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Tuesday, March 3, 2020

मध्यप्रदेश में 'कर्नाटक चैप्टर' की आहट से डरी कांग्रेस! समझिए एमपी में सरकार बनाने का पूरा फार्मूला

भोपाल। बीजेपी प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को लेकर पिछले एक महीने से बिल्कुल मौन है। न कोई बयानबाजी की जारी है और न ही कोई दावे हैं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को मध्यप्रदेश में 'कर्नाटक चैप्टर'शुरू होने की जानकारी मिली है। मध्यप्रदेश से बाहर दिल्ली में उन्होंने यह खुलासा कर मध्यप्रदेश की राजनीति में सनसनी फैला दी है। बीजेपी ने भी दिग्विजय सिंह के दावों पर जवाब दिया है।
लेकिन अचानक से मध्यप्रदेश की राजनीति में 'कर्नाटक चैप्टर' की आहट कैसे सुनाई देने लगी। उन्हें कैसे जानकारी मिली कि उनके विधायक उस चैप्टर के हिस्सा बनने जा रहे हैं। इसके लिए उन्हें करोड़ों रुपये के ऑफर मिल रहे हैं। अगर मिल रहे हैं तो कांग्रेस के वो विधायक सामने क्यों नहीं आए। दिग्विजय सिंह ने उन सबूतों को दिखाए क्यों नहीं है।
आरोप शिवराज पर:-
दिग्विजय सिंह ने सीधा आरोप पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्रा पर लगाया है। दोनों की गिनती प्रदेश में बीजेपी के कद्दावर नेताओं में होती है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि यहीं दोनों नेता हमारे विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ये मध्यप्रदेश है, कर्नाटक नहीं। हमारे विधायक टूटने वाले नहीं हैं। इन्हें करोड़ों का ऑफर मिल रहा है।
क्या है विधानसभा का गणित:-
मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सीट हैं। वर्तमान में दो विधायकों के निधन के बाद दो सीट खाली है। अभी की स्थिति में 228 विधायक हैं यानी बहुमत के लिए किसी भी दल को 115 विधायकों की जरूरत है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 114, बीजेपी के पास 107, बीएसपी के पास 2, एसपी के पास 1 और निर्दलीय 4 विधायक हैं। बीएसपी, एसपी और निर्दलीय विधायक कांग्रेस की सरकार को समर्थन दे रहे हैं। इस गणित को देखें तो अभी कांग्रेस की सरकार पर कोई खतरा नहीं हैं।
बीजेपी को सरकार बनाने के लिए क्या करना होगा:-
दिग्विजय सिंह के आरोपों के अनुसार अगर बीजेपी सरकार बनाने की कवायद शुरू करती है तो उसे बहुमत साबित करने के लिए आठ विधायकों की जरूरत पड़ेगी। निर्दलीय, बीएसपी और एसपी को मिला भी दें तो बीजेपी उस जादुई आंकड़ें तक नहीं पहुंच रही है। ऐसे में अगर दिग्विजय के आरोपों में दम है तो बीजेपी कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने की कोशिश करेगी। लेकिन बीजेपी के नेता इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं। साथ ही दिग्विजय सिंह की सनसनी फैलाने की पुरानी आदत बता रहे हैं।
कांग्रेस डरी:-
दरअसल, दिग्विजय सिंह जब यह बात कह रहे हैं तो उनकी बातों को हल्के में भी नहीं लिया जा सकता है। क्योंकि पार्टी के कई विधायक और खेमे अभी नाराज चल रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में कलह बढ़ने की संभावना और भी है। आरोप लगाने वाले दिग्विजय सिंह खुद भी राज्यसभा की रेस में शामिल हैं। ऐसे में बीजेपी ने उन पर यह आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह पार्टी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ऐसा बयान दिया है।
कर्नाटक में टूटे थे 21 विधायक:-
विधानसभा चुनाव नतीजे के बाद कर्नाटक में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। बीजेपी को रोकने के लिए जेडीएस औऱ कांग्रेस ने वहां हाथ मिलाया था। सरकार बनने के बाद से ही प्रदेश में सियासी खींचतान जारी थी। जेडीएस और कांग्रेस में जारी कलह का फायदा वहां बीजेपी ने उठाया। दोनों दलों के 21 विधायक टूट गए। फ्लोर टेस्ट में ये लोग शामिल नहीं हुए और कुमार स्वामी की सरकार गिर गई। बाद में पाला बदलने वाले विधायकों की सदस्यता खत्म हो गई। उपचुनाव हुए और बीजेपी को जीत मिली।
भार्गव के बयान के मायने क्या हैं:-
मध्यप्रदेश में 'कर्नाटक चैप्टर' की आहट के बीच हर बयान के मायने भी निकाले जाएंगे। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने एक बयान दिया कि एमपी में हॉर्स ट्रेडिंग की संस्कृति नहीं रही है। मैं दिग्विजय सिंह के बयान की निंदा करता हूं। लेकिन अगर कोई अपनी आत्मा की आवाज पर ऐसा फैसला लेता है तो उसमें कोई क्या कर सकता है। इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि बीजेपी इसे खारिज कर रही है।
बीजेपी के लोग करते रहे हैं दावा:-
वहीं, मध्यप्रदेश में बीजेपी के बड़े-बड़े नेता यह दावा करते रहे हैं कि प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिर जाएगी। एक बार तो सदन के अंदर गोपाल भार्गव ने कहा था कि हमें ऊपर से सिग्नल मिला तो हम सरकार गिरा देंगे। उसके बाद एक विधेयक पास करवाने को लेकर फ्लोर टेस्ट हुआ और बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी। बीजेपी के ही दो विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।