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Monday, May 18, 2020

5/18/2020 09:48:00 PM

बच्चों में कोरोना के नए लक्षण, मुंह, हाथ-पैर में लाल चिट्टे, बुखार व आंखों में लालपन

ग्वालियर। बच्चों में अब कोरोना महामारी के नए लक्षण दिखाई दे रहे हैं। पहली बार दिखे इन लक्षणों को डब्ल्यूएचओ ने नया नाम दिया है एमएएस सिंड्रोम(मल्टी सिस्टम इन्फला मेट्री सिड्रोंम)। इसमें बच्चों के मुंह, हाथ-पैर में लाल रंग के चिट्टे, बुखार और आंखों में लालपन आ जाता है। यदि इस तरह के लक्षण 0 से 19 साल तक के बच्चों में दिखें तो कोरोना की जांच जरूर करवाएं। हालांकि इस तरह के लक्षण अभी भारत में देखने को नहीं मिले हैं। लेकिन यह लक्षण ब्रिटेन, इटली, फ्रंास व लेटिन अमेरिका के बच्चों में देखने को मिल रहे हैं। जो तेजी से बच्चों में फैल रहा है। यह लक्षण आने का कारण तापमान, जलवायु या रोग प्रतिरोधक क्षमता है या कुछ और है, इस पर विशेषज्ञों का दल रिसर्च कर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चों में ऐसे लक्षण दिखें तो तत्काल परामर्श लेकर कोरोना की जांच करवाएं।
बच्चों में पहले भी पाए गए लक्षण, इलाज भी संभव:-
कावासाकी सिंड्रोम : शिशु व छोटे बच्चों में प्रारंभिक दौर में चकत्ते व बुखार होता है। इन लक्षणों में तेज बुखार और त्वचा का छिलना शामिल है। मध्यम आकार की रक्त वाहिकाओं में सूजन हो सकती है। यह लसीका तंत्रिकाओं, त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली जैसे की मुंह के भीतर भी प्रभाव छोड़ता है।
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम : कुछ जीवाणु संक्रमणों की दुर्लभ, प्राणघातक जटिलता। इसके कुछ लक्षण तेज बुखार, कम रक्तचाप, उल्टी-दस्त और दाने आदि हैं।
बच्चों में कोरोना का प्रतिशत कम:-
अभी तक देखने में आया है कि बच्चों में कोरोना का प्रतिशत बड़ों के मुकाबले कम रहा है। लेकिन अब यह नए तरीके के लक्षण बच्चों में देखने को मिले हैं। जब इन बच्चों की कोविड 19 की जांच की गई तो वह संक्रमित पाए गए। जिसको लेकर डब्ल्यूएचओ ने इसे नया खतरा बताया और सतर्कता रखने की हिदायत दी है।
55 मरीजों में से 4 की उम्र 19 से कम:-
शहर में शुक्रवार तक 55 मरीज कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं, लेकिन कोरोना का संक्रमण 4 लोगों में ही मिले हैं, जिनकी उम्र 19 वर्ष से कम हैं। जिसमें दो पिछोर के रहने वाले हैं, जिनकी उम्र 17 व 18 वर्ष थी तथा एक भितरवार में मिला है उसकी उम्र भी 17 वर्ष है। वहीं सूरोगांव का एक 11 वर्षीय बालक कोरोना संक्रमित पाया गया है। पर इनमें से किसी को भी कोरोना के लक्षण या अन्य किसी तरह के नहीं पाए गए।
बरतें सावधानी:-
बच्चों में कोरोना के नए लक्षण देखने को मिल रहे हैं। जिनके मुंह, हाथ-पैर में लाल चिट्टे,आंखों में लालपन पर कीचड़ नहीं होता। बुखार भी 103 डिग्री से अधिक हो जाता है। ऐसे लक्षण दिखें तो परामर्श के बाद कोरोना की जांच करवाएं। हालांकि अभी इस तरह के लक्षण यहां किसी बच्चे में नहीं देखा गया। डॉ.अजय गौर, पीडियाट्रिक जेएएच
5/18/2020 05:32:00 AM

WHO ने चेताया: बोलने में हो रही है दिक्‍कत तो यह कोरोना वायरस का गंभीर लक्षण

ज‍िनेवा। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस के एक नए लक्षण के प्रति पूरी दुनिया को आगाह किया है। डब्‍ल्‍यूएचओ के विशेषज्ञों ने कहा कि बोलने में दिक्‍कत होना कोरोना वायरस का 'गंभीर' लक्षण (Coronavirus Symptom) है। अभी तक दुनियाभर के डॉक्‍टर यह कहते थे कि कफ या बुखार रहना कोरोना वायरस के दो मुख्‍य लक्षण हैं। डब्‍ल्‍यूएचओ की यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्‍या 3 लाख को पार कर गई है।
इस महामारी से ठीक हुए लोगों का कहना है कि अन्‍य लक्षणों के साथ-साथ बोलने में दिक्‍कत का होना कोरोना वायरस से संक्रमित होने का संभावित लक्षण है। डब्‍ल्‍यूएचओ के विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्‍यक्ति को बोलने में दिक्‍कत के साथ- साथ अगर चलने में दिक्‍कत हो रही है तो उसे तत्‍काल डॉक्‍टर को द‍िखाना चाहिए।
अमेरिकी कंपनी ने खोजा कोरोना का 'इलाज'
कोरोना वायरस के ये हैं गंभीर लक्षण:-
डब्‍ल्‍यूएचओ ने कहा, 'कोरोना वायरस से प्रभावित ज्‍यादातर लोगों को सांस लेने में हल्‍की परेशानी हो सकती है और वे बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाएंगे। कोरोना वायरस के गंभीर लक्षणों में सांस लेने में दिक्‍कत और सीने में दर्द या दबाव, बोलना बंद होना या चलने फिरने में दिक्‍कत कोरोना वायरस के गंभीर लक्षण हैं।'
विशेषज्ञों ने आगाह किया कि अगर किसी को ऐसी गंभीर दिक्‍कत हो रही है तो उसे तत्‍काल डॉक्‍टर के पास जाना चाहिए। डॉक्‍टर के पास जाने से पहले हेल्‍पलाइन पर एक बार सलाह जरूर लें। उन्‍होंने कहा कि बोलने में दिक्‍कत हमेशा कोरोना वायरस का लक्षण नहीं होगा। कई बार दूसरी वजहों से भी बोलने में दिक्‍कत होती है। इसी सप्‍ताह हुए एक अन्‍य शोध में कहा गया था कि कोरोना वायरस का एक अन्‍य लक्षण मनोविकृति (Psychosis) भी है।
चीन ने माना, नष्ट किए थे कोरोना के सैंपल
मेलबर्न की ला ट्रोबे यूनिवर्सिटी ने चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस की वजह से कई मरीजों में मनोरोग बढ़ रहा है। अध्‍ययन से जुड़े डॉक्‍टर एली ब्राउन ने कहा कि कोरोना वायरस हरेक के लिए बहुत तनावपूर्ण अनुभव है। यह इंसान के आइसोलेशन में रहने के दौरान ज्‍यादा बढ़ रहा है। अध्‍ययन से जुड़े दल ने मर्स और सार्स जैसे अन्‍य वायरस का भी अध्‍ययन करके यह पता लगाने की कोशिश की कि क्‍या उनका इंसान की मानसिक स्थिति पर क्‍या असर पड़ रहा है।
कोरोना से 3 लाख से ज्‍यादा लोगों की मौत:-
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से अभी तक 46 लाख 60 हजार से ज्यादा कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से लगभग तीन लाख 10 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 9 हजार से ज्यादा हो चुका है। वहीं, 17 लाख 77 हजार से अधिक ठीक भी हुए हैं। इस वायरस से सबसे ज्यादा अमेरिका प्रभावित है, जहां 88 हजार 500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। उधर, रूस में भी हालात खराब होते जा रहे हैं। यहां कोरोना मरीजों की संख्या 2 लाख 72 हजार से ज्यादा हो चुकी है।

Friday, May 1, 2020

5/01/2020 06:50:00 PM

कोरोना जमा रहा दिल, दिमाग और फेफड़ों में रक्त का थक्का, दवा से मिलेगी राहत

नई दिल्ली। मरीज के दिल, दिमाग और फेफड़ों में संक्रमण से रक्त का थक्का बन सकता है। चीन के वुहान में मरने वाले लोगों के पोस्टमार्टम से यह खुलासा होने से भारतीय अस्पताल भी सतर्क हो चुके हैं। मरीजों को रक्त पतला करने की दवा दी जा रही है, ताकि थक्का जमने से स्ट्रोक या हार्ट अटैक से बचाया जा सके।
दिल्ली एम्स ने प्रोटोकॉल बदलते हुए रक्त पतला करने की दवाएं देने के निर्देश दिए हैं। मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद व चेन्नई जैसे महानगरों के अस्पतालों में भी यह तरीका अपनाया जा रहा है। प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेंट’ में प्रकाशित चीनी वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार, रक्त के थक्के (क्लॉट) दिखाई दिए। मौत के बाद मरीजों के फेफड़े, दिमाग और दिल में भी थक्के मिले। इटली में मृत रोगियों में भी रक्त के थक्के दिखाई दिए। 183 मरीजों पर हुए चीन के अध्ययन में सलाह दी गई है कि इन मरीजों को ब्लड क्लॉट रोकने वाली दवाएं दी जा सकती हैं। इटली के वैज्ञानिकों ने भी इसकी पुष्टि की है। न्यूयॉर्क से भी खबर थी कि संक्रमित टीवी अभिनेता निक कॉर्डेरो के दाएं पैर को खून के थक्के जमने के कारण काटना पड़ा। इन अध्ययनों के आधार पर चीन, अमेरिका, यूरोप, इटली सहित तमाम देशों में कोविड चिकित्सीय प्रोटोकॉल में बदलाव किए गए हैं। 
छह मरीजों पर प्लाज्मा ट्रायल चल रहा:-
दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में 241 कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती हैं। इनमें से 13 मरीज ऐसे हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। इनमें से छह मरीजों पर प्लाज्मा ट्रायल चल रहा है। जबकि तीन मरीज ऐसे हैं जिनमें खून के थक्के देखने को मिले हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मरीजों को रक्त पतला होने की दवा दी जा रही है। 
मुंबई में भी संक्रमित मरीजों में परेशानी दिखी:-
एम्स के एक वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ के मुताबिक, एम्स के ट्रामा और झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में मरीजों का उपचार चल रहा है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के डॉ. यतीन मेहता का कहना है कि उनके यहां मरीजों को प्रोटोकॉल के तहत ऐसी दवाएं दे रहे हैं। मुंबई स्थित सेवन हिल्स अस्पताल के डॉ. महेश का कहना है कि कुछ मरीजों में खून के थक्के जमने की परेशानी देखने को मिली है। कोविड-19 पर अभी तक के अध्ययन के आधार पर मरीजों को दवाएं देना शुरू कर दिया है। 
आईसीएमआर ने नहीं किया है बदलाव:-
आईसीएमआर की ओर से मरीजों को खून का थक्का नहीं जमने की दवा देने की अनुमति नहीं दी गई है। इनके चिकित्सा प्रोटोकॉल में बदलाव भी नहीं किए गए हैं। आईसीएमआर मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि दूसरे देशों से भारत अलग है। यहां मरीजों की स्थिति, संक्रमण का स्तर, उसका स्वरूप इत्यादि भिन्न हैं। हालांकि एक अध्ययन इस पर चल रहा है, जिसके परिणाम आने के बाद आगे की कार्रवाई पूरी होगी। 

Wednesday, April 29, 2020

4/29/2020 05:11:00 AM

कोरोना: जानलेवा हो सकती है प्लाज्मा थेरेपी, आइसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया सावधान

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी के इस्तेमाल के प्रति बढ़ते अति उत्साह को लेकर आइसीएमआर ने राज्य सरकार को सावधान किया है। आइसीएमआर के अनुसार बिना सोचे-समझे प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना का इलाज मरीज के लिए घातक हो सकता है। कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी कितना कारगर है, इसके सबूत जुटाने के लिए आइसीएमआर ने राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन शुरू किया है और उसके नतीजे आने तक इसके अंधाधुंध प्रयोग से बचने की सलाह दी है।
प्लाज्मा थेरेपी अभी ट्रायल स्‍तर पर, इलाज के कोई कोई प्रमाण नहीं:-
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के अनुसार भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसके इलाज के लिए विभिन्न तरीकों पर ट्रायल कर रहे हैं, जिनमें प्लाज्मा थेरेपी भी एक है। अभी भी यह ट्रायल स्तर पर ही और इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इसके इलाज से कोरोना का मरीज पूरी तरह ठीक हो जाएगा। यहां तक कि अमेरिका की फेडरल ड्रग एजेंसी भी इसे एक प्रायोगिक थेरेपी के रूप में देख रहा है।
कई राज्‍यों ने इलाज के लिए मांगी अनुमति:-
गौरतलब है कि दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों ने कोरोना के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी की इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। आइसीएमआर ने इसके लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा कि प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने के पहले उसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से जरूरी इजाजत लेनी पड़ेगी। कुछ बड़े अस्पतालों में कोरोना थेरेपी को कोरोना के इलाज में सफल होने के दावे के बाद राज्यों में इससे इलाज की होड़ लग गई। आइसीएमआर ने इसे घातक बताते हुए इससे बचने की सलाह दी है।
मरीज के शरीर में पैदा कर सकता है जानलेवा एलर्जिक रिएक्शन:-
कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी की सीमाएं बताते हुए आइसीएमआर ने कहा है कि इसमें प्लाज्मा में उपलब्ध एंटीबॉडी की मात्रा और उसकी गुणवत्ता सबसे अहम है। यदि पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी उपलब्ध नहीं हुआ और उसकी गुणवत्ता भी मापदंड के मुताबिक नहीं रही, तो फिर उस प्लाज्मा की इलाज में उपयोगिता संदेहास्पद हो जाती है। यही नहीं, किसी एक व्यक्ति का प्लाज्मा दूसरे व्यक्ति में प्राणघातक एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकता है, जो फेफड़े को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
लव अग्रवाल ने फिलहाल प्लाज्मा थेरेपी को ट्रायल के रूप में ही इस्तेमाल करने की कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि आइसीएमआर इस पर राष्ट्रीय स्तर पर स्टडी शुरू किया है। स्टडी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्लाज्मा थेरेपी कोरोना के उपचार में कितना कारगर है। आइसीएमआर के गाइडलाइंस से अलग हटकर कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल गैर-कानूनी माना जाएगा।
जानिए क्‍या होती है प्लाज्मा थेरपी:-
प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके व्यक्ति के खून से प्लाज्मा निकालकर उस व्यक्ति को चढ़ाया जाता है, जिसे कोरोना का संक्रमण हुआ है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि जो व्यक्ति कोरोना के संक्रमण से मुक्त हो चुका है, उसके शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। जब इसे कोरोना से जूझ रहे मरीज को चढ़ाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

Sunday, April 26, 2020

4/26/2020 07:12:00 AM

आपको बीमार भी बना सकते हैं अंगूर, सेब सहित ये फल, जानिए कैसे

हेल्थ। केला, अंगूर, सेब समेत कई अन्य ऐसे फल हैं जो पौष्टिकता से भरपूर है साथ ही साथ शरीर के लिए कुछ मायनों में घातक भी साबित हो सकते हैं. आपको बता दें कि कोई भी चीज को खाने का एक तरीका होता है साथ में उसे सही मात्रा में खाना भी जरूरी है. अन्यथा ये सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. ये खाद्य पदार्थ आपके पाचन क्रिया से लेकर कई अन्य समस्याओं का जड़ बन सकते हैं. अंग्रेजी वेबसाइट फूड सेफ्टी के अनुसार इन फलों के कई नुकसान भी है, जानें..
●सेब इन मामलों में हो सकता है नुकसानदेह
सेब दुनियाभर में सबसे अधिक खाया जाने वाला फल है. कई गुणों के कारण डॉक्टर भी प्रतिदिन एक सेब इसे खाने की सलाह देते हैं. इसमें प्रचुर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट और बीमारियों से लड़ने वाले तत्व पाए जाते हैं. जो शरीर की कोशिकाओं के निर्माण में लाभदायक हैं. हालांकि, अंग्रेजी वेबसाइट फूड सेफ्टी के अनुसार जिन्हें मौसमी एलर्जी की समस्या है यानी जो सामान्य फ्लू से अक्सर परेशान रहते हैं, उन्हें इसका सेवन करने से बचना चाहिए. क्योंकि, यह शरीर में उल्टा असर करने लगता है. यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बाधित कर सकता हैं. बहुत ज्यादा मात्रा में सेब खाने से शरीर में फैट के साथ-साथ रक्त में मौजूद शुगर की मात्रा भी बढ़ सकती है जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए सेब का एक निश्चित मात्रा में ही सेवन किया जाना चहिये.
●ऐसे बिल्कुल न खाएं अंगूर
ऐसिडिक फ्रूट्स जैसे अंगूर और स्ट्रॉबेरी और सब ऐसिडिक फ्रूट्स जैसे सेब, अनार, अडू को मीठे फल केला और किशमिश या मुनक्का को साथ मिलाकर नहीं खाना चाहिए. इससे आपको पाचन संबंधी प्रॉब्लम हो सकती हैं.
●केला खाने का नुकसान

केले में मौजूद स्टार्च हमारे मुंह काफी देर से घुलता है, जिसके वजह से दांतों में कैविटी का खतरा आम है. आप लोगों ने सुना होगा कि इसके सेवन से पेट साफ होता है. लेकिन यह कब्ज का शिकार भी आसानी से बना लेता है. इसमें मौजूद टैनिट एसिड पाचन तंत्र पर असर करता है.
●तारबूज इन मामलों में हो सकता है नुकसानदेह

खरबूजा खाने के बाद पानी पीने से हैजा की बीमारी हो सकती है. इसे खाली पेट नहीं खाना चाहिए. यह आपके एबडोमन में पित्त संबंधी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है. प्रेग्नेंसी के दौरान इसे नहीं खाएं तो ज्यादा अच्छा होगा क्योंकि, यह काफी भारी करता है. जो आपको हाजमे को बिगाड़ सकता है.
●पपीता और अनानस खाना कब हो सकता है खतरनाक
पपीता और अनानस खाने के लिए डॉक्टरों द्वारा प्रग्नेंसी के दौरान मना किया जाता है. इसके खाने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है. अनानस प्रेग्नेंट महिलाओं में शुगर लेवल को बढ़ा सकता है, जिससे मधुमेह का खतरा हो सकता है.
●अमरूद और केले को मिक्स करके खाना हो सकता है नुकसानदायक

एक हिन्दी वेबसाइट nbt में छपी खबर के मुताबिक अगर आपको जी मिचलाने, ऐसिड बढ़ने और सिरदर्द जैसी समस्या रहती है तो अमरूद और केले को मिक्स करके न खाएं. स्टार्च फ्रूट्स और हाई प्रोटीन फ्रूट्स को मिला कर खाना भी नुकसानदायक हो सकता है
बहुत कम ही ऐसे फल है जिसमें स्टार्च की मात्रा होती है. जिसमें हरा केला भी शामिल है. मक्का, आलू, चावल, राजमा, लोबिया और सिंघाड़ा जैसी सब्जियों में स्टार्च की भरपूर मात्रा होती है. ऐसे आहारों को हाई प्रोटीन फलों के साथ भूल कर भी नहीं खाना चाहिए. आपको बता दें कि अमरूद, किशमिश, मुनक्का, पालक और ब्राकली में हाई प्रोटीन होते हैं. हमारे शरीर को प्रोटीन डाइजेस्ट करने के लिए ऐसिडिक बेस चाहिए होता है और स्टार्च को डाइजेस्ट करने के लिए ऐल्कलाइन बेस चाहिए होता है. यही कारण है कि इन्हें साथ में नहीं खाना चाहिए.
फल खाने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें
दिन भर में 4 या 6 फल से अधिक न खाएं. कोई भी फल खाने के बाद कभी फौरन पानी नहीं पीना चाहिए. अगर आपने नमक का अधिक सेवन कर लिया है तो वॉटर बेस्ड फल जरूर खा लें. अच्छे स्वास्थ्य के लिए दिन भर में कोई एक फल जरूर खाना चाहिए. अगर आपको सामान्य फ्लू है या हाजमे जैसी बीमारी है तो कुछ फलों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से जरूर संपर्क कर लें।

Thursday, April 16, 2020

4/16/2020 07:16:00 AM

इम्यूनिटी को बढ़ाने में मददगार है कलौंजी, शरीर से कई बीमारियां रहती हैं दूर

हेल्थ डेस्क। भारत में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है. डॉक्टर्स से अनुसार, कोरोना वायरस से बचाव के लिए शरीर के इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग रखना जरूरी है. इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं कलौंजी के फायदे. कलौंजी के बीज काले रंग के होते हैं. कुछ स्थानों पर इसे मंगरैल भी कहा जाता है. काले रंग के इन छोटे-छोटे बीजों में स्वास्थ्य का खजाना छिपा हुआ है. कलौंजी के बीज इम्यूनिटी बढ़ाने, मुंहासों पर नियंत्रण रखने में बेहद लाभदायक साबित होते हैं. इसके साथ ही कलौंजी के बीजों का सेवन करने से शरीर से कई बीमारियां दूर रहती हैं.
इम्यूनिटी को बढ़ाता है कलौंजी:-
- कलौंजी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल से लड़ने में मदद करती है. जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का कारण भी बनती है.
- कलौंजी का इस्तेमाल करने से खराब कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है. इसके साथ ही कलौंजी अच्छे एचडीएल कोलेट्रॉल को बढ़ाता भी है.
- कलौंजी पर हुए शोध में यह बात सामने आई है कि इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो दिमागी क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं.
- कलौंजी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट कैंसर से बचाव में सहायक होते हैं.
ऐसे करें कलौंजी का इस्तेमाल:-
- कलौंजी के बीजों को पानी के साथ उबालें और उसमें नींबू और शहद को मिलाकर पिएं. आप चाहे तो कलौंजी के बीज लेकर गर्म पानी के साथ निगल लें. इसके बाद एक चम्मच शहद खा लें.
- थोड़े से कलौंजी के बीजों को लेकर उसमें नींबू का रस डालकर एक तरफ रख दें. नींबू के रस और कलौंजी के मिक्स को थोड़ी देर धूप में रख दें. जब तक कि कलौंजी के बीज पूरी तरह से सूख न जाए. सूखने के बाद रोजाना 8 से 10 बीज खाएं.
इन लोगों को नहीं करना चाहिए कलौंजी का इस्तेमाल:-
कई प्राकृतिक गुणों से भरपूर कलौंजी का इस्तेमाल कुछ लोगों को नहीं करना चाहिए. एक निश्चित मात्रा से अधिक कलौंजी के बीजों का सेवन करने से यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है. गर्भवती महिलाओं या गर्भ धारण करने वाली महिलाओं को कलौंजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. अगर, किसी कारणवश कोई गर्भवती महिला कलौंजी का इस्तेमाल करना चाहती है तो इसके लिए पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें.

Saturday, April 4, 2020

4/04/2020 07:39:00 AM

कोरोना वायरस: पहले परीक्षण में कोरोना वैक्सीन सफल, नई दवा में दिखी उम्मीद

हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस यानी कोविड 19 महामारी से पूरी दुनिया जुझ रही है। लगभग तमाम बड़े देशों के वैज्ञानिक इस महामारी की दवा खोजने के लिए दिन-रात लगे हुए हैं। कोरोना से मौत की खबरों के बीच एक अच्छी और उम्मीदभरी खबर निकली है। इस वायरस से मुकाबले के लिए तैयार की जा रही एक संभावित वैक्सीन अपने पहले परीक्षण सफल पाई गई है। यह वैक्सीन इतनी मात्रा में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की उत्पत्ति करने में खरी पाई गई, जिससे इस खतरनाक वायरस को बेअसर किया जा सकता है।
ई बायोमेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार वैक्सीन का परीक्षण के चूहे पर किया गया। परीक्षण में चूहे को जब पिट्सबर्ग कोरोना वायरस वैक्सीन दी गई तो दो हफ्ते के भीतर चूहे के शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी की उत्पत्ति शुरू हो गई।
अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता एंड्रिया गैम्बोटो ने कहा- हम स्पष्ट रुप से जानते हैं कि इस नए वायरस से कहां मुकाबला करना है। उनका दावा है कि यह वैक्सीन एनिमल टेस्ट में सफल पाई गई है। परीक्षण के अगले चरण में यह वैक्सीन इंसानों पर आजमाई जाएगी। इंसानों पर ये परीक्षण अगले कुछ समय में शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि शोधकर्ता का कहना है कि यदि इंसानों पर यह वैक्सीन सफल पाई जाती है तो भी बाजार में वैक्सीन को आने में करीब एक साल से ज्यादा समय लग सकता है।
नई दवा में दिखी उम्मीद:-
इधर कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच उसकी वैक्सीन विकसित करने की कवायद भी तेजी से चल रही है। वैज्ञानिकों को परीक्षण के दौर से गुजर रही एक नई दवा में कोरोना वायरस (कोविड 19) से मुकाबले की उम्मीद नजर आई है। यह दवा कोशिका के स्तर पर वायरस के संक्रमण को रोकने में प्रभावी पाई गई है। दावा किया जा रहा है कि इस दवा के विकास से कोरोना का उपचार संभव हो सकता है।
सेल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक कोविड 19 की वजह बनने वाले सार्स कोवी 2 के अहम पहलुओं पर नई रोशनी डालता है। कोशिका स्तर पर वायरस की पारस्परिक क्रियाओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलने के साथ ही अध्ययन से यह भी पता चलता है कि वायरस किस तरह रक्त वाहिनियों और किडनी को संक्रमित करता है। कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जोसेफ पेनिंगर ने कहा- हम इस महामारी के उपचार की दिशा में विकसित की जा रही नई दवा को लेकर आशावान हैं।

Thursday, April 2, 2020

4/02/2020 05:55:00 PM

कोरोना के टीके को लेकर आई खुशखबरी ऑस्ट्रेलिया का जानवरों पर ट्रायल सफल- WHO

हेल्थ। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के वैक्सीन पर तेज़ी से काम चल रहा है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ साइंटिफ़िक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन (सीएसआईआरओ) का कहना है कि यह परीक्षण पहला पूरी तरह से जानवरों पर आज़माया गया प्री-क्लिनिकल ट्रायल होगा.
शोधकर्ताओं ने कहा है कि पूरी दुनिया से मिलने वाला सहयोग शानदार है जिसकी वजह से इस चरण तक हम इतनी तेज़ी से पहुँच पाए हैं.
सीएसआईआरओ के डॉक्टर रॉब ग्रेनफ़ेल का कहना है, "आमतौर पर इस स्टेज तक पहुँचने में एक से दो साल तक का वक़्त लगता है. लेकिन हम सिर्फ़ दो महीने में यहां तक पहुँच गए हैं."
कैसे काम करता है ये वैक्सीन:-
पिछले कुछ दिनों में सीएसआईआरओ की टीम ने इस वैक्सीन को गंधबिलाव (नेवले की जाति का एक जानवर) पर टेस्ट किया है. यह साबित हो चुका है कि गंधबिलाव में इंसानों की तरह ही कोरोना वायरस का संक्रमण होता है.
वास्तव में सार्स कोवि-2 वायरस कोरोना संक्रमण के लिए ज़िम्मेवार होता है.
पूरी दुनिया में कम से कम 20 वैक्सीन पर अभी काम चल रहा है.
सीएसआईआरओ की टीम दो वैक्सीन पर काम कर रही है.
पहला वेक्टर वैक्सीन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से विकसित किया गया है. इसमें कोरोना वायरस के प्रोटीन को इम्युन सिस्टम में डालने के लिए 'डिफ़ेक्टिव' वायरस का इस्तेमाल किया जाता है और फिर इससे होने वाले प्रभावों परीक्षण किया जाता है.
विक्टोरिया में ऑस्ट्रेलियन एनीमल हेल्थ लैबोरेट्री के प्रोफ़ेसर ट्रेवर ड्रु बताते हैं कि इम्युन सिस्टम में डाला गया वायरस अपनी प्रतिलिपि नहीं तैयार करता. इसलिए इस वैक्सीन से बीमार पड़ने की संभावना नहीं है.
वो दूसरे वैक्सीन के बारे में भी बताते हैं जो अमरीकी कंपनी इनोविओ फर्मास्युटिकल्स ने तैयार किया है. यह वैक्सीन थोड़ा अलग तरीके से काम करता है.
यह इस तरह से तैयार किया गया है कि यह इम्युन सिस्टम में कोरोना वायरस के कुछ प्रोटीन को इनकोड करता है और फिर शरीर की कोशिकाओं को उन प्रोटीन को पैदा करने के लिए उत्प्रेरित करता है.
यह कई पहलुओं से बहुत अहम हैं और इसके सफल होने की बहुत हद तक गुंजाइश बनती है.
कब तक हमें इसके नतीजे मिल सकते हैं:-
वैज्ञानिकों का कहना है कि जानवरों पर होने वाले परीक्षण के नतीजे जून की शुरुआत में आ सकते हैं. अगर नतीजे सही आते हैं तो वैक्सीन को क्लीनिकल परीक्षण के लिए भेजा जा सकता है. इसके बाद से मार्केट में इसके आने की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि कम से कम 18 महीने का वक़्त इसके बाद भी दूसरी प्रक्रियाओं में लग सकते हैं.

Wednesday, April 1, 2020

4/01/2020 06:50:00 AM

तुलसी नीम गिलोय में है कोरोना वायरस को नष्ट करने की क्षमता लेकिन भारतीयों ने आयुर्वेद से बनाई दूरी

कौशाम्बी। प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को अगर संरक्षित नहीं किया गया तो आगे आने वाली पीढ़ी को कोरोना वायरस से भी भयंकर महामारी से निपटना मुश्किल होगा इसलिए विदेशों द्वारा बनाई गई एलोपैथी वैक्सीन को छोड़कर हमें भारतीय चिकित्सा आयुर्वेदिक पद्धति को संरक्षित करना होगा नीम तुलसी गिलोय संजीवनी जड़ी बूटी के खजाने से हमारे देश की धरती भरी है
आयुर्वेद के जनक कहे जाने वाले वैद्यराज चरक सुश्रुत ने आयुर्वेद के गुणों के बारे में जो जानकारियां समाज को दिया था उसमें संजीवनी बूटी जैसी महान औषधियों का भी जिक्र किया था जो मरे ब्यक्ति को भी जिंदा कर देती थी दूषित खून को शुद्ध करने संक्रमण को समूल नष्ट करने की शक्ति नीम गिलोय में मौजूद है प्राचीन काल में भारत देश में आयुर्वेद के तमाम विख्यात वैद्य वैद्यराज के ज्ञान को अर्जित कर लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है प्राचीन काल में आयुर्वेद पद्धति से भारतीय स्वस्थ्य रह कर हजारो वर्ष जीते थे देश की आयुर्वेद पद्धति को बढ़ाने के बजाय सरकारी तंत्र इस भारतीय खजाने को भूलता जा रहा है जो  देश के लिए बड़ा चिंतन का विषय है 
आज भी देश की धरती पर तमाम ऐसी जड़ी बूटी है जो समाज में लोगों को स्वस्थ निरोगी रखने में कारगर हैं तुलसी, नीम, गिलोय, दूब, घास, पीपल,  अपराजिता, बरगद, गाय का गोबर, काली मिर्च, हरड़ जीरा बहेरा आंवला चिरायता  मकोय तेजपत्ता जायफल जावित्री  अफीम कलौंजी मुलेठी अपराजिता भांग सतावर हल्दी चोपचीनी शहद वंश लोचन मन्दार केशर कस्तूरी अकरकरा मयूर का अंडा चिचड़ी अपामार्ग पिपरमिंट सनाय मेथी दाना हड़जोड़ सहित तमाम महत्वपूर्ण आयुर्वेद औषधियों से भारत देश की यह धरती भरी पड़ी है।
प्राचीन काल में आयुर्वेद में भारत विश्व गुरु था लेकिन चार सौ वर्ष पूर्ब लगभग विदेशी पद्धति के चकाचौंध में हम अपनी चिकित्सा पद्धति को भूल चुके हैं जिससे हमारी चिकित्सा पद्धति का ज्ञान लुप्त होता जा रहा है लेकिन इन जड़ी-बूटियों का ज्ञान सीमित लोगो तक है और सीमित क्षेत्र के लोग ही इसका लाभ उठाते हैं और अन्य लोग जड़ी बूटियों के ज्ञान लाभ से उपेक्षित हैं।
समाज के लोगों में आयुर्वेद का ज्ञान पहुंचाने की बेहद जरूरत है आयुर्वेद के महत्व की जानकारी लोगों तक पहुंचे इसके लिए सरकार को सार्थक प्रयास करने की जरूरत है आम जनता को आयुर्वेद के प्रति प्रेरित कर उन्हें आयुर्वेद के प्रति प्रोत्साहित करना यह सरकार का दायित्व है आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की शुरुआत की जाए यह कम खर्चीली है और इस पद्धति से गरीबों का भी सस्ता और सुलभ इलाज आसानी से हो सकता है
एलोपैथी के आगे पुरानी आयुर्वेद पद्धति को लोग भूलते जा रहे हैं जबकि आयुर्वेद पद्धति के बारे में कुछ लोगों को ही विशेष जानकारियां हैं इस पद्धति की खोज कराई जानी चाहिए और गांव क्षेत्र में जिन लोगों को आयुर्वेद की जानकारी है उन्हें प्रोत्साहित कर आगे बढ़ने का मौका दिया जाना चाहिए लेकिन किताबी डिग्री के आगे आयुर्वेद का ज्ञान रखने वालों को सरकार और उनके नुमाइन्दे महत्व नही देते जो चिन्ता का विषय है आयुर्वेद पद्धति की औषधियों से तो कोरोनावायरस से भी भयंकर वायरस को नष्ट करना सम्भव है कोरोना जैसे महामारी से नीम तुलसी गिलोय जैसी आयुर्वेद औषधि से इलाज कर महामारी से बचा जा सकता है।
आने वाली पीढ़ी को आयुर्वेद के बारे में भरपूर जानकारी हो जिससे वह विदेशी वैक्सीन का सहारा देश वासियों को ना लेना पड़े हमारे भारत देश की आयुर्वेद चिकित्सा सफल चिकित्सा में रही है लेकिन हम आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को भूल गए तो भविष्य में आने वाली पीढ़ी को खतरनाक महामारी से कैसे बचाया जा सकता है।

Monday, March 30, 2020

3/30/2020 06:00:00 AM

कोरोना वायरस से बचने में होम्योपैथी दवा आएगी काम, जानिए क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन?

दिल्ली। कोरोना वायरस से देश-विदेश में लोग बेहाल हैं। इस महामारी से अब तक भारत भर में 25 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं इससे संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या 979 पार कर चुकी है। कई देशों के डॉक्टर और शोधकर्ता इस वायरस की वैक्सीन खोजने में जुटे हुए हैं। सरकारें सभी जरुरी कदम उठा रही हैं। पूरा देश घरों में कैद है ताकि संक्रमण का खतरा कम से कम हो लेकिन बावजूद इसके हर दिन संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
पीएम मोदी (Narendra Modi) ने आज मन की बात में कहा कि यह युद्ध जैसी स्थिति है और डॉक्टर अपना काम कर रहे हैं। दुनिया भर में मेडिसिन क्षेत्र के वैज्ञानिक इसकी कारगर दवाई बनाने में जुटे हुए हैं। दुनिया को तो अभी इस वायरस के बारे में ही बहुत कम जानकारी है। वहीं दूसरी तरफ आयुष मंत्रालय ने कहा था कि कोरोना से होने वाले संक्रमण को बचाने वाली यूनानी दवाओं में शरबत उन्नाब, तिर्यकअर्बा, तिर्यक नजला, खमीरा मार्वारिद जैसी दवाएं काम आ सकती हैं। इसके अलावा मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में लोगों को साफ-सफाई से रहने की सलाह दी है।
ऐसे में सवाल उठता है कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जब तक वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) तैयार नहीं होती क्या किसी को वैकल्पिक चिकित्सा का उपयोग करना चाहिए? आइए जानते हैं।
क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन:-
विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस गेब्रेयेसिस के मुताबिक कोविड-19 (Covid-19) से बचने के लिए किसी भी तरह की दवा लेना हानिकारक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा- 'कोरोना वायरस के इलाज में बिना ट्रायल और बिना वैज्ञानिक प्रमाण वाले दवाओं के इस्तेमाल से बचें। कई दवाएं पेपर पर और टेस्ट ट्यूब में कोरोना वायरस के खिलाफ काम करती दिखी हैं लेकिन वास्तविक मरीजों पर वो कारगर नहीं रही हैं। हमें इस वायरस के इलाज में कारगर दवाओं के पक्के सबूत चाहिए। चूंकि यह वैश्विक महामारी बन चुकी है ऐसे में इस मामले में हम कोई शॉर्टकट नहीं ले सकते।
आयुष मंत्रालय के मुताबिक:-
तुलसी, काली मिर्च और पिप्पली जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां से लोगों को कोरोना वायरस के सक्रमण से बचाया जा सकता है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन इससे इत्तेफाक नहीं रखता। ये उपाय आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने में जरूर कारगर हो सकते हैं क्योंकि अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी तो किसी भी तरह का वायरस आपको छू नहीं सकेगा। घर में रहें पौष्टिक भोजन करें और अपने आस-पास सफाई बनाए रखें।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक रविवार सुबह 10 बजे तक देश में कुल 979 मामले हो गए हैं। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कुल मामलों में 86 लोग ऐसे भी हैं जो पूरी तरह से ठीक हो गए है। भारत में सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं। 
बचाव ही सबसे कारगर उपाय:-
'कोविड 19' से बचने के लिए आप नियमित रूप से अपने हाथ साबुन से धोएं। खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करें। बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूए। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचे
कोरोना वायरस के सामान्य लक्षणों की बात करें तो इसमें सबसे पहले बुखार और सूखी खांसी होती है। अगर आपको ये लक्षण खुद में दिखें तो संभव है कि आप पॉजीटिव हो सकते हैं। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। एहतियात के तौर पर खुद को बाहरी दुनिया से अलग-थलग कर लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय हो सकता है।

Sunday, March 29, 2020

3/29/2020 07:14:00 AM

CoronaPositive: Abbott लैब ने पेश की नई किट, सिर्फ 5 मिनट में पता चलेगा कोरोना है या नहीं

नई दिल्ली । कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया पेरशान है लेकिन इसी बीच एक खुशखबरी आई है। खुशखबरी यह है कि अब सिर्फ 5 मिनट में पता चल जाएगा कि किसी को कोरोन वायरस का संक्रमण है या नहीं। फिलहाल कोरोना का टेस्ट रिपोर्ट आने में 24 घंटे का वक्त लगता है।
Abbott नाम की अमेरिकी लैब ने एक पोर्टेबल टेस्ट किट तैयार किया है जिसकी मदद से सिर्फ पांच मिनट में कोरोना वायरस के टेस्ट का पता लगाया जा सकता है। इसकी जानकारी Abbot लैब ने खुद ट्वीट करके दी है। बता दें कि इस टेस्ट किट को अमेरिकी फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की मंजूरी भी मिल गई है। अगले सप्ताह से यह टेस्ट किट अस्पतालों में उपलब्ध करा दिया जाएगा।
Abbot के मुताबिक कोरोना वायरस के इस टेस्ट किट की साइज महज एक टोस्टर के बराबर है। इस टेस्ट किट में मॉलिकुलर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। यह टेस्ट किट महज पांच मिनट में पॉजिटिव और 13 मिनट में निगेटिव रिजल्ट देने में सक्षम है।
एबोट के अध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी रॉबर्ट फोर्ड ने कहा, "कोविड -19 महामारी कई मोर्चों पर लड़ी जाएगी जिसमें यह पोर्टेबल आणविक परीक्षण भी मददगार होगा जो मिनटों में परिणाम देगा।" हालांकि इस किट के भारत आने की फिलहाल कोई खबर नहीं है, लेकिन यह किट कोरोना से लड़ने और उसकी पहचान करने में काफी मददगार साबित होगा।

Thursday, March 26, 2020

3/26/2020 07:46:00 AM

Coronavirus Update : खांसी और बुखार ही नहीं, अब कोरोना वायरस के संक्रमितों में दिखे ये खास लक्षण, ऐसे रहें सावधान

भोपाल/ चीन के वुहान से शुरु हुए कोरोना वायरस ने दुनियाभर समेत भारत ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में भी अपना डरावना रूप दिखाना शुरु कर दिया है। जहां देश में अब तक 606 संक्रमित और 12 लोगों की मौत की पुष्टी हो चुकी है। वहीं, मध्य प्रदेश में इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 15 जा पहुंची है। हालही में मध्य प्रदेश के उज्जैन में कोरोना से संक्रमित एक महिला की मौत की पुष्टी भी हुई है। मध्य प्रदेश में कोरोना से मौत का पहला मामला सामने आया है। तेजी से फैल रहे इस संक्रमण से लोगों को बचाए रखने के लिए सरकार की ओर से देशभर में लॉकडाउन किया गया है। क्योंकि, इस संक्रमण का अब तक पर्याप्त इलाज नहीं बना है। इसलिए इसकी रोकथाम का बेहतर विकल्प घर में रहना ही है।
इन लक्षणों कोहल्के में न लें:-
इस तेजी से फैलने वाली महामारी को रोकने के लिए अभी तक कोई दवा का आविष्कार नहीं किया गया है। इस बीमारी से बचने के लिए लोग कई सावधानियां बरत रहे हैं। इसके लक्षण एक आम सर्दी की तरह ही है, जो आमतौर पर मौसम बदलने के कारण लोगों को हो ही रहा है। अब तक कोरोना से ग्रस्त लोगों में देखे गए लक्षणों में मुख्य रूप से बुखार, गले में खराश, सूखी खांसी, मांसपेशियों में दर्द और सांस की तकलीफ सामने आए हैं। लेकिन, अब कोरोना के संक्रमितों में कुछ नए लक्षण भी सामने आए हैं। अगर आपको किसी व्यक्ति में इनमें से कोई लक्षण दिखाई देता है, तो उसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।
शोध में हुई पुष्टी:-
हालही में जर्मनी में हुए एक सोध में सामने आया है कि, कोरोना वायरस के नए लक्षणों के अनुसार, इस बीमारी से संक्रमित लोगों को गंध और स्वाद की समस्या है। आपको बता दें कि, 66 प्रतिशत रोगियों में ये लक्षण सामने आए हैं। साथ ही, 30 प्रतिशत रोगियों में एक और नया लक्षण ये दिखाई दिया है उन्हें दस्त की शिकायत भी हुई है।
सतर्कता सबसे जरूरी:-
हालांकि, वायरस से संक्रमित ज्यादातर रोगियों को पहले बुखार होता है। इसके अलावा थकान, मांसपेशियों में दर्द और सूखी खांसी भी हो सकती है। उसी समय, कुछ लोगों को एक या दो दिन के लिए उल्टी या दस्त का अनुभव हो सकता है। वायरस को रोकने के लिए सतर्कता ही सबसे बेहतर बचाव है। ऐसे में आगामी दिनों में किसी भी सार्वजनिक स्थलों में जाने से बचें और हमेशा चहरे पर मास्क लगाकर रखें। साथ ही थोड़ी थोड़ी देर में चहरे समेत अपने हाथ पैरों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। क्षेत्रों में जाते हैं, तो भीड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचने के लिए साथियों को मास्क पहनना चाहिए।

Monday, March 23, 2020

3/23/2020 03:40:00 PM

ऐसे आपके शरीर में घुसता है कोरोना वायरस, आप जानते हैं क्या, कितने प्रकार के है कोरोना वायरस

भोपाल. कोरोना वायरस इस वक्त दुनिया के 3.32 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है। 14,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में अभी तक 415 लोग संक्रमित हैं और 7 लोगों की मौत हो चुकी है।
कितने तरह के है कोरोना वायरस:-
बताया जा रहा है कि दुनिया में 6 तरह के कोरोना वायरस मौजूद है, जो इंसानी शरीर पर हमला कर चुके हैं। इनमें से 4 सामान्य हैं जबकि दो सार्स और मर्स को अउटब्रेक किया था। आइये जानते हैं कि कोरोना वायरस हमारे शरीर में कैसे प्रवेश करता है।
हमारे शरीर में कैसे प्रवेश करता है कोरोना वायरस
कोरोना वायरस हमारे शरीर में नाक, मुंह, कान या आंख जरिए घुसता है। इसके बाद यह शरीर की कोशिकाओं तक जाता है। इसके बाद कोरोना वायरस का जीनोम हमारे शरीर की कोशिकाओं में एक नेगेटिव वायरल प्रोटिन बनाना शुरू करता है ताकि वह शरीर के अंदन नया कोरोना वायरस उतपन्न कर सके।
इसके बाद आने लगता है बुखार:-
ऐसे हालात में हमारे शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली वायरस से लड़ाई करता है। तब बुखार आता है। जब स्थिति गंभी हो जाती है तब हमारा इम्यून सिस्टम हमारे फेफड़ों की कोशिकाओं पर हमला करता है। ऐसा होने से कफ बनने लगता है, जिस कारण सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

Thursday, March 19, 2020

3/19/2020 05:39:00 AM

कोरोना वायरस अलर्ट : इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को है कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा

भोपाल। चीन से फैलकर दुनियाभ में महामारी का रूप ले लेने वाले कोरोना वायरस की जद में अब तक दुनिया भर के 1,98,521 लोग आ चुके हैं। वहीं, संक्रमण की चपेट में आकर अब तक 7,988 लोगों ने जान भी गंवा दी है। भारत में भी अब तक कोरोना से संक्रमति 140 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 3 लोग जान गंवा चुके हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश में कोरोना के पॉजिटिव एक भी मामला सामने नहीं आया है। इस बीच दुनिया भर के स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ और वैज्ञानिक वायरस का इलाज, उसके फैलने के कारण, रोकथाम, किस उम्र के लोगों के लिए सबसे ज्‍यादा खतरा जैसी चीजों पर अध्‍ययन कर रहे हैं। चीन में हुए एक ऐसे ही अध्‍ययन में सामने आया कि, किस ब्‍लड ग्रुप के लोग कोरोना वायरस की चपेट में सबसे ज्यादा आ रहे हैं। आसान शब्‍दों में समझें तो, किस ब्‍लड ग्रुप के लोगों के लिए कोरोना वायरस कितना खतरनाक है। रिसर्त के हवालें से आइये जानें।
'ए' ब्‍लड ग्रुप के लिए सबसे खतरनाक तो 'ओ' के लिए सबसे कम:-
चीन में हुई रिसर्च के मुताबिक, सामने आया कि, कोरोना वायरस का सबसे अधिक खतरा 'ए' ब्‍लड ग्रुप वाले लोगों पर सबसे ज्‍यादा है। वहीं, 'ओ' ब्‍लड ग्रुप के लोगों पर इस संक्रमण का सबसे कम जोखिम नजर आया। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि, उन्‍हें संक्रमण नहीं हो सकता, वे भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं. लिहाजा, उन्‍हें भी बार-बार हाथ धोने समेत बचाव के तमाम उपाय करते रहना होगा। शोधकर्ताओं ने चीन के सबसे ज्यादा संक्रमित इलाके वुहान और शेनजेन के 2,000 से ज्‍यादा मरीजों पर अध्यन किया था, जिसके बाद उनके सामने आया कि, 'ए' ब्‍लड ग्रुप के लोगों में संक्रमण फैलने के बाद स्थितियां ज्यादा तेजी से बिगड़ी, वहीं एस ब्लड ग्रुप के लोगों की संक्रमित होने की दर भी सबसे अधिक है। इसके अलावा 'ओ' ब्‍लड ग्रुप के लोग संक्रमण से काफी जल्दी रीकवर हुए हैं।
ये आंकड़े आए सामने:-
कोरोना वायरस की वजह से मारे गए 206 लोगों में से 85 लोगों का ब्लड ग्रुप A था, वहीं 52 लोग ब्लड ग्रुप O वाले थे। अनुसंधानकर्ताओं ने यह परिणाम निकाला कि कोरोना वायरस से मरने की सबसे ज्यादा आशंका A ब्लड ग्रुप वालों में है। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि, अन्य ब्लड ग्रुप के लोगों के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। उन्हें भी संक्रमण से बचे रहने के उपाय ठीक उसी तरह करने होंगे, जैसे 'ए' ब्‍लड ग्रुप के लोगों को करने हैं। वहीं, 'ए' ब्‍लड ग्रुप को लोगों को ज्यादा अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। साथ ही, शोध के बाद जारी एडवाइजरी में शोधकर्ताओं ने सबसे अधिक जोर 'ए' ब्‍लड ग्रुप के मरीजों पर देने की बात कही है।
सबसे सेफ है O ब्लड ग्रुप:-
इससे पहले भी हुई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि ब्लड ग्रुप A, B और AB वालों को ब्लड ग्रुप O की तुलना में दिल की बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जब सार्स-सीओवी-2 का हमला हुआ था, तब भी ब्लड ग्रुप O के लोग इससे कम प्रभावित हुए थे जबकि अन्य ब्लड ग्रुप के लोगों पर इसका असर अधिक था। हालांकि इस रिचर्स का फाइनल रिव्यू अभी तक नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रिसर्च से कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी का इलाज ढूंढने में आसानी होगी। ब्लड ग्रुप कोई सा भी हो, कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को लेकर सावधानियां रखना आवश्यक है।
कोरोना वायरस कैसे ब्लड ग्रुप के अनुसार करता है असर, वीडियो में जानें

Sunday, March 15, 2020

3/15/2020 05:37:00 AM

GOOD NEWS- इस दवा ने कोरोना में भी दिखाया असर, सफदरजंग अस्पताल से 6 मरीजों की छुट्टी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के खौफ के बीच शनिवार को दिल्ली से राहत पहुंचानेवाली खबर आई। यहां सफदरजंग अस्पताल में कोरोना वायरस के चलते भर्ती किए गए 6 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। इसके साथ ही संक्रमण के बाद ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 10 है। सभी मरीज अब ठीक हैं, लेकिन इन्हें अगले 14 दिन अपने घरों में ही आइसोलेशन में रखा जाएगा। ठीक होनेवाले मरीजों में वह पीड़ित भी हैं, जिनके इटली से लौटने के बाद राजधानी में इस वायरस का पहला केस सामने आया था।
14 दिन में ठीक हुए मरीज:-
सफदरजंग अस्पताल से जिन मरीजों को छुट्टी मिली है, उन्हें 14 दिनों तक आइसोलेशन में रखकर लक्षणों के आधार पर इलाज किया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज 14 दिन में ठीक हो गए। गुरुवार और शुक्रवार को लगातार दो दिनों तक जांच के बाद इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद 6 मरीजों को अगले 14 दिन घर में ही आइसोलेशन में रखने के निर्देश देते हुए उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं कोरोना वायरस से राजधानी में जिस महिला की मौत हुई है, उनके 46 वर्षीय बेटे को आरएमएल अस्पताल से सफदरजंग में शिफ्ट किया गया है। वह भी कोरोना से पीड़ित हैं।
डॉक्टरों ने उनकी हालत स्थिर बताई है। वह 23 मार्च को स्विटजरलैंड और इटली की यात्रा करके दिल्ली लौटे थे। उसके बाद ही उनमें कोरोना के लक्षण जैसे- बुखार, कफ की समस्या हुई। 7 मार्च को उन्हें आरएमएल अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हीं के कारण उनकी 68 साल की मां में भी यह संक्रमण फैला था। जानकारी के मुताबिक, इस सफदरजंग में कोरोना से पीड़ित 10 मरीज भर्ती हैं। साथ ही 11 संदिग्ध मरीज हैं। संदिग्ध मरीजों में 3 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। बाकी की रिपोर्ट का इंतजार है। अब तक सफदरजंग और राममनोहर लोहिया में 211 लोग ऐसे कोरोना वायरस को लेकर संदिग्ध मानते हुए लाए गए हैं।
टेमीफ्लू की दवा से मिला आराम:-
डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना वायरस के संक्रमण से जो मरीज ठीक हुए हैं, उन्हें उनके लक्षणों के आधार पर दवा दी गई। दूसरे अस्पतालों की तरह यहां मरीजों को ऐंटी एचआईवी दवाएं नहीं दी गईं। सफदरजंग में मरीजों को स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली टेमीफ्लू दवा दी गई। अस्पताल से शनिवार को चार संदिग्ध मरीजों को भी छुट्टी दे दी गई, उनमें कोरोना की पुष्टि नहीं हुई थी।

Saturday, March 14, 2020

3/14/2020 06:37:00 AM

Coronavirus: बाबा रामदेव ने बताया घर में सैनिटाइजर बनाने का देशी नुस्खा, आप भी जानिए

स्वास्थ: कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं इस वायरस से बचने के तरीकों के बारे में भी लोगों को अवगत कराया जा रहा है. कोरोना से बचने के लिए मास्क और सैनिटाइजर सबसे जरूरी बताए जा रहे हैं. इसको देखते हुए मास्क और सैनिटाइजर की बाजार में कमी पड़ने लगी है.
वहीं योग गुरू बाबा रामदेव ने सस्ता सैनिटाइजर बनाने का नुस्खा बताया है. इस नुस्खे के जरिए आप घर में ही सैनिटाइजर बना सकते हैं. बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने बाजार में मिल रहे महंगे सैनिटाइजर का विकल्प सुझाया है. रामदेव के मुताबिक एक लीटर पानी में 100 ग्राम नीम के पत्ते और 10 पत्ते तुलसी के डालकर उबाल लें. जब 750 एमएल पानी रह जाए तब उसे छानकर एक बरतन में निकाल लें. अब 10 ग्राम फिटकरी और 10 ग्राम कपूर का महीन पाउडर बनाकर इस पानी में‌ घोल लें और कपड़े से छान कर शीशियों में भर लें.
बाबा रामदेव ने बताया कि घर में बनाया गया ये सैनिटाइजर लगाने से हाथों और चेहरे की सुरक्षा होगी. साथ ही ये बाजार के मुकाबले बेहद सस्ता और असरदार है. ऐसे में जब बाजार में सैनिटाइजर की कमी हो गई है और बाजार में नकली सैनिटाइजर भी मिल रहे हैं ऐसे में ये घर का बना हुआ सैनिटाइजर काफी महत्वपूर्ण साबित होगा.
वहीं अगर कोरोना वायरस की बात करें तो ये वायरस (Covid-19) लगातार दुनियाभर में अपना कहर बरपा रहा है. कोरोना से हो रही मौतों का आंकड़ा हर दिन लगातार तेजी से बढ़ रहा है. पिछले 24 घंटों में 321 लोगों की कोरोना के कारण मौत हो गई. अगर अब तक हुई मौतों की बात करें तो यह आंकड़ा 5000 के करीब पहुंच गया है. कोरोना से अब तक 4,973 लोगों की मौत हो चुकी है.

Sunday, March 8, 2020

3/08/2020 03:07:00 PM

मध्यप्रदेश में कोरोना की दहशत, 180 नए संदिग्ध मरीज मिले

भोपाल। देश में कोरोना वायरस को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। मध्यप्रदेश में इसके 180 नए संदिग्ध मरीज मिले हैं। नागरिक उड्डयन विभाग ने बीते दो दिनों में भोपाल समेत प्रदेश के अन्य हवाई अड्डों पर चिन्हित किए गए यात्रियों की सूची स्वास्थ्य विभाग को सौंपी है। इसमें भोपाल के भी 28 लोग हैं। यह वे लोग हैं, जो कुछ समय पहले ही विदेश से लौटे हैं।
विभाग ने इस सूची के आधार पर सभी जिलों को इन पर नजर रखने को कहा है। इन यात्रियों को 14 दिन तक होम आइसोलेशन में रखा जाएगा। इस दौरान या एक माह बाद इनकी तबीयत खराब होती है तो इसकी सूचना तत्काल विभाग के आला अधिकारियों को दी जाएगी। मालूम हो कि प्रदेश में संदिग्धों की संख्या बढ़कर अब 600 हो गई है। हालांकि अब 600 हो गई है। हालांकि अब तक किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं है।
नहीं लिए गए सैंपल:-
राहत वाली बात यह है कि सभी 180 यात्री पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इनमें वायरल फीवर या अन्य संक्रमण के लक्षण भी नहीं मिले हैं। लिहाजा इनके स्वाब के नमूनों को जांच के लिए भेजने की जरूरत नहीं पड़ी है। हालांकि एक माह के भीतर इन्हें किसी प्रकार का संक्रमण होता है तो सैंपल की जांच कराई जाएगी।
दो बड़े आयोजन हुए रद्द:-
स्वास्थ्य आयुक्त प्रतीक हजेला की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश में बड़े स्तर प होने वाले आयोजनों को निरस्त किया जाए। इसके साथ ही कर्मचारियों को बाहर जाने पर रोक लगा दी है। इसके बाद कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने कलियासोत ग्राउंड पर होने वाले एडवेंचर स्पोर्ट्स और रंग रन को स्थगित कर दिया है।
कोरोना वायरस से ऐसे बचें:-
पानी उबालकर पियें, आहार में विटामिन सी, जिंक और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स देने वाले पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं, स्वच्छता पर खास ध्यान दें। तुलसी, अदरक, काली मिर्च, मिश्री और कुछ बूंदे नींबू की डालकर काढ़ा बनाकर पीयें। गिलोय का सेवन सुबह खाली पेट करना फायदेमंद होता है। भोजन में सब्जियों का सूप भी ले सकते हैं। किसी भी प्रकार का पेय पदार्थ (कोल्ड ड्रिंक्स) आइस्क्रीम कुल्फी आदि खाने से बचें। किसी भी प्रकार का डिब्बा बंद भोजन, पुराना बर्फ का गोला, सील बंद दूध और इसी दूध से बनी मिठाइयां जो 48 घंटे से पहले बनी हो, उसे खाने से बचें। कोरोना वायरस से बचने के लिए अपने हाथों को साबुन या गर्म पानी से धोएं। खांसते और छींकते वक्त नाक और मूंह को किसी टिश्यू पेपर या रुमाल से ढकें, क्योंकि ये वायरस छींक से भी फैलता है।
3/08/2020 06:09:00 AM

डॉक्टरों की चेतावनी, तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो 'कैंसर की सुनामी' की गिरफ्त में होगा भारत

वॉशिंगटन। कैंसर मरीजों के सफल इलाज और इस घातक बीमारी के बारे में अपने बेहद अहम रिसर्चों की वजह से दुनिया भर में मशहूर भारतीय मूल के 2 अमेरिकी डॉक्टरों ने भारत को लेकर चेतावनी जारी की है। डॉक्टर दत्तात्रेयुडू नोरी और डॉक्टर रेखा भंडारी ने चेताया है कि अगर तत्काल और पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए तो भारत बहुत जल्द 'कैंसर की सुनामी' की गिरफ्त में होगा।
कई बड़े नेताओं का सफल इलाज करने वाले डॉक्टर की चेतावनी:-
जाने-माने कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दत्तात्रेयुडू नोरी ने इस घातक बीमारी से पीड़ित कई बड़े भारतीय नेताओं का इलाज कर चुके हैं, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत नीलम संजीव रेड्डी भी शामिल हैं। डॉक्टर रेखा भंडारी दर्द निवारक दवाओं के क्षेत्र में अपने रिसर्च के लिए जानी जाती हैं। दोनों ने बताया कि हेल्थ एजुकेशन और रोग की शुरुआती चरण में ही पहचानने की जबरदस्त कोशिशों के जरिए ही भारत को 'कैंसर की सुनामी' की गिरफ्त में जाने से रोका जा सकता है।
भारत में हर दिन 1,300 लोगों की कैंसर से हो रही मौत:-
भारतीय मूल के दोनों डॉक्टरों ने चेताया कि तत्काल पर्याप्त और उचित कदम नहीं उठाए गए तो उनके जन्मस्थान वाला देश इस भीषण बीमारी की सुनामी की चपेट में आ सकता है। नोरी ने पीटीआई को बताया, 'भारत में हर दिन कैंसर से 1,300 लोगों की मौत हो रही है। भारत में हर साल कैंसर के करीब 12 लाख नए केस सामने आ रहे हैं। यह अर्ली डिटेक्शन के लोवर रेट और खराब इलाज की तरफ इशारा करता है।'
डॉक्टर दत्तात्रेयुडू नोरी:-
न्यूयॉर्क बेस्ड भारतीय अमेरिकी डॉक्टर नोरी ने कई शीर्ष भारतीय नेताओं का सफलतापूर्वक इलाज किया है लेकिन वह खुद को लो-प्रोफाइल रखना पसंद करते हैं। वह मीडिया से बातचीत से बचते हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर से भारत के लोगों को सामाजिक और आर्थिक तौर पर गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है। यह बीमारी पीड़ित परिवार को गरीबी के दलदल फंसा देती है और सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती है।
2030 तक भारत में कैंसर के सालाना 17 लाख नए केस की भविष्यवाणी:-
इंटरनैशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर की भविष्यवाणी है कि 2030 तक भारत में हर साल कैंसर के करीब 17 लाख नए केस सामने आएंगे। नोरी ने कहा, 'अगर हम जरूरी कदम नहीं उठाएंगे तो कैंसर सुनामी जैसी हो जाएगी।' महंगे इलाज की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में अगर किसी परिवार के किसी सदस्य में कैंसर की पुष्टि होती है तो अक्सर पूरा परिवार ही गरीबी रेखा के नीचे चला जाता है। उन्होंने इसे भारत में पब्लिक हेल्थ केयर की एक बड़ी चुनौती करार दिया है।
आयुष्मान भारत और नैशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम से प्रभावित हैं दोनों:-
2015 में पद्म श्री से सम्मानित हुए डॉक्टर नोरी पीएम मोदी के 'आयुष्मान भारत प्रॉजेक्ट' और नैशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम बनाने के फैसले से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने इसे सही दिशा में महत्वपूर्ण कदम करार दिया। नोरी और भंडारी दोनों ने कहा कि कैंसर के खतरे से निपटने के लिए अर्ली डिटेक्शन और हेल्थ एजुकेशन का तेजी से प्रसार बहुत जरूरी है। दोनों ही डॉक्टरों को अमेरिका में प्रवासियों को दिए जाने वाले सबसे बड़े नागरिक सम्मान एलिस आइलैंड मेडल ऑफ ऑनर से नवाजा जा चुका है। यह प्रतिष्ठित सम्मान हर साल उन लोगों को दिया जाता है है जो देश सेवा के क्षेत्र में ऐसा काम किया हो जो लोगों को जश्न मनाने या फक्र करने का मौका देता हो। इस सम्मान को पाने वालों में डोनाल्ड ट्रंप समेत कई अमेरिकी राष्ट्रपति और नोबेल पुरस्कार विजेता भी शामिल हैं।
दोनों विशेषज्ञों ने सरकार को दिए हैं कई अहम सुझाव:-
दोनों ही डॉक्टर भारत में कैंसर की चुनौती से निपटने की दिशा में काम कर रहे हैं। डॉक्टर नोरी इसके लिए भारत सरकार से कई सिफारिशें की हैं। दूसरी तरफ डॉक्टर भंडारी इसके शुरुआती चरण में ही पहचान के लिए ब्लॉक चेन, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसे नए आईटी टूल्स पर काम कर रही हैं। भारत में कैंसर के सबसे ज्यादा मामलों के पीछे मुख्य वजह तंबाकू है। उन्होंने कहा, 'मैं नैशनल कैंसर रजिस्ट्री बनाने और आयुष्मान भारत प्रोग्राम से बहुत खुश हूं।' दोनों डॉक्टरों ने सरकार को कैंसर हॉटलाइन बनाने, रिजनल कैंसर सेंटर और ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर जैसे तेजी से बढ़ रहे रोगों के लिए टास्क फोर्स बनाने जैसे कई सुझाव दिए हैं।

Tuesday, February 25, 2020

2/25/2020 10:15:00 AM

भोजन की शुरुआत में तीखा तथा अंत में मीठा खाने के 4 फायदे

सेहत डेस्क। प्राचीनकाल से ही लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हिन्दू शास्त्र और आयुरर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। मीठा खाने के संबंध में तो आपको पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे कि खाने के पहले तीखा या कहें कि चरका क्यों खाते हैं। आओ जाते हैं कारण और फायदे।
तीखा
1.खाने के पहले तीखा इसलिए खाते हैं क्योंकि इससे आपका पाचन तंत्र सक्रिय हो जाए। 
2.शोधकर्ताओं के अनुसार जब आप चरका खाते हैं, तो आपका शरीर पाचक रस और एसिड जारी करता है, जो पाचन प्रक्रिया को बढ़ाते हैं। इससे यह तय हो जाता है कि आपकी पाचन शक्ति सही तरह से कार्य कर रही है।
3.आयुर्वेद के अनुसार शुरुआत में तीखा भोजन करने के बाद पेट में पाचन तत्व तथा अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। जिससे पाचन तंत्र तेज जाता है।
4.भोजन की शुरुआत में तीखा खाने से जठराग्नि बढ़ जाती है जिसके चलते अच्‍छी भूख लगती है।  
मीठा
1.मीठी चीजों में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो पाचन प्रक्रिया को धीमी कर देता है इसलिए खाना खाने के बाद मीठा खाने से पाचन प्रक्रिया दुरुस्त रहती है।
2 मीठा खाने से सेरोटोनिन नाम के हॉर्मोन का स्तर बढ़ता है। ये न्यूरोट्रांसमीटर का काम करता है जिससे मीठा खाने के बाद आपको खुशी का अनुभव होता है। दरअसल, मीठे का सेवन एमिनो एसिड ट्रिप्टोफैन के अवशोषण को बढ़ाता है। ट्रिप्टोफैन को सेरोटोनिन लेवल बढ़ाने के लिए जाना जाता है। सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है, जो खुशी की भावना से जुड़ा है यानि मीठा खाने से आपको खुशी होती है। 
3. यदि भारी खाना खाने के बाद आपको हाइपोग्लाईसीमिया की स्थिति से गुजरना पड़ता है तो इस स्थिति में ब्लड प्रेशर काफी कम हो जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए खाने के बाद मीठा खाने की सलाह दी जाती है।
4.आयुर्वेद के अनुसार खाने के बाद मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है जिससे पेट में जलन या एसिडिटी नहीं होती है।
सावधानी
मीठे में आपको सफेद शक्कर नहीं खाना चाहिए यह नुकसानदायक है। इससे तैयार चीजों का भी सेवन नहीं करना चाहिए। इससे मोटापे और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा हो सकता है। इसके बजाय आपको आर्गेनिक गुड़ खाना चाहिए या इससे बनी चीजों का ही सेवन करना चाहिए। आप चाहें तो ब्राउन शुगर या नारियल की शुगर का उपयोग कर सकते हैं।
2/25/2020 10:13:00 AM

शोध / अच्छी याददाश्त और स्वस्थ दिल चाहिए तो जी भरकर खाएं ये फल और सब्जियां

सिडनी. अगर आप हेल्दी हार्ट और अच्छी मेमोरी चाहते हैं, तो जी भर कर फल और सब्जियां खाएं। एक हालिया शोध में यह पता चला है कि फलों और सब्जियों का संबंध कम होती याददाश्त और इससे जुड़ी दिल की बीमारियों का खतरा कम करने से है।
ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं के इस शोध में एक लाख 39 हजार लोगों को शामिल किया था और रिसर्च में कुछ खास फूड ग्रुप्स, मेमोरी लॉस और इससे जुड़ी बीमारियों जैसे दिल की बीमारी और डायबिटीज के बीच गहरा संबंध पाया। अध्ययन में यह पता चला कि प्रोटीन से भरपूर चीजें खाने से याददाश्त तेज होती है। इस अध्ययन के नतीजे इंटरनेशनल जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में छपे हैं।
जंक फूड को कहें बाय और हेल्दी फूड को करें वेलकम:-
विशेषज्ञों ने बताया कि हमारे अध्ययन से हम इस नतीजे पर तो पहुंचे हैं कि उम्र के मुताबिक, हेल्दी खाने को लेकर लोगों को सजग होना चाहिए। मेमोरी लॉस डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में से एक है और डिमेंशिया जैसी बीमारी ऑस्ट्रेलियाई लोगों की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। मालूम हो कि साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा महिलाओं की मौतें डिमेंशिया के कारण ही हुई थीं। 
हाल के आंकड़ों को देखा जाए तो अभी भी देश में चार लाख 59 हजार लोग इससे पीड़ित हैं। हमने अध्ययन में जाना कि फल और सब्जियां कम मात्रा में खाने वाले और डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के औसतन इससे जुड़ी दो से आठ अन्य बीमारियों से पीड़ित होने की संभावना रहती है। इनमें दिल से जुड़ी बीमारियां, हाइपरटेंशन और डायबिटीज शामिल हैं। 
ऐसे में हम लोगों से यही कहना चाहेंगे कि उन्हें अपना लाइफस्टाइल बदलने की जरूरत है ताकि याददाश्त को लेकर तो उनके साथ कोई दिक्कत न आए। अपनी जिंदगी से जंक फूड निकालकर हेल्दी फूड को अपनाकर ही इन बीमारियों के खतरे से बचा जा सकता है।