भोपाल. मध्यप्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है अंदरूनी कलह की खबरें समय-समय पर आती रही हैं। मध्यप्रदेश में एक बार फिर से कांग्रेस सरकार के सामने मुश्किलें हैं। मुश्किल है राज्यसभा चुनाव की। राज्यसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस दुविधा में है कि आखिर किस नेता को राज्यसभा का टिकट दिया जाए। दावेदारों की लिस्ट में सबसे बड़ा नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया का है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुख्यमंत्री बनने की भी अटकलें थी लेकिन राहुल गांधी ने सिंधिया की जगह कमलनाथ को मध्यप्रदेश की बागडोर सौंप दी थी।
ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ हमलावर हैं। सिंधिया कांग्रेस के वचन को लेकर अपनी ही सरकार पर हमला कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच जानकारों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बार जो लाइन पकड़ी है वो लाइन सिंधिया के पक्ष में जा सकती है। सिंधिया की छवि एक ऐसे नेता के रूप में उभर रही है जो जनहित से जुड़े मुद्दों के लिए अपनी ही सरकार से लड़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन इन सबके बीच भाजपा लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में बोल रही है। जानकारों का कहना है कि यह एक सियासी चाल है जो राज्यसभा में दिखाई दे सकती है। भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया को राहुल गांधी से बड़ा नेता बता रही है।
सिंधिया की प्रतिस्पर्धा राहुल के साथ:-
भाजपा ने सिंधिया का पक्ष लेते हुए राहुल गांधी और मध्यप्रदेश की कांग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा नेता विश्वास सारंग ने कहा- यह बात साफ़ है कि कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को पूरी तरह से घर बैठाना चाहती है क्योंकि वह राहुल गांधी के प्रतिद्वंद्वी हैं। कांग्रेस के नीति निर्णायकों को लगता है कि राहुल को बड़ा नेता बनाना है तो सिंधिया जी को रोकना ही होगा। राहुल और सिंधिया हमउम्र हैं। राहुल गांधी की लाइन को बड़ा करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की लाइन को छोटा किया जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया, हर मामले में राहुल गांधी से आगे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की वाकपटुता हो या फिर जनता से जुड़ाव का मामला हो या फिर राजनैतिक सोच का।
सिंधिया हर मामले में राहुल गा से आगे:-
ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा जाने से रोकने के लिए ही कभी प्रियंका गांधी का नाम आगे किया जाता है तो कभी आदिवासी या अनुसूचित जनजाति के नेता को राज्यसभा भेजने की मांग की जा रही है। बता दें कि विश्वास सारंग, शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
राहुल-सिंधिया दोनों हारे:-
2019 के लोकसभा चुनाव में जहां राहुल गांधी को अपनी पारंपारिक सीट अमेठी से हार का सामना करना पड़ा वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी गुना-शिवपुरी संसदीय सीट से हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अभी तक के राजनैतिक जीवन में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कोई ऐसा बयान नहीं दिया जिसके कारण राजनीतिक विवाद खड़ा हो। ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता भी राहुल गांधी की ही तरह है। राहुल गांधी के भाषण शैली और ज्योतिरादित्य सिंधिया की भाषण शैली में भी फर्क है। सिंधिया आक्रमक और संतुलित बयान देते हैं।
देशहित के मुद्दों पर साथ आए:-
हाल के दिनों की घटनाओं को देखे तो ज्योतिरादित्य सिंधिया देशहित से जुड़े मुद्दों पर केन्द्र सरकार के साथ आए। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का ज्योतिरादित्य सिंधिया ने समर्थन किया। सिंधिया ने अपनी पार्टी लाइन से हटकर केन्द्र सरकार का समर्थन किया था। इसके बाद सिंधिया की लोकप्रियता भी बढ़ी थी। सिंधिया दो बार केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं और 10 सालों के कार्यकाल में ज्योतिरादित्य सिंधिया पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। जबकि यूपीए के दूसरे कार्यकाल कई घोटाले सामने आए थे।




