र की जरूरत है।"क्या आपने इस पोस्ट को लिखने से पहले अपनी मां से बात की थी?
गौरव ने बताया, "मैंने मां से बात की थी। मां मेरे बारे में सोच रही हैं। लेकिन मुझे भी उनके बारे में सोचना है। एक संतान के तौर पर मैं चाहता हूं कि मां के जीवन के बाकी दिन बेहतर तरीके से गुजरें।
क्या लिखा था गौरव ने...?
गौरव ने आखिर अपने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा है? उन्होंने लिखा है, "मेरी मां डोला अधिकारी हैं। मेरे पिता का निधन पांच साल पहले हो गया था। नौकरी की वजह से मैं अधिकतर घर से बाहर रहता हूं। इससे मां अकेली पड़ जाती हैं। मेरी मां को किताबें पढ़ना और गाने सुनना पसंद हैं। लेकिन मैं अपनी मां के लिए एक साथी चाहता हूं।
मुझे लगता है कि पुस्तकें और गीत कभी किसी साथी की जगह नहीं ले सकते। एकाकी जीवन गुजारने की बजाय बेहतर तरीके से जीना ज़रूरी है। मैं आने वाले दिनों में और व्यस्त हो जाऊंगा। शादी होगी, घर-परिवार होगा। लेकिन मेरी मां? हमलोगों को रुपये-पैसे, जमीन या संपत्ति का कोई लालच नहीं हैं। लेकिन भावी वर को आत्मनिर्भर होना होगा। उसे मेरी मां को ठीक से रखना होगा।
मां की खुशी में ही मेरी खुशी है। इसके लिए हो सकता है कि कई लोग मेरी खिल्ली उड़ाएं या किसी को लग सकता है कि मेरा दिमाग खराब हो गया है। ऐसे लोग मुझ पर हंस सकते हैं। लेकिन उससे मेरा फैसला नहीं बदलेगा। मैं अपनी मां को एक नया जीवन देना चाहता हूं। चाहता हूं कि उनको एक नया साथी और मित्र मिले।
उनकी इस पोस्ट पर कैसी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं...?
गौरव बताते हैं, "इस पोस्ट के बाद कई लोगों ने फोन कर विवाह की इच्छा जताई है। इनमें डाक्टर और मैरीन इंजीनियर से लेकर शिक्षक तक शामिल हैं। उनमें से किसी योग्य पात्र को तलाश कर मां का दूसरा विवाह कराना ही फिलहाल मेरा प्रमुख लक्ष्य है।"
लेकिन क्या समाज के लोग इस पोस्ट के लिए आपका मजाक नहीं उड़ा रहे हैं...?
गौरव का कहना है कि "पीठ पीछे तो लोग लाख तरह की बातें करते हैं। लेकिन अब तक सामने किसी ने कुछ नहीं कहा है। वह कहते हैं, मैंने महज प्रचार पाने के लिए यह पोस्ट नहीं लिखी है। बहुत से युवक-युवतियां मेरी तरह अपने मां-बाप के बारे में जरूर सोचते होंगे। लेकिन समाज के डर से वह लोग आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।
गौरव को उम्मीद है कि उनकी इस पहल से ऐसे दूसरे लोग भी आगे आएंगे। गौरव जिस बऊबाजार इलाके में रहते हैं उसी मोहल्ले के शुभमय दत्त कहते हैं, "ये एक अच्छी पहल है। कई लोग कम उम्र में ही पति या पत्नी के निधन से अकेले पड़ जाते हैं। रोजी-रोटी की व्यस्तता की वजह से संतान भी उनका वैसा ध्यान नहीं रख पाती। ऐसे में जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत का विचार बुरा नहीं है।
एक सामाजिक संगठन मानविक वेलफेयर सोसायटी के सदस्य सोमेन भट्टाचार्य कहते हैं, "ये पहल सराहनीय है। लोग तो कुछ न कुछ कहेंगे ही। लेकिन अपनी मां के भविष्य के बारे में एक पुत्र की यह चिंता समाज की बदलती मानसिकता का संकेत है।"नई नहीं परंपरा
पश्चिम बंगाल में विधवा विवाह की परंपरा नई नहीं:- हैं। विधावाओं के पुनिर्विवाह के लिए समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने सबसे पहले आवाज उठाई थी। इस साल उनकी दो सौवीं जयंती मनाई जा रही है। उनके प्रयासों की वजह से ही 16 जुलाई, 1856 को देश में विधवा विवाह को कानूनी तौर पर मान्यता मिली थी।
खुद विद्यासागर ने अपने पुत्र का विवाह भी एक विधवा से ही किया था। इस अधिनियम से पहले तक हिंदू समाज में ऊंची जाति की विधवा महिलाओं को दोबारा शादी की इजाजत नहीं थी। अपने इस प्रयास के दौरान विद्यासागर को काफी सामाजिक विरोध झेलना पड़ा था। कट्टरपंथियों ने उनको जान से मारने तक की धमकियां दी थीं। लेकिन वह पीछे नहीं हटे। आखिर में उनका प्रयास रंग लाया।
लेकिन विडंबना यह है कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रयासों से विधवा विवाह को कानूनी मान्यता मिलने के बावजूद पश्चिम बंगाल में विधवाओं के पुनर्विवाह की परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो गई। बनारस से वृंदावन तक तमाम आश्रमों में बंगाल की विधवाओं की बढ़ती तादाद इस बात की पुष्टि करती है।
बंगाल में विधवाओं की हालत देश में सबसे बदतर:-
राष्ट्रीय महिला आयोग ने कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि सीपीएम की अगुवाई वाली सरकार के शासनकाल के दौरान बंगाल में विधवाओं की हालत देश में सबसे बदतर है। उसी दौर में राज्य की विधवाओं के बनारस और वृंदावन जाने का सिलसिला तेज हुआ।
नाटिंघम विश्वविद्यालय के स्कूल आफ इकोनामिक्स के इंद्रनील दासगुप्ता के साथ विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 की नाकामी पर शोध करने वाले कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान के दिगंत मुखर्जी कहते हैं, "ईश्वर चंद्र विद्यासागर की अगुवाई में चले सामाजिक आंदोलन के दबाव में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उक्त अधिनियम को पारित जरूर कर दिया था। लेकिन आगे चल कर समाज में इसका खास असर देखने को नहीं मिला। विधवाओं को समाज में अछूत ही माना जाता रहा।
वह कहते हैं कि एकल परिवारो के मौजूदा दौर में विधवाओं की हालत औऱ बदतर हुई है। यही वजह है कि बनारस औऱ वृंदावन के विधवाश्रमों में बंगाल की विधवाओं की तादाद साल-दर-साल बढ़ती जा रही है।

Sunday, February 10, 2019

2/10/2019 07:13:00 AM

धार्मिक समारोह में पहुचे विधायक की गोली मारकर हत्या, BJP नेता पर हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कृष्णागुंज से तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्यजीत बिश्वास की शनिवार को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. वह अपने क्षेत्र के एक सरस्वती पूजा समारोह में गए थे, उसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई. सरस्वती पूजा के कार्यक्रम में मंच से उतरने के बाद हमलावरों ने उनपर ताबड़तोड़ कई गोलियां चलाईं. टीएमसी के जिला अध्यक्ष गौरीशंकर दत्त ने बीजेपी के एक स्थानीय नेता को इसका जिम्मेदार बताया है. बीजेपी ने इस तरह के आरोपों का खंडन किया है. पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है. नदिया जिले के एसपी रुपेश कुमार ने बताया,'हमने लोगों को हिरासत में लिया है. हमने हत्‍या में इस्‍तेमाल किया गया देसी कट्टा जब्‍त किया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि उन्‍हें पीछे से गोलियां मारी गईं. यह सुनियोजित तरीके से की गई हत्‍या है.' बिश्‍वास मटुआ समुदाय से आते हैं जो कि राजनीतिक रूप से बंगाल में काफी अहम है. वे इलाके में लोकप्रिय थे और कुछ दिनों पहले ही उनकी शादी हुई थी. बीजेपी और टीएमसी दोनों की ही इस समुदाय पर नजर है. पिछले चुनावों में मटुआ समुदाय का समर्थन ममता बनर्जी के साथ रहा है. इस बार बीजेपी ने इस समुदाय में काफी जगह बनाई है. मटुआ समुदाय आजादी के समय बांग्‍लादेश से भारत आया था. नदिया जिला बांग्‍लादेश सीमा के करीब है और बीजेपी ने हाल के दिनों में यहां पर काफी पैठ बनाई है. पंचायत चुनावों में बीजेपी को काफी कामयाबी मिली थी. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय नदिया लोकसभा सीट से बीजेपी के उम्‍मीदवार सत्‍यब्रत मुखर्जी जीते थे और वे मंत्री भी बने थे. हालांकि 2014 में उन्‍हें 26 फीसदी वोट ही मिले थे. टीएमसी ने इस मामले को राजनीतिक हत्या करार दिया है. पार्टी ने इसे राजनीतिक हत्‍या बताया और दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इन आरोपों से इनकार किया है. उन्‍होंने कहा कि यह टीएमसी की आपसी गुटबाजी की लड़ाई है. उन्‍होंने मांग की है कि दोषियों को जल्‍द से जल्‍द पकड़ा जाए. उन्‍होंने सीबीआई जांच की मांग की है और कहा कि उन्‍हें पश्चिम बंगाल पुलिस पर विश्‍वास नहीं है.

Monday, February 4, 2019

2/04/2019 07:10:00 AM

बंगाल में मचा बवाल, क्या है चिटफंड और रोज वैली घोटाला खबर देखें

पश्चिम बंगाल। चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे। इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए। जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए। इसमें बोली लगाने वाले शख्स को पैसे लौटाने भी होते हैं। नियम के मुताबिक ये स्कीम किसी संस्था या फिर व्यक्ति के जरिए आपसी संबंधियों या फिर दोस्तों के बीच चलाया जा सकता है लेकिन अब चिट फंड के स्थान पर सामूहिक सार्वजनिक जमा या सामूहिक निवेश योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनका ढांचा इस तरह का होता है कि चिट फंड को सार्वजनिक जमा योजनाओं की तरह चलाया जाता है और कानून का इस्तेमाल घोटाला करने के लिए किया जाता है।
शारदा चिटफंड घोटाला-
दरअसल शारदा चिटफंड घोटाला पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला है। इसमें कई बड़े नेताओं के नाम जुड़े हैं। इस घोटाले में करीब 40 हजार करोड़ की हेर-फेर हुई थी। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिए थे कि इस मामले की जांच करे। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस जांच में सहयोग करने का आदेश दिया था।
रोज वैली घोटाला-
शारदा चिटफंड की तरह ही रोज वैली घोटाले पर भी काफी वक्त से हड़कंप मचा हुआ है। इसमें कई बड़े नेताओं का नाम भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है। दरअसल, रोज वैली चिटफंड घोटाले में रोज वैली ग्रुप ने लोगों 2 अलग-अलग स्कीम का लालच दिया और करीब 1 लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया था। इसमें आशीर्वाद और होलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर ग्रुप ने लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया। ग्रुप एमडी शिवमय दत्ता इस घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जाते हैं। जिसके बाद लोगों ने भी इनकी बातों में आकर इसमें निवेश कर दिया। 
2/04/2019 07:04:00 AM

पश्चिम बंगाल में ​ममता बनर्जी पर आक्रामक क्यों हुए नरेंद्र मोदी

पश्चिम बंगाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर काफी हमलावर मूड में नज़र आए. अपनी दोनों रैलियों में दीदी और उनकी सरकार पर बरसते हुए मोदी ने दावा किया कि इस सरकार का जाना तय है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के "ट्रिपल टी" यानी तृणमूल तोलाबाजी टैक्स के लिए बदनाम होने का आरोप लगाने के साथ-साथ विपक्षी महागठजोड़ की ममता की कोशिशों का भी मखौल उड़ाया. प्रधानमंत्री ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक की वकालत करते हुए तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा में उसका समर्थन करने की अपील की. कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना जिले के ठाकुरनगर की सभा में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने की वजह से मोदी को अपना भाषण समय से पहले खत्म करके वहां से जाना पड़ा. वहां भगदड़ और धक्कामुक्की में कई लोग घायल हो गए.

Tuesday, January 29, 2019

1/29/2019 08:06:00 AM

शादी को बनाना था यादगार, घोड़े के बजाए रोड रोलर पर सवार हो दुल्हन के घर पहुंचा दूल्हा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक दूल्हा इस समय सुर्खियों में है। वह शादी के लिए घोड़ी या कार के बजाय रोड रोलर पर सवार होकर दुल्हन के घर जा पहुंचा। वैसे तो मामला रविवार का है, लेकिन सोमवार को इससे संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से यह खूब सुर्खियां बटोर रहा है। दूल्हे का नाम अर्क पात्रा (30) है। उन्होंने कहा कि अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया। वह स्वर्णकार के बेटे हैं और रविवार को कृष्णनगर ओकीलपाड़ा में दुल्हन के घर रोड रोलर से पहुंचे थे। यह देखकर वहां मौजूद मेहमान आश्चर्यचकित रह गए। पात्रा ने कहा कि मैं एक विंटेज कार ले सकता था, लेकिन यह कुछ अलग नहीं होता। मैंने सुना था कि शादी करने के लिए कोई अर्थ मूवर में गया था। मुझे शादी के लिए रोड रोलर से जाने वाले किसी के बारे में नहीं पता था, इसलिए मैंने रोल रोलर से जाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी अरुंधति तरफदार भी उनके अनूठे विचार से सहमत हो गई थीं। उन्होंने कुछ दिन पहले उनसे इस बारे में चर्चा की थी। खास बात यह है कि पात्रा की पत्नी ने उनके विचारों का स्वागत किया और कहा कि निश्चित तौर पर हमारी शादी को यादगार बनाए रखने में रोड रोलर से पहुंचना एक किस्सा होगा। शादी के बाद अपने रिसेप्शन समारोह को भी पात्रा ने विशेष बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि वह अपने रिसेप्शन में किसी तरह का कोई माइक नहीं बजाएंगे और ऐसी व्यवस्था करेंगे ताकि सब कुछ वायुमंडल के अनुकूल हो। उनके मुताबिक मेहमानों के बीच एक बांसुरी बजाने वाला मौजूद रहेगा जो चारों ओर घूम-घूम कर बांसुरी बजाएगा।

Tuesday, January 22, 2019

1/22/2019 07:52:00 AM

मॉडल जैसा फिगर देख प्रोफेसर ने छात्रा से पूछा- कितने बॉयफ्रेंड हैं तुम्हारे

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की जाधवपुर यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने फेसबुक पर अपने प्रोफेसर की गंदी हरकत का वर्णन किया है। छात्रा अदरिजा चटर्जी (बदला हुआ नाम) ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि एक प्रेजेंटेशन के दौरान प्रोफेसर ने उनको बीच में रोककर उनके फिगर पर टिप्पणी की थी. अदरिजा ने लिखा, “मैं एक दिन क्लास में प्रेजेंटेशन दे रही थी और तभी इस आदमी (कनक सरकार) ने मुझे बीच में रोका. मुझे लगा कि शायद वो मुझसे कोई सवाल करना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारा ‘फिगर’ एक मॉडल की तरह है तो क्या मैं बड़ी होकर मॉडल बनना चाहती हूं? इसके आगे छात्रा ने यह भी लिखा, “उन्होंने मुझसे यह भी पूछा कि क्या मेरे बहुत सारे पुरुष दोस्त हैं? क्योंकि उनके मुताबिक मैं वह हूं, जिसका ‘आनंद’ पुरुष उठाते हैं. मेरे हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने उस पल 52 छात्रों की क्लास के सामने मुझे कुछ भी नहीं समझा. मुझे समझ नहीं आता है कि आखिर हम ऐसे प्रोफेसरों को काम करने की इजाजत ही कैसे देते हैं? बता दें कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशन पढ़ाने वाले प्रोफेसर कनक सरकार वही है जिसने गत दिनों अपनी पोस्ट में कुंवारी लड़कियाों को सीलबंद बोतल या सीलबंद पैकेट बताया था. इस आशय की खबर हम आपको पहले ही दे चुके हैं.पता चला है कि, यूनिवर्सिटी ने उन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है. यूनिवर्सिटी की तरफ से कहा गया- “विभाग की स्टूडेंट-टीचर कमेटी की सिफारिश पर प्रोफेसर कनक सरकार को तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है.” मालूम हो कि राष्ट्रीय महिलालआयोग ने भी इस मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हुए सख्ती जाहिर की है.

Friday, January 11, 2019

1/11/2019 09:44:00 AM

गर्म पानी नही ठंडे पानी में आधे घंटे रखने से पकता है यह चावल- जाने कैसे

आसनसोल। (पश्चिम बंगाल)कमल चावल कमाल का है। पकाने के लिए गर्म पानी की जरूरत नहीं। ठंडे पानी में आधे घंटे रख दीजिए, पककर तैयार हो जाता है। बंगाल के वर्द्धमान, नदिया समेत कई जिलों में इस खास किस्म के चावल की खेती शुरू की गई है। सामान्य पानी में ही इसे डाल दीजिए। कुछ देर में यह भात बन जाता है। कमल धान मूलतः ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे उपजता है, माजुली द्वीप पर। पश्चिम बंगाल के कुछ किसान वहां से इस धान का बीज लेकर आए हैं। यहां खेती शुरू की तो अच्छी उपज होने लगी। इस चावल के गुणों को जानने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने इसके व्यावसायिक उत्पादन को प्रोत्साहित करने की घोषणा की है। जाहिर है, इससे किसानों में उत्साह है। नदिया में दस हेक्टेयर जमीन में खेती हुई है। सबसे अच्छी बात यह है कि कमल धान के उत्पादन में सिर्फ जैविक खाद का उपयोग किया जाता है। प्रति हेक्टेयर इसका उत्पादन 3.4 से 3.6 टन तक होता है। कमल धान की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि इस चावल को ठंडे पानी में रख दें। आधा घंटा में यह खुद पक जाएगा। पानी से इसे निकालकर आप सामान्य पके हुए चावल की तरह इसे खा सकते हैं। राज्य के कृषि मंत्री आशीष बनर्जी वर्द्धमान ने कहा है कि प. बंगाल सरकार इसके व्यवसायिक उत्पादन पर जोर दे रही है। नदिया जिले में कमल धान की खेती को प्रोत्साहित कर रहे सहायक कृषि निदेशक अनुपम पाल ने बताया कि नदिया में दस हेक्टेयर में प्रयोग के तौर पर इसकी खेती की गई है। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। धान से चावल निकालना भी काफी सरल है। धान को उबालकर धूप में सुखा लें। फिर कूटकर चावल अलग कर लें। लिहाजा, किसानों के लिए यह हर तरह से फायदे का सौदा साबित हो रहा है। कमल धान की खेती करने वाले कई किसानों ने बताया कि इस चावल का प्रयोग सैकड़ों वर्ष पहले सैनिक किया करते थे। क्योंकि युद्ध के दौरान सैनिक खाना पकाने की दुश्र्वारी नहीं चाहते थे। वे कहीं से भी प्याज-मिर्च व नमक की व्यवस्था कर इस चावल का भोजन कर लेते थे। सहायक निदेशक अनुपम पाल कहते हैं कि कमल चावल काफी पौष्टिक है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, पेप्टिन समेत कई पौष्टिक तत्व मिलते हैं। यह चावल सामान्य से थोड़ा मोटा होता जबकि इसका पौधा पांच फीट तक ऊंचा होता है। कमल धान की खेती करने वाले वीरभूम के लावपुर के किसान अतुल गोराई ने कहा कि दो वर्ष से कमल धान की खेती कर रहे हैं। अगले वर्ष से इसकी ज्यादा खेती करेंगे।पश्चिम मेदिनीपुर के मोहनपुर प्रखंड के गोमुंडा गांव के किसान निताई दास ने कहा कि कमल चावल ठंडे पानी में पक जाता है। इसकी कीमत करीब 60 से 80 रुपये किलो तक है। अपने घर की जरूरत के मुताबिक इसकी खेती करते हैं। किसान गोकुलचंद महापात्रा ने बताया कि थोड़ा मोटा चावल है। लेकिन सब्जी, गुड़ के साथ खाने में खूब स्वाद आता है। अभी अपने घर में खाने के लिए इसकी खेती कर रहे हैं।