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Tuesday, December 31, 2019

12/31/2019 06:47:00 PM

कमलनाथ के मंत्री ने कार्यकर्ता को लातों से पीटा फिर घूसा मारकर कमरे से किया बाहर, वीडियो वायरल

रीवा. मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा और खेल मंत्री जीतू पटवारी अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता को लात मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं, उसके बाद वो कार्यकर्ताओं को कमरे से बाहर धक्के मार कर बाहर निकालते हुए दिखाई दे रहे हैं। जीतू पटवारी का ये वीडियो रीवा जिले का है। बता दें कि मंत्री जीतू पटवारी सोमवार को एक दिवसीय प्रवास में रीवा पहुंचे थे यहां उन्होंने कार्यकर्ता की पिटाई की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ हंगामा:-
जीतू पटवारी सोमवार को रीवा में मीडिया को संबोधित कर रहे थे उसी दौरान कार्यकर्ताओं की गुटबाजी खुलकर दिखी। इससे नाराज मंत्री जीतू पटवारी ने पहले बाहर करने लगे फिर उसके पैर में लात मारी और फिर कार्यकर्ता को घूसा मारते हुए कमरे से बाहर कर दिया। कुछ कार्यकर्ताओं ने इसका वीडियो बना लिया और फिर ये वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।
देर से पहुंचे थे पटवारी:-
दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए मंत्री जीतू पटवारी देर के पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि अब इस कमरे का दरवाजा बंद कर दो जब तक प्रेस कॉन्फ्रेंस चलेगी कोई भी अंदर बाहर नहीं जाएगा। इस दौरान कुछ लोग बाहर से दरवाजा पीटने लगे और जब दरवाजा खुला तो मऊगंज के पूर्व जनपद अध्यक्ष बृजेन्द्र शुक्ला गेट पर खड़े थे और टीआरएस कॉलेज के जनभागीदार समिति के अध्यक्ष दिवाकर द्विवेदी से भिड़ गए। यह देखकर मंत्री ने बृजेन्द्र को बुलाकर बैठा लिया लेकिन हंगामा शांत नहीं हुआ। इसके बाद मंत्री जीतू पटवारी खुद उठे और सभी को बाहर जाने को कहा।
जिसके बाद मंत्री जीतू पटवारी ने कार्यकर्ता को लात मारी और फिर घूसा मारते हुए उसे कमरे से बाहर कर दिया। इस दौरान मंत्री ने बृजेन्द्र शुक्ला से पूछा आप कांग्रेस पार्टी के हो क्या?

Tuesday, December 24, 2019

12/24/2019 09:58:00 AM

तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, राज्य निर्वाचन आयुक्त ने की घोषणा, यह है पूरा चुनाव कार्यक्रम

रायपुर (छत्तीसगढ़)। नगरीय निकाय चुनावों के परिणाम आने के ठीक पहले छत्तीसगढ़ में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। इसी के साथ राज्य में आचार संहिता लागू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह ने सोमवार को चुनावी कार्यक्रमों की घोषणा की। राज्य में तीन चरणों में मतदान होंगे। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत राज्य के 27 जिला पंचायतों के लिए 400 सदस्यों, 146 जनपद पंचायतों के लिए 2973 सदस्यों, 11664 संरपंचों, 160725 पचों के चुनाव के लिए 14468763 ग्रामीण मतदाता वोट डालेंगे।
घोषित चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 30 दिसंबर को नामांकन दाखिल किया जाएगा। मतदान तीन चरणों में होगा। पहला चरण 28 जनवरी, दूसरा चरण 31 जनवरी और तीसरा चरण 3 फरवरी को होगा। सामान्य क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से तीन बजे तक और संवेदनशील क्षेत्रों में सुबह 7 से 2 बजे तक मतदान होगा।
पूरे कार्यक्रम के मुताबिक 30 दिसंबर को ही मतदान केंद्रों की सूची और आरक्षण की स्थिति का प्रकाशन होगा। वहीं 6 जनवरी दोपहर 3 बजे तक नामांकन दाखिल होंगे, जबकि 7 जनवरी को संवीक्षा होगी। 9 जनवरी दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 9 जनवरी को ही सभी अभ्यर्थियों को चुनाव चिन्ह बांटे जाएंगे।
इस चुनाव में एक ग्रामीण मतदाता पंच, सरपंच, जनपद या जिला पंचायत सदस्य के लिए अलग-अलग मतदान कर सकेंगे। पूरे चुनावी कार्यक्रम के लिए राज्य में एक लाख 60 हजार कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात किया गया है।

राज्य में ऐसे होगा तीन चरणों में पंचायत चुनाव:-

दूसरे चरण में कुछ जिलों में मतदान नहीं होगा। बाकी दोनों चरणों पहले और तीसरे में सभी 27 जिलों में चुनाव होंगे।

जिला-प्रथम चरण- द्वितीय चरण- तृतीय चरण

बिलासपुर-बिल्हा, मस्तुरी- मरवाही, पेंड्रारोड, पेंड्रा - कोटा तखतपुर

मुंगेली- मुंगेली- पथरिया -लोरमी

जांजगीर चांपा- डभरा, जैजेपुर, नवागढ़ - बलौदा, बम्हनीडीह, पामगढ़ - सक्ती, मालखरौदा, अकलतरा

कोरबा- कोरबा, करतला - पोड़ी उपरोड़ा - कटघोरा, पाली तानाखार

रायगढ़- रायगढ़, घरघोड़ा, र्मजयगढ़, तमनार- सारंगढ़, बरमकेला- लैलूंगा, पुसौर, खरसिया

सूरजपुर- सूरजपुर, भैयाथान- रामानुजनगर, प्रेमनगर- प्रतापपुर, ओड़गी

बलरामपुर-कुसमी, राजपुर, शंकरगढ़- बलरामपुर- रामचंद्रपुर, वाड्रफनगर

सरगुजा-अंबिकापुर, लखनपुर, उदयपुर-सीतापुर, मैनपाट- लुंड्रा, बतौली

कोरिया- बैकुंठपुर, सोनहत-भरतपुर- मनेंद्रगढ़, खड़गवां

जशपुर- मनोरा, बगीचा, जशपुर- कुनकुरी, दुलदुला- फरसबहाल, कांसाबेल, पत्थलगांव

रायपुर- आरंग, अभनपुर- 00 - धरसींवा, तिल्दा

बालौदाबाजार- कसडोल, बिलाईगढ़- 00 - सिमगा, भाटापारा, बलौदाबाजार, पलारी

गरियाबंद- गरियाबंद, मैनपुर- छुरा- फिंगेश्वर, देवभोग

महासमुंद- पिथौरा, बसना, सरायपाली- 00 - महासमुंद, बागबहरा

धमतरी-धमतरी, कुस्र्द- मगरलोड- नगरी

बेमेतरा- बेमेतरा, नवागढ़- 00 - साजा, बेरला

दुर्ग- दुर्ग-पाटन-धमधा

बालोद- डौंडीलोहारा, डौंडी- गुंडरदेही, गुस्र्र- बालोद

राजनांदगांव- राजनांदगांव, खैरागढ़, छुईखदान- डोंगरगढ़, छुरिया, डोंगरगांव- अंबागढ़ चौकी, मोहला, मानपुर

कबीरधाम- कवर्धा, सहसपुर लोहारा- 00 - बोड़ला, पंडरिया

कोंडागांव- कोंडागांव- फरसगांव, माकड़ी- केशकाल, बड़े राजपुर

बस्तर- जगदलपुर, दरभा- बस्तर, लोहांडीगुड़ा-बस्तानार, बकावंड, तोकापाल

नारायणपुर- नारायणपुर-00 - ओरछा

कांकेर- कांकेर, चारामा, नरहरपुर- भानुप्रतापपुर, दुर्गूकोंदल- अंतागढ़, कोयलीबेड़ा

दंतेवाड़ा- गीदम, दंतेवाड़ा- कटेकल्याण- कुंआकोंडा

सुकमा-सुकमा-छिंदगढ़- कोंटा

बीजापुर- बीजापुर- भोपालपट्टनम, उसूर- भैरमगढ़

Sunday, November 17, 2019

11/17/2019 05:36:00 PM

ऑफ द रिकॉर्ड:- भाजपा के जाल में फंस रही है शिवसेना...?

नेशनल डेस्क। क्या शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा के बिछाए जाल में फंसती जा रही है? भाजपा ने शिवसेना के प्रति अपना रुख उस समय कड़ा कर लिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी नेताओं से कहा कि अब हमें महाराष्ट्र में किसी बैसाखी के सहारे नहीं चलना चाहिए। मोदी ने यह टिप्पणी अमित शाह, जे.पी. नड्डा, धर्मेंद्र यादव और अन्य पार्टी नेताओं के साथ बैठक के दौरान की। भाजपा का मानना है कि शिवसेना का कांग्रेस और राकांपा के साथ गठबंधन अप्राकृतिक और अपवित्र है जोकि सिर्फ भाजपा को महाराष्ट्र में और मजबूत होने में मदद करेगा। 
यह स्पष्ट है कि अमित शाह ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के मामले में बातचीत करने से मना कर दिया और यह काम देवेंद्र फडऩवीस के हवाले कर दिया। कहा जा रहा है कि मोदी की नसीहत के बाद अमित शाह ने मातोश्री न जाने का फैसला किया। शाह दिल्ली में ही रहे और उन्होंने शिवसेना के पास राकांपा से बातचीत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा। दूसरे शब्दों में कहें तो अमित शाह ने शिवसेना के लिए 2 ही रास्ते छोड़े - या तो वह भाजपा की शर्तें मानती या फिर उसे छोड़कर चली जाती। 
भाजपा के अनुमान के मुताबिक इससे शिवसेना सत्ता की लालची और लोकप्रिय नेता देवेंद्र फडऩवीस को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री न बनने देने वाली पार्टी के तौर पर देखी जाती। जनादेश भाजपा-शिवसेना की गठबंधन सरकार के लिए था। साथ ही जनता से यह भी नहीं कहा गया था कि ठाकरे सीनियर या फिर जूनियर को अढ़ाई वर्ष के लिए मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। कांग्रेस के लिए भी यह नुक्सानदायक रहेगा क्योंकि उसकी और शिवसेना की विचारधारा अलग है।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस विधायक केवल बाहर से ही समर्थन करना नहीं चाहते बल्कि वे सरकार में शामिल भी होना चाहते हैं। ऐसा ही कुछ कर्नाटक में भी देखने को मिला था जब कांग्रेस और जनता दल (एस) सरकार बनाने में सफल रही थीं और इसे भाजपा के खिलाफ बड़ी जीत माना जा रहा था। इसे अमित शाह की हार के तौर पर देखा जा रहा था लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कर्नाटक में बड़ी जीत हासिल की। उधर कांग्रेस के विधायकों ने पाला बदलकर भाजपा को राज्य में फिर सत्ता में ला दिया। 

Saturday, November 16, 2019

11/16/2019 07:53:00 AM

MP के 93 विधायकों पर चल रहे क्रिमिनल केस, कई मंत्री भी शामिल, जा सकती है कुर्सी देखे नामों की सूची

भोपाल/(मध्यप्रदेश)। हाल ही भोपाल स्थित स्पेशल कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी के विधायक प्रह्लाद लोधी की सदस्यता खत्म हो गई थी। हालांकि जबलपुर हाईकोर्ट ने अभी स्टे लगा दिया है। लेकिन प्रह्लाद लोधी की तरह ही मध्यप्रदेश में कई ऐसे मंत्री और विधायक हैं जिनपर क्रिमिनल केस चल रहे हैं। इन लोगों ने अपने ऊपर चल रहे क्रिमिनल केसों का जिक्र चुनावी हलफनामे में किया है।
ऐसे में कोर्ट में चल रहे इन मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला अगर आता है तो मध्यप्रदेश के और भी कई विधायक और मंत्रियों की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। एडीआर की रिपोर्ट के अऩुसार मध्यप्रदेश विधानसभा में 93 ऐसे विधायक हैं, जिनके ऊपर क्रिमिनल केस चल रहे हैं। वहीं, 93 में से 47 ऐसे हैं, जिन पर गंभीर केस चल रहे हैं। आरोपी विधायक दोनों ही दल के हैं।
गृह मंत्री पर भी है चार्ज:-
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं पर भी इस तरह के आरोप हैं। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन ने भी चुनावी हलफनामे में अपने ऊपर क्रिमिनल केस होने की जानकारी दी है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री जीतू पटवारी, लखन घनघोरिया, हर्ष यादव, इमरती देवी, प्रद्युमन सिंह तोमर, वित्त मंत्री तरुण भनोत, तुलसी सिलावट, पीसी शर्मा, ब्रजेंद्र सिंह राठौर और स्पीकर एनपी प्रजापति के खिलाफ भी क्रिमिनल केस है।
इन विधायकों पर भी हैं क्रिमिनल केस:-
इसके साथ ही पूर्व मंत्री और विधायक गौरीशंकर बिसेन, कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा, भोपाल से विधायक आरिफ मसूद और कुणाल चौधरी पर भी क्रिमिनल केस है। इसके साथ ही इंदौर से बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय पर भी आपराधिक मुकदमा दर्ज है। इस सूची में बीजेपी के विधायक मोहन यादव, कमल पटेल, जालम सिंह पटेल, पारस जैन, रामेश्वर शर्मा, सुरेंद्र पटवा, संजय पाठक और राजेंद्र शुक्ल समेत कई और विधायकों पर केस दर्ज हैं।
सुरेंद्र पटवा पर है सबसे ज्यादा केस:-
वहीं, पूर्व मंत्री और बीजेपी के विधायक सुरेंद्र पटवा पर सबसे ज्यादा 26 क्रिमिनल केस है। इसके साथ ही कमलनाथ की सरकार में मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर पर 20 और मंत्री पीसी शर्मा 14 क्रिमिनल केस दर्ज हैं। ऐसे में सभी मामले अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
नेताओं ने दिएं ये तर्क:-
मध्यप्रदेश में प्रह्लाद सिंह लोधी की सदस्यता खत्म होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने है। बीजेपी आरोप लगा है कि कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के साथ मिलकर लोधी की सदस्यता खत्म करवाई है। जबकि अपने ऊपर दर्ज मुकदमों में पर बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि जनता की लड़ाई लड़ते हुए हुए हमें कानूनी केसा का सामना करना पड़ता है।

Friday, November 15, 2019

11/15/2019 02:55:00 PM

महाराष्ट्र में इस फॉर्मूले पर बनेगी गठबंधन सरकार, शिवसेना से होगा मुख्यमंत्री, डील फाइनल

मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में राष्ट्रपति शासन (President's Rule) के बीच सरकार बनाने के का रास्ता साफ होता दिख रहा है. सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (Shiv Sena), एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (Congress) के बीच डील तय हो गई है. तीनों दलों के बीच जो समझौता हुआ है, उसके मुताबिक महाराष्ट्र में पांच साल तक शिवसेना का ही मुख्यमंत्री रहेगा. वहीं, कांग्रेस और एनसीपी के खाते में एक-एक उपमुख्यमंत्री का पद आएगा.
महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच बैठकों का दौर जारी है. खबर है कि तीनों दलों के बीच कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) को लेकर सहमति बन गई है. सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को 14 और कांग्रेस को 12 मंत्रीपद दिए जाएंगे. खुद शिवसेना के खाते में 14 मंत्री पद आएंगे.
गठबंधन पर क्या बोले एनसीपी नेता नवाब मलिक:- 
न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए NCP नेता नवाब मलिक ने कहा, ‘एक सवाल बार-बार पूछा जा रहा है कि शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा क्या? मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना में विवाद हुआ था. ऐसे में हम मुख्यमंत्री पद की दावेदारी नहीं करने जा रहे हैं. निश्चित रूप से मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा.
नवाब मलिक ने कहा,'शिवसेना को अपमानित किया गया है, हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उनका स्वाभिमान और सम्मान बनाए रखना, ये हमारी जिम्मेदारी है और इसपर हमारी किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है.
संजय राउत और उद्धव ठाकरे:-
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच बैठकों का दौर जारी है. गुरुवार को हुई इस बैठक में तीनों ही पार्टियों के दिग्गज नेता शामिल हुए. जानकारी के मुताबिक शिवसेना की तरफ से एकनाथ शिंदे , कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण, एनसीपी नेता छगन भुजबल शामिल हुए. इस बैठक के बाद शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बताया कि तीनों पार्टियों के बीच कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर चर्चा हुई. इसका एक ड्राफ्ट भी तैयार किया गया है.
अब सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि इन तीनों पार्टियों के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर सहमति बन गई है. अब तक जिन मुद्दों पर सहमति की जानकारी मिली है उनमें किसान कर्जमाफी, फसल बीमा योजना की समीक्षा, रोजगार और छत्रपति शिवाजी महाराज और बीआर अंबेडकर स्मारक शामिल हैं.
महाराष्ट्र में लगा है राष्ट्रपति शासन:-
21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी और शिवसेना ने एक साथ चुनाव लड़ा था, जिसमें बीजेपी ने 105 सीटें जीती थीं. वहीं, शिवसेना ने राज्य की 56 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बाद मुख्यमंत्री के पद को लेकर पैदा हुए गतिरोध के चलते दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे से किनारा कर लिया था. बीजेपी ने घोषणा कर दी कि वह राज्य में अकेले सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में गवर्नर ने राज्य की दूसरी बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता दिया. लेकिन, शिवसेना एनसीपी के साथ दिए गए समय में समर्थन पेश नहीं कर सकी, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

Wednesday, November 13, 2019

11/13/2019 04:57:00 PM

दिग्विजय ने शिवसेना को लेकर कही यह बड़ी बात, गवर्नर की प्रकिया सही, मोदी-शाह के कारण लगा राष्ट्रपति शासन

भोपाल/लखनऊ. महाराष्ट्र में जारी सियासी धटनाक्रम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने केन्द्र सरकार पर हमला बोला है। मंगलवार को राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पSहुंचे थे। यहां उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा- महाराष्ट्र के राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दवाब में आकर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है। वहीं, उन्होंने शिवसेना को लेकर भी बड़ा बयान दिया है।
राज्यपाल ने अपनाई थी सही प्रक्रिया:-
दिग्विजय सिंह ने कहा- महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सरकार के गठन के लिए सही प्रक्रिया अपनाई थी। उन्होंने परिणाम आने के बाद पहले इंतजार किया फिर उन्होंने प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। उसके बाद उन्होंने प्रदेश की दूसरी और फिर तीसरी बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन जब राज्यपाल ने राकांपा को मंगलवार रात 8.30 बजे तक का वक्त दिया है तो फिर उन्होंने समय पूरा होने से पहले ही राष्टपति शासन की सिफारिश क्यों कर दी। निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री और अमित शाह के दबाव के कारण उन्होंने यह फैसला लिया है और कांग्रेस को इस फैसले पर आपत्ति है। हालांकि पार्टियों को कितना समय देना है और कितना नहीं इस मामले में दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है कि वह किस दल का कितना समय देते हैं।

शिवसेना बदल रही है:-
वहीं, जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि शिवसेना की विचारधारा कांग्रेस और राकांपा से अलग है तो फिर कांग्रेस उसे समर्थन क्यों दे रही है। इस सवाल के जबाव में दिग्विजय सिंह ने कहा- बिल्कुल शिवसेना की विचारधारा कांग्रेस और राकांपा से अलग है। लेकिन हाल के दिनों में शिवसेना में बदलाव हुआ है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोच समझ कर समर्थन देने का निर्णय लिया है। दिग्विजय सिंह ने कहा- शिवसेना के साथ भाजपा ने वादाखिलाफी की है। 50-50 के फार्मूले पर गठबंधन तय हुआ था और दोनों दल साथ लड़े। महाराष्ट्र में इन्हें जीत भी मिली लेकिन भाजपा अपने वादे से मुकर गई। शिवसेना के नेता लगातार ढाई-ढाई साल के सीएम होने की बात कर रहे हैं जबकि अमित शाह खामोश हैं इसका मतलब है कि दोनों के बीच फार्मूला तय हुआ था।
11/13/2019 07:12:00 AM

राष्ट्रपति शासन के बावजूद महाराष्ट्र में ऐसे बन सकती है सरकार

महाराष्ट्र में सरकार बनाने की सारी कवायद नाकाम होने के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया दिया गया है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पहले सबसे बड़ी पार्टी भाजपा, फिर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना और फिर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी राकांपा को सरकार बनाने का न्योता दिया, लेकिन तीनों नाकाम रहे। भाजपा ने अपनी तरफ से इन्कार कर दिया था, वहीं शिवसेना राज्यपाल से मिली जरूरी, लेकिन राकांपा और कांग्रेस के समर्थन वाले पत्र प्रस्तुत नहीं कर सही, वहीं राकांपा को मंगलवार रात 8.30 बजे का समय दिया था, लेकिन इससे पहले ही केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति शासन लगाने को मंजूदी दे दी। सवाल यही है कि अब महाराष्ट्र में आगे क्या होगा?
संविधान विशेषज्ञ बताते हैं कि सभी दलों के बीच सरकार बनाने का विकल्प अभी भी मौजूद है। यदि कोई गठबंधन राज्यपाल से मिलता और समर्थन की चिट्ठी पेश करता है तो उसके नेता को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका मिलेगा। यही कारण है कि राकांपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है। वहीं. शिवसेना ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। तब तक विधानसभा निलंबित रहेगी और पूरा सरकारी कामकाज राजभवन से होगा।
...तो महाराष्ट्र में फिर होंगे चुनाव
यदि कोई दल सरकार बनाने का दावा लेकर आगे नहीं आता है तो प्रदेश में फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं।बता दें, महाराष्ट्र में बीती 21 अक्टूबर को मतदान हुआ था और 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित हुए थे। कुल 288 विधानसभा सीटों में से भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिली थीं, जबकि उसके साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की वाली शिवसेना को 56 सीट मिली थीं। शरद पवार की पार्टी राकांपा 54 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही थी, वहीं कांग्रेस को 44 सीटों से संतोष करना पड़ा था।

Tuesday, November 12, 2019

11/12/2019 08:45:00 AM

NCP के आगे झुकी शिवसेना! महाराष्ट्र में पलट गया सारा समीकरण

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सियासी उबाल चरम पर है। सरकार बनाने को लेकर राज्य में तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। चर्चा यह है कि अब शिवसेना-NCP के साथ मिलकर यहां सरकार बनाएगी। वहीं, कांग्रेस बाहर से इन दोनों को समर्थन कर सकती है। लेकिन, इन सबके बीच NCP ने शिवसेना को वो करने पर मजबूर कर दिया जो वह करना चाहती थी।
दरअसल, शुरुआत में NCP का कहना था कि महाराष्ट्र के जनता ने शिवसेना और बीजेपी बहुमत दिया है। इसलिए, वे ही सरकार बनाएं। जबकि, NCP खुद को विपक्ष में बैठने की बात कह रही थी। हालांकि, बाद में एनसीपी ने कहा कि अगर शिवसेना उनके साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती है तो उसे बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ना होगा। सोमवार को वहीं हुआ, शिवसेना का एकमात्र मोदी सरकार में शामिल मंत्री अरविंद सांवत ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा कि यही है गठबंधन टूटने का सबूत।
गौरतलब है कि शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन करीब 30 साल पुराना था। दोनों का गठबंधन 1989 में हुआ था। ये वो वक्त था जब शिवसेना की कमान उसके संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के हाथों में थी, जो हिंदुत्व का बड़ा चेहरा थे। बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन भी हिंदुत्व के विचार पर ही आगे बढ़ा। बाला साहेब ठाकरे के जिंदा रहने तक दोनों पार्टियां का गठबंधन बदस्तूर चलता रहा लेकिन 2012 में उनके निधन के बाद जब 2014 में विधानसभा चुनाव हुए तो शिवसेना और बीजेपी अलग हो गईं। दोनों पार्टियों ने अपने-अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ा। हालांकि, बाद में शिवसेना देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गई। वहीं, 2019 के चुनाव में दोनों साथ-साथ लड़े। लेकिन, सरकार गठन को लेकर दोनों के बीच सहमति नहीं बना पाई और अब दोनों के रास्ते जुदा हो गए हैं। शिवसेना का कहना है कि अब वह एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाएगी बस इंतजार है कांग्रेस के फैसले की।

Friday, November 8, 2019

11/08/2019 07:36:00 AM

कमलनाथ सरकार को घेरने की तैयारी, भाजपा ने अपने विधायकों को किया अलर्ट (ALERT)

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रहलाद लोधी को विधानसभा से सदस्यता खत्म करने के मामले के बाद विपक्षी दल भाजपा अलर्ट हो गई है। उसने अपने विधायकों को पत्र लिखकर अपने ऊपर चल रहे आपराधिक प्रकरणों की जानकारी मांगी है। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने एक पत्र अपने सभी विधायकों को लिखा है। गोपाल भार्गव ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रदेश सरकार के 11 माह के कार्यकाल में विभिन्न स्तर पर भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गए हैं, किसान परेशान हैं, अतिवृष्टि और बाढ़ से कई जिलों में किसानों की खरीफ की फसलें चौपट हो चुकी हैं, लेकिन किसानों को अब तक सरकार की ओर से मुआवजा राशि नुकसान के अनुपात में नहीं मिल पाई है।
और क्या लिखा भार्गव ने.....
-यदि आपके ऊपर भोपाल स्थित विशेष न्यायालय में कोई आपराधिक या अन्य प्रकरण विचाराधीन या लंबित हैं तो उसकी अपडेट स्थिति, यदि किसी प्रकरण में आप पर आपराधिक धाराएं लगी हों तो उसकी जानकारी, एफआईआर की फोटोकॉपी समेत आपके प्रकरण की पैरवी करने वाले वकील का नाम और मोबाइल नंबर संबंधि जरूरी दस्तावेज की फोटोकाफी सात दिनों में भिजवा दें।
-विभिन्न विभागों और अपने क्षेत्र से जुड़ी जनसमस्याओं को लेकर विधानसभा में तारांकित एवं अतारांकित प्रशनों को विधानसभा सचिवालय भेजने की तैयारी रखें, ताकि विधानसभा सत्र की अधूसूचना जारी होते ही प्रश्न लगाए जा सकें।
-कानून व्यवस्था से संबंधित कोई भी घटना हुई हो तो साथ ही राजनीतिक द्वेष अथवा भेदभाव पूर्ण कार्रवाई की गई हो तो उसकी भी जानकारी दें।
-स्थानीय प्रशासन के अधिकारी/कर्मचारियों औ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की ओर से भीजेपी कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किए जाने अथवा उन पर झूठे प्रकरण बनाए जाने संबंधी जानकारी भी दें।
-शिक्षा, स्वास्थ्य, अवैध उत्खनन, किसानों के ऋण माफी, किसान आत्महत्या, अतिवृष्टि से बर्बाद हुई फसलों की मुआवजा राशि किसानों को न मिलना, बाढ़, पीड़ितों को राहत राशि न मिलने की जानकारी तथा अन्य विषयों से संबंधित जानकारी मेरे निवास पर भेज दें।

Thursday, November 7, 2019

11/07/2019 05:35:00 PM

फिर गरमा सकती है एमपी की सियासत, क्या भाजपा को झटका देने की तैयारी में है ये विधायक!

भोपाल. मध्यप्रदेश में इन दिनों भाजपा की मुश्किल में है। कमल नाथ के सियासी दांव से उसे झाबुआ उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा तो एक विधायक की सदस्यता खत्म हो गई और एक कमलनाथ सरकार के कामकाज से खुश होने का दावा कर कमल नाथ को समर्थन देने की बात कह चुका है। लेकिन भाजपा की अब दूसरी चिंता है एक औऱ बागी विधायक कि जो हाल ही में पार्टी में वापस आया है। सतना जिले की मैहर विधानसभा सीट से विधायक नारायण त्रिपाठी एक बार फिर से सुर्खियों में हैं।
मंत्री से की मुलाकात:-
नारायण त्रिपाठी बुधवार को मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री जीतू पटवारी से मुलाकात करने पहुंचे। यहां दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में लंबी चर्चा हुई तो मीडिया के सामने आते ही मंत्री जीतू पटवारी ने विधायक नारायण त्रिपाठी को गले लगाया और उन्हें उनकी गाड़ी तक छोड़ने आए। हालांकि इस मुलाकात को शिष्टाचार मुलाकात कहा गया। लेकिन नारायण त्रिपाठी की मुलाकात को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। जीतू पटवारी से मुलाकात के बाद नरायाण त्रिपाठी ने कहा- जीतू पटवारी मेरे पुराने मित्र हैं। नारायण त्रिपाठी ने कहा- मेरे विधानसभा क्षेत्र की कुछ मांगें उनके विभाग से संबंधित थीं, जिसमें मैहर में खेल मैदान का निर्माण कराया जाना है। वहीं, जीतू पटवारी ने कहा कि नारायण त्रिपाठी से उनकी यह सौजन्य मुलाकात थी।
नरोत्तम से मिलने पहुंचे:-
नारायण त्रिपाठी गुरुवार को भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात करने पहुंचे। उनके साथ नरेला विधानसभा सीट से विधायक विश्वास सांरग भी मौजूद थे। नारायण त्रिपाठी की इस मुलाकात के बाद अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं कि आखिर जीतू पटवारी से मुलाकात के अगले ही दिन नरोत्तम मिश्रा से मिलने क्यों पहुंचे हैं। बता दें कि नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात के बाद ही नारायण त्रिपाठी भाजपा दफ्तर पहुंचे थे और कहा था कि मैं भाजपा के साथ हूं।
क्या हैं मुलाकात के मायने?
नारायण त्रिपाठी को लेकर राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नारायण अभी भी असमंजस में है। भाजपा की खिलाफत करने पर उन्हें अपने ही क्षेत्र में विरोध का सामना करना पड़ा था तो ये भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस में उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं थी जिस कारण से नारायण त्रिपाठी ने नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात कर भाजपा में वापसी की थी। नारायण त्रिपाठी हर बार क्षेत्र के विकास का दावा कर कांग्रेस के संपर्क में हैं। जानकारों का कहना है कि नारायण त्रिपाठी भाजपा की टेंशन एक बार फिर से बढ़ा सकते हैं।
कांग्रेस पर बोला था हमला:-
भाजपा कार्यालय पहुंचे के बाद नारायण त्रिपाठी ने कहा था- कांग्रेस में ना कोई नेतृत्व है और ना ही कोई सोच। मैहर का विकास मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भाजपा जब चाहे मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार को गिरा सकती है।
कई बार पार्टी बदल चुके हैं नारायण त्रिपाठी:-
नारायण त्रिपाठी कई बार पार्टी बदल चुके हैं। समाजवादी पार्टी से अपनी राजनीति शुरू करने वाले नारायण त्रिपाठी सपा से कांग्रेस और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसके साथ ही नारायण त्रिपाठी भाजपा से बगावत कर कांग्रेस का विधानसभा में समर्थन कर चुके हैं।
11/07/2019 05:30:00 PM

कांग्रेस को बड़ा झटका, BJP विधायक प्रहलाद सिंह लोधी की सजा पर मिला स्टे, BJP को राहत

भोपाल. भाजपा विधायक प्रहलाद जोशी को जबलपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक प्रहलाद सिंह लोधी की सजा पर रोक लगा दी है। कोर्ट के फैसले के अनुसार सात जनवरी तक विधायक की सजा पर रोक रहेगी। कहा जा रहा है कि इस मामले में कोर्ट सात जनवरी तक अपना फैसला सुना सकती है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रहलाद सिंह लोधी मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य कहलाएंगे।
क्या विधायक बने रहेंगे:-
विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायक को दो साल की सजा का एलान होने के बाद पन्ना जिले की पवई सीट को रिक्त करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। हाईकोर्ट ने सजा में रोक लगा दी है जिस कारण से वो मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे।
क्य़ा कहा राकेश सिंह ने:-
मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा- सरकार ने आनन-फानन में विधायक की सदस्यता खत्म की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने बिना राज्यपाल की अनुमति के फैसला लिया था। ये कार्रवाई राजनीतिक द्वेष के कारण हुई है।
विधायकों की संख्या बढ़ी:-
मध्यप्रदेश विधानसबा चुनाव में भाजपा को 109 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन झाबुआ उपचुनाव में हार के बाद भाजपा विधायकों की संख्या 108 रह गई थी। 2 नवंबर को प्रहलाद सिंह लोधी की सदस्यता खत्म करने के बाद भाजपा के 107 विधायक हो गए थे लेकिन अब हाईकोर्ट की रोक के बाध भाजपा के विधायकों की संख्या 108 हो गई है।
कांग्रेस को बड़ा झटका:-
हाईकोर्ट से विधायक की सजा पर स्टे मिलने के बाद जहां भाजपा को बड़ी राहत मिली है वहीं, कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। इस मामले में सीएम कमल नाथ ने कहा था कि भाजपा के 15 सालों के जो काम हैं वो अब हर हफ्ते और महीने सामने आएंगे। हालांकि राजनीतिक जानकार हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इसे कांग्रेस को एक बड़ा झटका बता रहे हैं।
किस मामले में हुई थी विधायक को सजा:-
भाजपा विधायक प्रहलाद सिंह लोधी समेत 12 लोगों पर आरोप था कि उन्होंने रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाले रैपुरा तहसीलदार को बीच रोड पर रोककर मारपीट करते हुए बलवा किया था। मामला 28 अगस्त 2014 को सिमरिया थाना अंतर्गत का था।
2 नवंबर को खत्म की गई थी सदस्यता:-
2 नवंबर को विधानसभा सदस्य प्रहलाद सिंह लोधी की सदस्यता को समाप्त कर दिया गया। लोधी के खिलाफ एक आपराधिक मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधायक की सदस्यता समाप्त कर दी थी।
किस नियम के कारण गई सदस्यता:-
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अऩुसार अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो सदस्यता खत्म हो जाएगी। साथ ही वह अगले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। यह फैसला जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(4) को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि दोषी ठहराए जाने की तारीख से ही अयोग्यता प्रभावी होती है। क्योंकि इसी धारा के तहत आपराधिक रिकॉर्ड वाले जनप्रतिनिधियों को अयोग्यता से संरक्षण हासिल है।
11/07/2019 06:49:00 AM

मध्यप्रदेश में बढ़ी भाजपा की मुश्किलें, अब केवल दो तरीकों से ही संकट से निकल सकती है बीजेपी

भोपाल. मध्यप्रदेश में भाजपा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक भाजपा को तीन बड़े झटके लग चुके हैं। झाबुआ हार के बाद अब पन्ना जिले की पवई विधानसभा सीट से विधायक प्रहलाद सिंह लोधी की सदस्यता खत्म होने के मामले में भाजपा भले ही कांग्रेस सरकार पर हमलावर हो लेकिन भाजपा इस मसले में फंसती जा रही है। भाजपा ने अब इस मसले में हाईकोर्ट की तरफ रूख किया है, लेकिन जिस आधार पर विधायक की सदस्यता खत्म की गई है वो फैसला सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिया गया है।
राज्यपाल ने बैरंग लौटाया:-
मध्यप्रदेश में भाजपा पवई विधानसभा सीट को लेकर फंसती जा रही है। विधायक की सदस्यता के मामले में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश नेतृत्व को फटकार लगाई थी। जिसके बाद से पार्टी के नेता सक्रिय हुए। बीजेपी के दस विधायक प्रह्लाद सिंह लोधी की सदस्यता को लेकर मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने पहुंचे लेकिन राज्यपाल ने उन्हें खाली हाथ लौटा दिया क्योंकि राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने पहुंचे बीजेपी विधायकों के पास इस मामले में कोई भी लिखित शिकायत नहीं थी।
शिवराज दिल्ली तलब:-
वहीं, सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को इस मामले में भाजपा के आलाकमान ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली तलब किया। पहले से तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार शिवराज सिंह चौहान और अमित शाह की मुलाकात बुधवार को तय थी। लेकिन मध्यप्रदेश में बढ़े सियासी हलचल के बीच मंगलवार को ही शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली बुला लिया गया। इस दौरान पवई सीट के ऊपर भी चर्चा हुई है। जिसमें अमित शाह ने कहा है कि पवई सीट पर पार्टी स्टैंड ले। साथ ही शिवराज सिंह चौहान को कहा गया है कि एमपी के मामलों में दखल करें।
भाजपा के पास अब केवल दो रास्ते:-
भाजपा विधायक प्रहलाद सिंह लोधी के मामले में भाजपा का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष किसी विधायक की सदस्यता को खत्म नहीं कर सकता है। लेकिन भाजपा के पास अब केवल दो तरीके ही हैं जिससे भाजपा इस मुश्किल से निकल सकती है।
1. हाईकोर्ट से अगर विधायक प्रहलाद सिंह लोधी को सजा पर स्टे मिलता है। तो विधायक की सदस्यता खत्म करने का आदेश निष्कि्रिय हो जाएगा और वो एक बार फिर से विधायक कहलाएंगे।
2. नियम के अनुसार अगर कोई विधानसभा सीट रिक्त है तो उस सीट पर छह महीने के अंदर उपचुनाव होते हैं। अगर हाईकोर्ट विधायक प्रहलाद सिंह लोधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उपचुनाव से पहले फैसला दे और सजा को दो साल से कम कर दे। तो विधायकी बची रहेगी।
किस नियम के कारण गई सदस्यता:-
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अऩुसार अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो सदस्यता खत्म हो जाएगी। साथ ही वह अगले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। यह फैसला जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(4) को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि दोषी ठहराए जाने की तारीख से ही अयोग्यता प्रभावी होती है।