तीर्थ स्थल ओरछा को प्रस्तावित निवाडी जिला में जोडने पर विवाद शुरू
ओरछा (मप्र)। भले ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने चुनावी वायदे की पूर्ति के जिला टीकमगढ की निवाड़ी तहसील को मध्य प्रदेश का 52 वां जिला बनाने जा रहे हैं, किन्तु इससे एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है। इस विवाद के पीछे है तीर्थस्थल रामराजा सरकार की रियासत ओरछा। राम की नगरी ओरछा को टीकमगढ़ राजवंश की आस्था और त्याग की निशानी के तौर पर माना जाता है, नया जिला बनने से तीर्थ स्थल ओरछा जिला टीकमगढ़ से छिन जाएगा और राजवंश के साथ तीर्थ स्थली के वाशिंदों की आस्था पर चोट लगेगी। लोगों को आशंका है कि टीकमगढ से भगवान रामराजा सरकार की नगरी ओरछा को अलग करने की गाज चुनावी समर में कहीं शिवराज सिंह पर न गिर जाए।
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने निवाडी तहसील को मध्य प्रदेश का 52 वां जिला बनाने का वायदा किया था। चुनाव जीतने के बाद निबाडी को जिला बनाने की तैयारी कागजों में चलती आ रही है। अब सरकार ने निवाड़ी को नया जिला बनाने को लेकर दावे-आपत्तियां बुलाई हैं। इसके बाद सम्बन्धित समस्त कार्यवाही के बाद ही नए जिले की घोषणा की जाएगी। निवाड़ी को 52 वां जिला बनाने से पहले दावे-आपत्ति बुलाने के लिए सरकार ने एक अधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी किया है। बताया जा रहा है कि निवाड़ी, पृथ्वीपुर और ओरछा ब्लॉक के साथ ही मोहनगढ़ तहसील को मिलाकर निवाड़ी को नया जिला बनाया जाएगा। इसके साथ ही बुंदेलखंड में एक और जिले का इजाफा हो जाएगा। फिलहाल टीकमगढ़ में इस नए जिले के गठन के चलते विरोध भी शुरु हो गया है। इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा चुनावी घोषणा को पूरा कर स्थानीय लोगों की नाराजगी दूर करने के लिए जिले का ऐलान किया है।
भाजपाईयों ने प्रस्तावित नए जिले स्वागत करते हुए कहा कि सरकार अपनी सुविधा औऱ प्रशासनिक नजरिए से बेहतर काम करने के लिए नई तहसीलों और जिलों का निर्माण करती है और अगर नए जिले बनते हैं तो विकास कार्यों में आसानी होती है। वहीं कांग्रेस ओरछा को टीकमगढ से अलग करने को मुददा बना कर चुनावी समर में जन सहानुभूति बटोरने की रणनीति बना रही है। देखना यह है कि ओरछा को अलग करने पर शिवराज सिंह पर रामराजा सरकार की कृपा बरसती या गाज गिरती है।

