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Monday, May 11, 2020

5/11/2020 05:01:00 AM

आतंकी रियाज नायकू के लिए 15 रात जागे थे जवान, ऑपरेशन में शामिल असिस्टेंट कमांडेंट ने बताई कहानी

जम्मू कश्मीर। दक्षिण कश्मीर में अवंतीपुरा के गांव बेईघबोरा में एक घर के आसपास पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों की हलचल तेज हो गई थी। ये लोग बीते 15 दिनों से लगातार दिन और रात काम कर रहे थे। इन्हें पक्का यकीन था कि मोस्ट वांटेड आतंकी रियाज नायकू इसी घर में छुपा हुआ है। फिर जो हुआ वो पूरा देश जानता है। नायकू को हमारे जाबांजों ने ढेर कर दिया। इस मिशन में शौर्य चक्र विजेता बोहड़ा कलां गांव के एसीपी जिले सिंह भी शामिल थे। राष्ट्रीय राइफल, जम्मू कश्मीर पुलिस व सीआरपीएफ के संयुक्त अभियान में शामिल जिले सिंह बायां हाथ टूटने पर भी अपने साथियों को वहां से सुरक्षित निकालने में सफल रहे। उनका अभी आर्मी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जिले सिंह ने फोन पर कहा कि उन्हें खुशी है कि उन्होंने देश के दुश्मन को मारने में अपना योगदान दिया है।
नायकू के गांववालों ने किया था पथराव:-
शौर्य चक्र विजेता सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट जिले सिंह ने बताया कि 32 वर्षीय रियाज नायकू अवंतीपुरा के गांव बेईघबोरा में एक घर में छिपा था। जब उसे मारा गया तो गांव वालों ने हिंसक प्रतिक्रिया करते हुए पथराव कर दिया। जिससे उनके बाएं हाथ की हड्डी टूट गई, लेकिन फिर भी उन्होंने हौसला नहीं खोया और अपने फंसे हुए साथियों को वहां से निकालने में कामयाब हुए। उनकी इस उपलब्धि पर जहां सीआरपीएफ कैंप में खुशी का माहौल है, वहीं गांव बोहड़ाकलां वासियों में जिले सिंह की बहादुरी की जमकर प्रशंसा हो रही है। इस अवसर पर गांव के सरपंच यजुवेंद्र सिंह गोगली, विकास मंच पटौदी के संयोजक पवन चौधरी, श्रीराम स्कूल के चेयरमैन श्यामबीर चौहान, गौशाला के प्रधान महेश सैनी, मनबीर चौहान, टेसवा के जिला प्रधान राजेंद्र यादव ने जिले सिंह के शौर्य की जमकर प्रशंसा करते हुए स्वस्थ होने की प्रार्थना की है।
मिल चुका है शौर्य चक्र:-
सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता असिस्टेंट कमांडेंट जिले सिंह आतंकवादियों के लिए खौफ का पर्याय बन गए हैं। पुलवामा में सीआरपी कैंप में हमले के दौरान जैश ए मोहम्मद के आतंकवादियों को मार गिराने व अपने साथियों की रक्षा करने के लिए उन्हें केवल आर्मी को दिए जाने वाला शौर्य चक्र प्रदान किया गया था। इसके अलावा भी वे दर्जनों ऑपरेशन में सीआरपीएफ की बहादुरी का जीता जागता उदाहरण बन चुके हैं।
जीनत उल इस्लाम उर्फ उस्मान:-
हिजबुल गैंग के जीनत उल इस्लाम उर्फ उस्मान को आईईडी एक्सपर्ट भी कहा जाता था। यह भी आतंकी बुरहान वानी का साथी था। जनवरी 2019 में इसे मार गिराया गया था। यह 2015 से आतंकी गतिविधियों में शामिल था और शोपियां में जिला कमांडर बना हुआ था। A++ श्रेणी का यह आंतकी शोपियां का निवासी था।
​मन्नान वानी:-
हिजबुल के ही A++ कैटिगरी के इस आतंकी को पढ़ाई में काफी होशियार बताया जाता है। अक्टूबर 2018 में उसे मार गिराया गया था। वानी साल 2011 से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से पढ़ाई कर रहा था, जहां उसने एम. फिल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भूविज्ञान से पीएचडी में प्रवेश लिया। आज भी कॉलेज की वेबसाइट पर उसे मिले पुरस्कारों के साथ नाम दर्ज है। वानी के आतंकवादी बनने का सफर वर्ष 2017 के अंत में शुरू हुआ, जब वह दक्षिण कश्मीर के कुछ छात्रों के संपर्क में आया। इस साल तीन जनवरी को उसने आतंकवादी संगठन का हिस्सा बनने के लिए अलीगढ़ छोड़ दिया था।
शाहजहां:-
जैश ए मोहम्मद के कमांडर शाहजहां को सुरक्षबलाों ने अप्रैल 2019 में मार गिराया था। शोपियां का निवासी शाहजहां A++ श्रेणी का आंतकी था।
बुरहान के बाद पोस्टर बॉय बना था जाकिर मूसा:-
साल 2019 में सेना ने जाकिर राशिद बट्ट उर्फ मूसा को ढेर कर दिया। इसके साथ ही घाटी में गजवात उल हिंद नाम के आतंकी संगठन का ही सफाया हो गया था। यह इसका चीफ था। जाकिर मूसा पर भी 12 लाख का इनाम था।बुरहान के बाद टॉप आतंकी कमांडर बना जाकिर मूसा एक प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता था। इंजिनियरिंग की पढ़ाई छोड़ घाटी लौट गया और इस्लामिक राज्य की स्थापना के लिए जंग का रास्ता चुना। वह कश्मीर की लड़ाई को राजनीतिक ना मानकर धार्मिक मानता था। हिज्बुल से अलग होकर अल कायदा के संगठन का चीफ बना था।
​हिज्बुल कमांडर रियाज नायकू ढेर:-
साल 2018 में बनाई गई हिट लिस्ट में हिज्बुल कमांडर रियाज नायकू सबसे पहले नंबर पर था। उसे सेना ने आज (06 मई 2020) को मार गिराया है। नायकू 2012 में आतंकी बना था। उससे पहले तक वह एक प्राइवेट स्कूल मे मैथ टीचर था।
गांव से निकलकर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया
गुड़गांव के गांव बोहड़ाकलां की पट्टी चैनपुरा निवासी कृष्ण लाल व केला देवी के घर पर जन्मे जिले सिंह ने पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट किया था। इसके बाद 2003 में वे सीआरपीएफ में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हो गए। इस दौरान उन्होंने कोबरा कमांडो सहित कई अव्वल दर्जे के प्रशिक्षण प्राप्त किए। अपने बहादुरी व शौर्य के दम पर न केवल असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर पहुंचे बल्कि अपनी बहादुरी के दम पर शौर्य चक्र भी प्राप्त किया। उन्होंने हमेशा ही चुनौती को स्वीकार किया है। वह लगातार नक्सलवाद व आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात रहे हैं। वे सीआरपीएफ के अनुभवी, भरोसेमंद व जांबाज कमांडो की श्रेणी में शामिल हैं।

Sunday, April 19, 2020

4/19/2020 05:23:00 AM

एक्सक्लूसिवः आतंकियों ने रची कोरोना हमले की साजिश, आतंकी अपने पिता से बोला- जल्द कश्मीर आएंगे

जम्मू कश्मीर। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच काफी चिंताजनक खबर सामने आई है। पीओके में बैठा एक आतंकी अपने पिता से फोन पर बात करते हुए कह रहा है कि उसके कई साथी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। साथ ही तैयारी की जा रही है कि जितनी जल्दी हो सके उन्हें कश्मीर भेजा जाए। आतंकी ने अपने पिता को बताया कि उनके(पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका) पास न तो खाना है और न ही दवाइयां। उनके पास अगर कुछ है तो केवल हथियार।
आतंकी और उसके पिता के बीच बातचीतः-
पिता को सलाम करते हुए आतंकी ने कहा- हैलो
पिता- कौन बोल रहा है?
आतंकी- अब्बू...मैं शाहिद बोल रहा हूं।
पिता- आज बड़े दिन बाद फोन किया है। सब ठीक तो है?
आतंकी- टाइम नहीं मिलता, आज मिला तो सोचा हाल खबर ले लूं।
पिता- तुम और तुम्हारे साथी ठीक तो हैं?
आतंकी- मैं तो ठीक हूं लेकिन पांच से छह साथी संक्रमित हो चुके हैं। और इनकी (आकाओं) कोशिश है कि जो संक्रमित हैं उन्हें जल्द से जल्द कश्मीर भेजा जाए।
पिता- उन्होंने कोई इंतजाम नहीं रखा क्या तुम लोगों के लिए वहां?
आतंकी- यहां केवल खुदा ही हाफिज है हमारा। न तो खाना है और न ही दवाइयां। उनके पास अगर कुछ है तो केवल हथियार।
पिता- तेरी मां बहुत परेशान है, जब से तू गया है। अपना ध्यान रखना।
पिता- आने का क्या प्लान है।
आतंकी- परेशान मत हो अल्लाह रहम करेगा। मैं भी कोशिश कर रहा हूं कि कोई रास्ता निकले तो मैं भी कश्मीर आऊं। मेरी ओर से सबको सलाम कहना।गौरतलब है कि इस आतंकी और उसके द्वारा सोशल मीडिया के जरिए वायरल किए गए ऑडियो की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन ऑडियो के वायरल होते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। सूत्रों की मानें तो यह आतंकी दक्षिणी कश्मीर से ताल्लुक रखता है।
चार अप्रैल को जीओसी मेजर जनरल ए. सेनगुप्ता ने कही थी ये बात:-
उधर, चार अप्रैल को विक्टर फोर्स के जीओसी मेजर जनरल ए. सेनगुप्ता ने अमर उजाला के साथ बात करते हुए बताया था कि जो लोग पहले से संक्रमित हैं या संक्रमित हुए लोगों के संपर्क में रहे हैं, ऐसे लोगों से भी आतंकी जबरन खाना मांग रहे हैं। इतना ही नहीं ऐसे लोगों के संपर्क में भी आतंकी आ रहे हैं। ऐसे हालात में इन आतंकियों के जरिए घाटी में संक्रमण फैल सकता है। जीओसी मेजर जनरल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी आतंकी को पनाह मत दें। साथ ही इलाके में आतंकियों के पाए जाने पर सूचना दें। जीओसी के अनुसार सेना की यह रणनीति है कि इलाके में सभी आतंकियों को जल्द मार गिराया जाए ताकि इनके जरिए वायरस न फैल पाए। आतंकी एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं। इस वजह से संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि सेना हर समय आवाम की मदद के लिए तैयार है।

Monday, March 16, 2020

3/16/2020 05:52:00 AM

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षा बलों में मुठभेड़, चार आतंकी हुए ढेर

जम्मू। सुरक्षा बलों ने अनंतनाग जिले में चार आतंकियों को ढेर कर दिया है। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों को दो से तीन आतंकियों के इलाके में छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सीआरपीएफ, पुलिस के साथ स्थानीय सुरक्षाबलों ने रविवार सुबह इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया। सभी आतंकी जमीन के नीचे एक ठिकाना बनाकर छिपे हुए थे।
आतंकियों के गोली-बारी करने के बाद तलाशी अभियान मुठभेड़ में बदल गया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के डायलगाम इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए हैं। हालांकि, अभी उनकी पहचान उजागर नहीं की गई है। मारे गए आतंकियों में लश्कर के तीन और हिज्बुल मुजाहिदीन का अनंतनाग का कमांडर तारिक अहमद शामिल है। अभी भी इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। गांव के सभी प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया है और सुरक्षाबल घर-घर जाकर तलाशी अभियान चला रहे हैं।
बताते चलें कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर में शनिवार को सुरक्षा बलों ने बारामूला जिले के क्रालगुंड गांव से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए थे। विशेष अभियान समूह तीन मैग्जीन के साथ एक पिस्टल अंडर बैरल ग्रेनेडलॉन्चर (यूजीबीएल) के साथ एक एके 47 राइफल और दो मैग्जीन बरामद की थी।
इससे पहले शुक्रवार को जम्मू और कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में आतंकवादी के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था और उनके कब्जे से हथियार और गोला बारूद जब्त किए गए थे। उनकी पहचान नजीर अहमद वानी और बशीर अहमद वानी के रूप में की गई थी, जो उत्तरी कश्मीर जिले के विलगाम इलाके के शेखपोरा तरथपोरा के निवासी थे।

Friday, February 14, 2020

2/14/2020 07:39:00 AM

पुलवामा के जख्मः दूर तक फैले जांबाजों के शव, खून से लथपथ थी सड़क

जम्मू। जम्मू कश्मीर में साल 2019 में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया था। इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर किया गया धमाका इतना तेज था कि सेना की गाड़ी के परखच्चे उड़ गए थे। कई जवान मौके पर शहीद हो गए थे। धमाके के बाद धुएं का गुब्बार छंटा तो दूर तक सड़क खून से लथपथ नजर आ रही थी।जगह-जगह मलबा फैला था। इन्हीं के बीच जाबांजों के शव पड़े थे। हमला थमने के कुछ ही देर बाद बचाव कार्य शुरू किया गया।आत्मघाती धमाके के बाद लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही आतंकियों ने सीआरपीएफ की 78 गाड़ियों के काफिले पर ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी।गोलीबारी में भी कुछ जवान घायल हुए। इसके बाद फायरिंग करने वाले आतंकी फरार हो गए। हमला थमने के कुछ ही देर बाद फिर से बचाव कार्य शुरू किया गया।घायल जवानों को अस्पताल पहुंचाने का सिलसिला शुरू हुआ। साथ ही सेना ने आतंकियों की धरपकड़ के लिए सर्च ऑपरेशन भी शुरू कर दिया। इस फिदायीन हमले में 40 जवान शहीद हो गए, जबकि 40 घायल हो गए। जैसे ही जम्मू कश्मीर सहित देश को इस हमले की खबर मिली पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों में गुस्सा था, हर इंसान की जुबान पर एक ही शब्द था, इस हमले की साजिश रचने वाले आतंकियों और दुश्मन को करारा जवाब दिया जाए।

Friday, February 7, 2020

2/07/2020 09:41:00 AM

सिर में गोली लगने के बाद भी शहीद रमेश ने मार गिराया एक आतंकी, शाहिद की जज्बे की कहानी

श्रीनगर। पटना एयरपोर्ट पर शहीद सीआरपीएफ कांस्टेबल जीडी रमेश रंजन का शव लाया गया। यहां उनका राजकीय सम्मान किया गया।यहां उन्हें सलामी देकर आखिरी विदाई दी गई। शहीद रमेश का शव आज बिहार के आरा जिले में उनके पैतृक आवास पर ले जाया जाएगा। उनकी शहादत को पूरा हिंदुस्तान याद कर रहा है।शहीद रमेश रंजन का आज उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।। 
जज़्बे की कहानी:-
स्कूटी से उतरते ही पहने आतंकी ने नाके पर तैनात जवान पर फायर कर दिया। गोली सीआरपीएफ की 73वीं वाहिनी के कांस्टेबल रमेश रंजन के सिर में लगी, लेकिन रमेश ने तुरंत राइफल संभाली और जवाबी फायर झोंक दिया। गिरते-गिरते वह एक आतंकी को निशाना बना चुके थे। इसके बाद उनके साथी भी सचेत हो गए और दो आतंकियों को घेर कर ढेर कर दिया गया। वहीं, एक अन्य जख्मी हालत में पकड़ा गया। इस बीच, रमेश रंजन अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे शहीद लाया करार दे दिया।
आइजी सीआरपीएफ रवि दीप साही ने उसे श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जख्मी होने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। उसकी बहादुरी के कारण ही दो आतंकी मारे गए हैं। शहीद रमेश को दोपहर बाद हुमहामा में आयोजित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह में अंतिम विदाई दी गई। आइजी सीआरपीएफ रविदीप साही समेत सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों और जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह व अन्य पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पुष्पचक्र भेंट कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ विमान के जरिए दिल्ली ले जाया गया।
आइजी सीआरपीएफ ने शहीद के श्रद्धांजलि समारोह में कहा कि शहीद कांस्टेबल रमेश रंजन ने अपनी जान की परवाह किए बगैर आतंकियों का मुकाबला किया। वह जख्मी होने के बावजूद लड़ा। उसकी बहादुरी और कुर्बानी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बताया कि आतंकी हमले के समय नाके पर एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के नेतृत्व में 13 सीआरपीएफ कर्मी तैनात थे। शहीद रमेश रंजन एक माह बाद 31 साल के होने वाले थे। महानिदेशक सीआरीएफ एपी महेश्वरी ने रमेशरंजन की बहादुरी को सलाम करते हुए कहा कि देश की एकता व अखंडता के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले मैं अपने एक भाई को सलाम करता हूं। इस संकट की घड़ी में हम शहीद के परिजनों के साथ खड़े हैं।

Friday, January 17, 2020

1/17/2020 08:01:00 AM

DSP देविंदर सिंह का खुलासा, जम्मू कश्मीर पुलिस के सीनियर अधिकारी के लिए करता था काम

जम्मू कश्मीर के डीएसपी देविंदर सिंह को पुलिस ने हिजबुल मुजाहिन के 2 आतंकियों के साथ गिरफ्तार किया था। अब पुलिस पूछताछ में Davinder singh ने बड़ा खुलासा किया है। उसने कबूला है कि वह जम्मू कश्मीर पुलिस के एक सीनियर अधिकारी के लिए काम करता था। उसने पुलिस को उस अधिकारी का नाम भी बताया है। पूछताछ के दौरान देविंदर टूट गया और उसने कहा कि उसने बहुत बड़ी गलती की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देविंदर को इन आतंकियों को निकालने के लिए भी 10 लाख रुपए मिलने वाले थे।
सामने आई जानकारी के मुताबिक पुलिस सूत्रों ने बताया कि देविंदर सिंह ने एक सीनियर अधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह उसके लिए काम करता था। जांचकर्ताओं के मुताबिक देविंदर के बयान को लिंक करने की कोशिश की जाएगी। ऐसा भी हो सकता है कि वह जांच को गुमराह करने के लिए यह सब कह रहा हो।
यह भी सामने आया है कि देविंदर सिंह ने पिछले साल हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी नावीद बाबू को जम्मू में शिफ्ट किया था। नावीद ने इसके लिए उसे 8 लाख रुपए दिए थे और वह जम्मू में दो महीने तक रुका था। जब 11 जनवरी को पुलिस ने नावीद और एक अन्य आतंकी के साथ Davinder Singh को पकड़ा था तो उस वक्त उसने कहा था कि दोनों आतंकियों को वह सरेंडर कराने के लिए ले जा रहा था।
सूत्रों के मुताबिक NIA ने भी MHA से आरोपी देविंदर से एक या दो दिन की पूछताछ के लिए आदेश मांगा है। इस बीच JK डीजीपी दिलबाग सिंह ने उसे बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी है।
अफजल गुरु की पत्नी ने भी किया दावा:-
गिरफ्तार डीएसपी देविंदर सिंह को एक लाख रुपए देने का अफजल गुरु की पत्नी ने भी दावा किया है। उसने कहा साल 2000 में उसने देविंदर को पैसा देने के लिए अपने गहने तक बेच दिए थे।

Monday, January 13, 2020

1/13/2020 09:10:00 AM

DSP और आतंकियों के बीच कितने की हुई थी डील, जांच में हैरान करने वाले खुलासे

श्रीनगर। कश्मीर के कुलगाम में दो आतंकियों के साथ पकड़े गए डीएसपी देविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि डीएसपी की कार में सवार दोनों आतंकियों से कथित तौर पर 12 लाख में डील हुई थी। इसके बदले वह उन आतंकियों को सुरक्षित चंडीगढ़ ले जाने वाला था। इतना ही नहीं, अपने मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उसने बकायदा चार दिन की छुट्टी भी ले ली थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस और आतंकियों के गठजोड़ से सुरक्षा एजेंसियां भी चकरा गई हैं। ऐसे में इनकी साठगांठ की परतें अब आइबी और रॉ जैसी केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त जांच में खुलेंगी।
पूछताछ में खुल सकते हैं कई बड़े मामले:-
सूत्रों की मानें तो कुख्यात आतंकियों के लिए हथियारों की डील करवाने का जिम्मा भी डीएसपी के पास ही था। अभी इस मामले में सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं। इस दौरान बड़े मामले खुल सकते हैं। वहीं, पूछताछ के आधार पर सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के खमनू और बड़गाम समेत कश्मीर में आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है। कुख्यात आतंकी नवीद की निशानदेही पर कुछ हथियार भी बरामद किए हैं। हालांकि जांच एजेंसियां अभी इस संबंध में कुछ भी बताने से बच रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार पूछताछ पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का पर्दाफाश किया जाएगा। रविवार को राज्य पुलिस के महानिरीक्षक विजय कुमार ने कहा कि डीएसपी देविंदर सिंह ने जघन्य अपराध किया है। वह डीएसपी श्रीनगर एयरपोर्ट जैसे अति संवेदनशील जगह पर तैनात था। शनिवार तक इसका अंदाजा भी नहीं था कि वह ऐसे मामले संलिप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी पुलिस को इसके लिए दोषी ठहराना गलत है।
जम्मू के सांबा में होनी थी डील:-
बताया जा रहा है कि नवीद और उसके साथी के हथियारों की डील संभवत: जम्मू के सांबा में ही होने वाली थी। इसके बाद दोनों आतंकी कुछ महीने चंडीगढ़ में ही ठहरने वाले थे। अफसरों के अनुसार उनसे पूछताछ के आधार पर ही उनके मंसूबों का पता चल सकेगा। वहीं, डीएसपी के आवास से नकदी भी बरामद हुई है।
नवीद ने भाई को किया था फोन:-
सूत्रों का कहना है कि नवीन ने रवाना होने से पहले अपने भाई को फोन किया था। वह फोन भी पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों ने सर्विलांस पर रखा हुआ था। इसके आधार पर मिली पुख्ता सूचना के बाद ही वाहन को रोका गया था।
पकड़े गए दो आतंकियों में एक पुलिस भगोड़ा भी:-
आतंकी नवीद पुलिस का भगोड़ा था, जो कि 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया था। सूत्रों के अनुसार डीएसपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग के अधिकारियों की स्क्रीनिंग होगी। क्योंकि गृह मंत्रालय भी चाहता है कि ऐसी काली भेड़ों की पहचान की जाए जो आतंकवादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके लिए केंद्रीय खुफिया एजेंसी इंटेलीजेंस ब्यूरो और रॉ भी जांच में सहयोग करेगा।
संसद हमले के दौरान भी चर्चा में आया था नाम:-
पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह का नाम संसद हमले के बाद भी चर्चा में आया था। बताया जा रहा है कि अफजल ने यह दावा किया था कि कार देविंदर सिंह ने ही उपलब्ध करवाई थी। हालांकि पुलिस महानिरीक्षक कश्मीर विजय कुमार ने इससे इन्कार किया है। उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि हमारे पास इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है। इससे पूर्व भी डीएसपी कई बार आरोपों के घेरे में आ चुके हैं। इसमें वूसली के आरोप भी शामिल हैं।

Sunday, January 12, 2020

1/12/2020 07:01:00 AM

पाक सैनिकों ने फिर दिखाई बर्बरता, सेना के पोर्टर का सिर काटकर ले गए

जम्मू। एलओसी पर पाकिस्तानी सैनिकों की बर्बरता कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। पाक सेना ने साल के दूसरे बैट हमले में एक पोर्टर का सिर काट डाला। इससे पहले बैट हमले में एक जनवरी को ही 2 भारतीय सैनिकों को मार डाला गया था और उनके शवों के साथ बेअदबी की गई थी। एलओसी पर हाई अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि सूचनाएं कहती हैं कि पाक कमांडों ऐसे और बैट हमलों को अंजाम दे सकते हैं।
कल पुंछ के गुलपुर में हुए बैट हमले में सेना के दो पोर्टरों - मुहम्मद असलम तथा मुहम्मद अल्ताफ - की मौत हो गई थी जबकि तीन अन्य पोर्टरों और 3 सैनिकों समेत 6 गंभीर रूप से जमी हो गए थे।
एलओसी पर यह इस साल का दूसरा हमला था जिसमें पाक कमांडो एक पोर्टर का सिर ही काट कर ले गए। ऐसा ही एक हमला नौशहरा एक जनवरी को भी हुआ था जिसमें 2 जवान शहीद हो गए और उनके शवों के साथ बेअदबी की गई।
पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम के उल्लंघन में हुई हालिया बढ़ोतरी के कारण जम्मू कश्मीर में एलओसी से सटे इलाकों में बढ़े तनाव के बीच सेना ने आज बताया कि उन्हें प्राप्त सूचना के मुताबिक, पाकिस्तान एलओसी पर और अधिक कमांडो हमले की कोशिश कर रहा है।
बार्डर रेडर्स के नाम से जाने जाने वाले यह कमांडों पाकिस्तान के विशेष बलों के कर्मियों और आतंकियों का एक मिलाजुला स्वरुप है। पिछले कुछ सालों में पाक बार्डर रेडर्स भारत के कई सैनिकों की नृशंस हत्या कर चुका है। कईयो के वह सिर भी काट कर ले जा चुका है। 
एलओसी पर बार्डर रेडर्स के हमले कोई नए नहीं हैं। इन हमलों के पीछे का मकसद हमेशा ही भातीय सीमा चौकिओं पर कब्जा जमाना रहा है। पाक सेना की कोशिश कोई नई नहीं है। करगिल युद्ध की समाप्ति के बाद हार से बौखलाई पाक सेना ने बार्डर रेडर्स टीम का गठन कर एलओसी पर ऐसी बीसियों कमांडों कार्रवाईयां करके भारतीय सेना को जबरदस्त क्षति सहन करने को मजबूर किया है।
26 जुलाई 1999 को जब करगिल युद्ध की समाप्ति की घोषणा हुई तो उधर पाक सेना ने अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देना आरंभ कर दिया था। उसने त्रिस्तरीय रणनीति बनाई जिसके पीछे का मकसद भारतीय सेना को अधिक से अधिक नुक्सान पहुंचाना तो था ही कश्मीर में भी लोग त्राहि-त्राहि कर उठे थे।
करगिल युद्ध के बाद ही शुरूआत हुई थी भारतीय सीमा चौकिओं पर बार्डर रेडर्स के हमलों की। हालांकि सैन्य सूत्र कहते हैं कि पाक सेना द्वारा गठित बार्डर रेडर्स में आतंकी भी शामिल होते हैं जिन्हें हमलों में इसलिए शामिल किया जाता रहा है ताकि वे कश्मीर में घुसने के बाद वहशी कृत्यों को अंजाम दे सकें। पिछले 21 सालों में कितनी बार पाक सेना के कमांडों ने भारतीय सीमा चौकिओं पर हमले किए कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है।
इतना जरूर था कि बार्डर रेडर्स के हमले ज्यादातर एलओसी के इलाकों में ही हुए थे। इंटरनेशनल बार्डर पर पाक सेना ऐसी हिम्मत नहीं दिखा पाई थी। जबकि राजौरी और पुंछ के इलाके ही बार्डर रेडर्स के हमलों से सबसे अधिक त्रस्त इसलिए भी रहे थे क्योंकि एलओसी से सटे इन दोनों जिलों में कई फारवर्ड पोस्टों तक पहुंच पाना दिन के उजाले में संभव इसलिए नहीं होता था क्योंकि पाक सेना की बंदूकें आग बरसाती रहती थी।
कौन है पाकिस्तान की खूनी टुकड़ी बैट:-
बैट अर्थात बार्डर एक्शन टीम कह लिजिए या फिर बार्डर रेडर्स, एलओसी पर छापामार युद्ध में माहिर है। ये पाकिस्तान सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप के साथ काम करती है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इसे सूचनाएं मुहैया करवाती है। बैट एलओसी या सीमा पर दुश्मन के इलाके में एक से तीन किमी अंदर जाकर हमले करती है। चार हफ्ते हवाई युद्ध के साथ ही इनकी कुल ट्रेनिंग करीब 8 महीनों की होती है। इस टीम का मकसद सीमा पार जाकर छोटे छोटे हमलों को अंजाम देकर दुश्मन में दहशत फैलाना है। हमलों के दौरान बैट इनाम के तौर पर दुश्मन के सिपाहियों का सिर काट कर अपने साथ ले जाती है।

Monday, December 30, 2019

12/30/2019 05:26:00 PM

जम्‍मू-कश्‍मीर में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, पहली बार देशभर से मंगाए गए आवेदन

जम्मू: जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद देशभर के नौजवानों के लिए वहां नौकरी का पहला विज्ञापन सामने आया है. जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा 33 गैर राजपत्रित पदों के लिए भर्ती का विज्ञापन निकाला गया है. विज्ञापन के मुताबिक इन पदों के लिए जम्मू कश्मीर, लद्दाख और देश के अन्य हिस्सा से भी इच्छुक आवदेक आवेदन कर सकते हैं. खबर है कि इन 33 गैर राजपत्रित पदों में से 17 पद ओएम (Open Merit) कैटगरी के लिए हैं. 
ओपन मेरिट कैटगरी के इन 17 पदों पर जम्मू कश्मीर से बाहर के आवेदकों को भी चुना जा सकता है.
बता दें कि इसी साल अगस्त महीने में जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि राज्य में अगले 2-3 महीनों के भीतर 50 हजार नौकरियों की भर्ती की जाएगी. मलिक ने कहा था कि हम आज यह घोषणा करते हैं कि जम्मू कश्मीर प्रशासन में 50 हजार नई नौकरियां निकाली जाएंगी. हम युवाओं से अपील करते हैं कि वे पूरे जोश के साथ इसमें शामिल हों. अगले 2-3 महीने में हम भर्तियां कर लेंगे. 
उन्होंने कहा था कि धीरे-धीरे पाबंदियों में छूट दी जाएंगी. राज्यपाल ने कहा कि कुछ लोग जम्मू कश्मीर को लेकर झूठ फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई है. उन्होंने कहा कि हर कश्मीरी की जान हमारे लिए कीमती है. हमने जान-माल का कोई नुकसान नहीं होने दिया है. 

Wednesday, November 13, 2019

11/13/2019 07:33:00 AM

ड्राइवर की एक गलती से 16 लोगों की मौत, एक की तो दो दिन बाद थी शादी

डोडा/(जम्मू-कश्मीर)। ओवरलोडिंग के कारण एक बार फिर से बड़ा हादसा सामने आया है। डोडा के खलैनी में दुर्घटना का शिकार हुए वाहन में चालक सहित कुल 12 लोगों के बैठने का स्थान था, लेकिन इसमें 17 लोग सवार थे। ओवरलोड होने के कारण ही चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और हादसा हो गया। बताया जाता है कि जिले के दूरदराज ग्रामीण इलाकों में बस व मेटाडोर के न चलने के कारण छोटे चार पहिया वाहनों को परमिट जारी किए हैं। इनमें बहुत कम यात्रियों के बैठने के लिए स्थान होता है। अक्सर यह वाहन ओवरलोड होकर चलते हैं। खलैनी में दुर्घटना का शिकार होने वाला वाहन भी ओवरलोड था। लोगों ने बताया कि मृतकों में एक युवक की दो दिन बाद शादी थी।वाहन में चालक सहित 12 यात्रियों के सफर करने की अनुमति है, लेकिन लेकिन इसमें 17 लोग सवार थे।  छोटे वाहन होने के कारण यात्री ज्यादा होने पर इसको संतुलन के साथ चलाना काफी मुश्किल होता है। जब कभी इन वाहनों का संतुलन बिगड़ता है तो स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। मंगलवार को वाहन दुर्घटना में भी चालक के लिए ओवरलोड वाहन को संभालना मुश्किल हो गया था और वाहन सीधे नीचे खाई में गिर गया। जिसमे 16 लोगों की मौत हो गई एक कि हालात गंभीर बताई जा रही है। 
वाहन दुर्घटना में मृतकों के नाम:-
इरशाद अहमद पुत्र अब्दुल माजिद
जबिना पत्नी मोहम्मद इरशाद
नासिर
बेबी (बच्चा) पुत्र इरशाद अहमद 
फिरदौस पुत्र नूर मोहम्मद
तबरेज पुत्र मोहम्मद शौकीन 
समीर पुत्र अब्दुल वाहिद
नसीर पुत्र अली जान
रुबिया पत्नी फिरदौस अहमद
बेबी (बच्चा) पुत्र फिरदौस अहमद 
फैज अहमद पुत्र रुरतम वानी 
अमिना पत्नी मोहम्मद सईद 
शाहीन पत्नी फैजुल्ला
तनवीर पत्नी तैमूर अहमद
बेबी (बच्चा) पुत्र तैमूर अहमद
बेबी (बच्चा) पुत्र तैमूर अहमद 
(सभी मृतक मंगोता इलाके के रहने वाले हैं।)
जीएमसी जम्मू रेफर किए गए घायल का नाम  
तैमूर पुत्र मोहम्मद अकरम वानी निवासी मंगोता

Saturday, March 9, 2019

3/09/2019 06:30:00 AM

बॉर्डर पर एक ऐसा गांव जहां महिलाएं कर रही हैं हिफाजत, यहां का रुख करने में कांपते है दहशतगर्द

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में बसा गांव मोहरा कलाल। यहां कभी आतंकियों का खौफ था, लेकिन आज यहां का रुख करने से भी दहशतगर्द कांपते हैं। उनमें यह खौफ सुरक्षाबलों का नहीं, बल्कि गांव की गुज्जर महिलाओं का है। वे राइफलें लेकर गांव की निगहबानी और हिफाजत करती हैं। 20 किलोमीटर के दायरे में फैले इस गांव में गुज्जर समुदाय के लोग ही रहते हैं।
यह जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ग्राम सुरक्षा समिति (वीडीसी) हैं। इसके 180 सदस्यों में 100 महिलाएं हैं। वीडीसी के एक दल में 13 सदस्य है, जिनका नेतृत्व भी महिलाओं के हाथ में है। 2001 में आतंकियों ने इस गांव के करीब 18 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
गांव की वीडीसी सदस्य शकीला ने बताया कि उन्होंने अपनों को मरते देखा है। मरने वालों में बुजुर्ग और बच्चे थे। आतंकी चाहते थे कि यहां रहने वाले लोग उनके अधीन रहें, उनकी हर बात मानें। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में उनका साथ दें, लेकिन गांव वालों को यह किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था। ग्रामीणों को इस इनकार का खामियाजा अपनों को गंवाकर भुगतना पड़ा।
वीडीसी सदस्य शाहिदा ने कहा कि देशभक्त गुज्जर समुदाय कभी नहीं चाहता था कि पाक के आतंकी उनके इलाके में घुस कर उनकी बहू बेटियों से बदसलूकी करें। इसीलिए गांव की महिलाओं ने भी हथियार उठाने का निर्णय लिया।
पुरुष भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे-
यहां महिलाओं की सरपरस्ती में पुरुष भी कंधे से कंधा मिलाकर आतंकवाद से लड़ रहे है। इस गांव में महिलाओं के दल क्षेत्र के हिसाब से बांटे गए हैं। गांव से करीब 60 किलोमीटर दूर नियंत्रण रेखा (एलओसी) है। शकीला बानो का कहना है कि उनकी एकजुटता ही आतंकियों के खिलाफ उनका हथियार है।
आतंकियों के खात्मे के लिए था 'सर्प विनाश'-
नाहिदा बेगम ने बताया कि सेना ने 2005 में आतंकियों के खिलाफ 'सर्प विनाश' अभियान चलाया था। छह माह के अंदर ही पुंछ जिले में स्थित इस गांव को आतंकियों से मुक्त करा लिया गया। गांव को आंतक मुक्त करने के बाद सेना के आगे सबसे बड़ी परेशानी गांव की सुरक्षा को यकीनी बनाना और प्रभावित गुज्जर परिवारों का पुर्नवास था। लिहाजा सेना ने गांव की महिलाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी।
आपरेशन 'सर्प विनाश' से पहले इस गांव में न तो सड़क थी और न ही प्रशासन की कोई मदद यहां पहुंचती थी। सेना ने उनके पुनर्वास के लिए अस्थायी मजबूत ढांचे बनाए।
बर्फबारी के दौरान कट जाता है गांव-
पीरपंजाल की पहाड़ी श्रंखला पर बसा गांव मोहरा कलाल बर्फबारी के कारण नवंबर से अप्रैल तक राज्य के दूसरे इलाकों से सड़क मार्ग से कट जाता है। इस दौरान यहां पर आठ फीट तक बर्फ जमा रहती है। गुज्जर समुदाय के पुरुष सर्दियों में चारागाह की तलाश में मवेशियों को लेकर मैदानी इलाकों में निकल जाते है।
उस दौरान भी गांव की सुरक्षा का जिम्मा यहां की वीडीसी महिला सदस्य ही संभालती हैं। शकीला बेगम का कहना है कि सेना की ओर से उन्हें पूरा सहयोग मिलता है। उन्हें इफाजत के लिए राइफलें दी गई हैं, परंतु दल की सभी सदस्य एके-47, एके-56 के अलावा अन्य आधुनिक हथियार भी चलाना जानती हैं।

Wednesday, March 6, 2019

3/06/2019 06:27:00 AM

आतंकी अफजल गुरु गैंग को आईना दिखाता खुद अफजल का बेटा, डॉक्टर बन करना चाहता है सेवा

जम्मू। पाकिस्तान पोषित राष्ट्रविरोधियों ने संसद हमले के मास्टरमाइंड जिस अफजल गुरु को अपना आदर्श बना रखा है उसी अफजल गुरु का बेटा राह से भटके इन लोगों को आईना दिखा रहा है। अफजल का बेटा गालिब गुरु खुद के भारतीय होने पर गर्व करता है। अपना आधार कार्ड बनने पर वह बेहद खुश है और भारतीय पासपोर्ट बनवाने को उत्सुक है।
दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाला होनहार गालिब अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रहा है। वह डॉक्टर बन मानवता की सेवा करना चाहता है। बेहद मासूम लेकिन उतने ही संजीदा दिखने वाले गालिब को उसकी मां ने नकारात्मकता और बुजदिली से भरी अफजलवादी सोच से बचाए रखा है।
गालिब और उसकी मां का यह रुख उन अफजलवादियों-अलगाववादियों के मुंह पर जोरदार तमाचा है, जो कहते हैं, 'तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा...'। गालिब एक पैगाम है कि खुद अफजल के घर से अफजल नहीं निकला। पाकिस्तान के षडयंत्र का शिकार बन अफजल गुरु ने न केवल जान गंवाई बल्कि अपने पीछे अपने परिवार को संघर्ष करने छोड़ गया।
भारतीय संसद पर हमले के लिए उसे फांसी की सजा मिली थी। अपने पिता के बारे में गालिब अधिक बात नहीं करना चाहता है। वह कहता है, मां ने मुझे बताया कि पिता चाहते थे कि मैं पढ़ लिख कर नेक इंसान और डॉक्टर बनूं...।
उड़ी से लेकर पुलवामा हमले तक, अफजल ब्रिगेड का नाम सामने आता रहा है। अलगाववादी इनका संरक्षण करते आए हैं। अठारह साल के गालिब को हाल ही में आधार कार्ड मिला। उसका कहना है कि वह आधार कार्ड मिलने से काफी गर्व महसूस कर रहा है। कम से कम उसके पास दिखाने के लिए एक कार्ड तो है। अगर उसे अब पासपोर्ट मिलता है तो वह अपने आप को भारत का गौरवान्वित नागरिक महसूस करेगा। उसे अपना भविष्य संवारने के भी कई अवसर मिलेंगे।
गालिब अपने नाना गुलाम मुहम्मद और मां तबस्सुम के साथ रहता है। बर्फ से ढके गुलशनाबाद की पहाड़ियों पर स्थित अपने घर में रह रहे गालिब के सपने भी काफी ऊंचे हैं। दसवीं में 95 फीसद और बारहवीं कक्षा में 89 फीसद अंक हासिल कर गालिब कश्मीर की नई पीढ़ी को हिंसा से दूर बेहतर भविष्य की राह दिखा चुका है। अब उसका सपना डॉक्टर बनने का है ताकि लोगों की सेवा कर नाम कमा सके।
गालिब ने बातचीत में कहा कि अब वह अपने पिता के सपने को पूरा करना चाहता है। उसके पिता शेर-ए-कश्मीर इंस्टीटयूट आफ मेडिकल सांइसेस में उसे मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते थे। अब उनके सपने को वह पूरा करेगा। इस समय वह नीट की तैयारी कर रहा है। यह परीक्षा 5 मई को होनी है। गालिब का कहना है कि उसका सपना है कि वह भारत के ही किसी मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई करे। लेकन अगर वह परीक्षा पास करने में असफल रहता है तो विदेश में पढ़ाई करने का प्रयास करेगा।
मां ने आतंकियों से बचाया-
गालिब का कहना है कि उसकी मां तबस्सुम ने उसे आतंक के दबाव से बाहर रखा। उसकी मां ही उसकी प्राथमिकता है। लोग क्या कहते हैं इस पर उसने कभी भी नहीं सोचा। उसकी मां ने उसे उन आतंकी संगठनों से बचाया है जो कि उस जैसे कई युवाओं को हथियार उठाने के लिए भड़काते हैं।
कहता है, मां ने मेरे लिए अलग जगह बनाई। वे कहती रहीं कि अगर कोई तुम्हें कुछ कहता भी है तो उस पर कोई भी प्रतिक्रिया न दो, चुप रहो। उसकी मां और नाना का कहना है कि हम कश्मीर मुद्दे पर किसी भी प्रकार की बहस में भाग नहीं लेते।
नाना भी अपने नाती की मेहनत और सफलता से काफी खुश हैं। उनका कहना है कि गालिब ने दसवीं और बारहवीं कक्षा में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे में उन्होंने पूरी उम्मीद है कि वह सफल डॉक्टर बनेगा।
सुरक्षाबलों ने नहीं किया परेशान-
गालिब का कहना है कि जिस गांव में वह रहता है वहां पर काफी सुरक्षाबल हैं। परंतु आज तक किसी ने उसे कभी भी परेशान नहीं किया। कई बार सुरक्षाबलों से मिलता हूं परंतु वह हर बार प्रोत्साहित करते हैं। वह कहते हैं कि यदि मैं मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता हूं तो वह कभी मेरे या मेरे परिवार में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। वह खुद मुझे डॉक्टर बनने के लिए कहते हैं।

Friday, February 22, 2019

2/22/2019 08:25:00 AM

पाक सेना ने बार्डर पर की तेज गोलाबारी, बॉर्डर के 50 गांव भी कराए खाली

पुंछ। पाकिस्तानी सेना सीमा पर तनाव बढ़ाने पर आमादा है। पिछले तीन दिन से जम्मू संभाग के राजौरी और पुंछ जिलों में नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी कर रही पाक सेना ने गुरुवार को पुंछ सेक्टर में जमकर मोर्टार दागे। भारतीय सेना ने भी इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। इसके बावजूद पाक सेना ने गोलाबारी की तीव्रता और बढ़ा दी है।
सूत्रों की मानें तो पाक सेना ने पुंछ और राजौरी के नौशहरा सेक्टर के सामने अपने क्षेत्र में करीब 50 गांव खाली करवाकर लोगों को पीछे बुला लिया है। इसके साथ पाकिस्तान ने सीमा पर सैन्य गतिविधियां भी बढ़ा दी हैं। भारतीय सेना के उच्चाधिकारी भी सीमा पार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।पाक सेना ने गुरुवार को पहले पुंछ सेक्टर में भारत की सैन्य चौकियों को निशाना बनाना शुरू किया।
भारत ने जब इसका जवाब दिया तो पाकिस्तान ने रिहायशी क्षेत्रों पर भी मोर्टार दागने शुरू कर दिए। इस गोलाबारी से सीमा पर कोई नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में काफी दहशत का माहौल है। कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के बाद से ही पाक सेना ने सीमा पर तनाव का माहौल बना रखा है।

Monday, February 18, 2019

2/18/2019 11:35:00 AM

Big News- पहला बदला: पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड कामरान सहित जैश के दो आतंकी ढेर

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद आज एक बार फिर बड़ा एनकाउंटर हुआ है. पुलवामा के ही पिंगलिना में हुई इस मुठभेड़ में सेना के 4 जवान शहीद हुए हैं. सुरक्षाबलों ने भी जैश-ए-मोहम्मद के दो कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है. सुरक्षाबलों ने यहां एक बिल्डिंग को ही उड़ा दिया, जहां आतंकी छिपे बैठे थे. बता कि ये दोनों आतंकी कामरान और गाजी राशिद हैं, जिन्होंने पुलवामा में हुए आतंकी हमले की साजिश रची थी.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही देश गुस्से में है. सरकार की ओर से खुली छूट मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकियों के खिलाफ एक्शन शुरू किया है. सोमवार सुबह पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन छेड़ दिया है, इस एनकाउंटर में 2-3 आतंकियों को घेरा गया था. एनकाउंटर के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया है. पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों को आज इस हमले के मास्टरमाइंड दोनों आतंकियों को मारकर सेना ने पहला बदल पूरा किया......
2/18/2019 10:43:00 AM

BREKING NEWS- पुलवामा में मुठभेड़ जारी, सेना ने जैश के 3 आतंकियों को घेरा, मेजर समेत 4 जवान शहीद

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सोमवार तड़के सुरक्षाबलों के तलाश और घेराबंदी अभियान के दौरान आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में मेजर समेत चार जवान शहीद हो गए। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर पुलवामा के पिंगलन गांव में राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), जम्मू कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने संयुक्त अभियान शुरू किया था।

सुरक्षाबलों के जवान जब गांव से बाहर निकलने के रास्ते बंद कर रहे थे तो वहां छुपे आतंकवादियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दी। गोलीबारी में मेजर समेत सुरक्षाबलों के तीन जवान घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सूत्रों ने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों को भेजा गया है। आतंकवादियों के गांव से बाहर निकलने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। अंतिम सूचना मिलने तक दोनों ओर से लगातार गोलीबारी जारी है। सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद के दो से तीन आतंकवादी छुपे हुए हैं। किसी भी प्रदर्शन को टालने के लिए आसपास के गांवों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों और पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। साथ ही इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार के आत्मघाती हमले से सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। सेना पर हुए इस बड़े हमले से पूरे देश का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ है कि अब पुलवामा में एनकाउंटर के दौरान चार सुरक्षा बल शहीद हो गए। देश के लोग शहीद जवानों की शहादत का बदला मांग रहा है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को यकीन दिलाया है कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।
2/18/2019 06:11:00 AM

पुलवामा हमले का राज़ खोलेगा जैश को मना कर चुका यह युवक और लाल ईको कार

जम्मू-कश्मीर। पुलवामा में हुए आतंकी हमले की कड़ी को सुलझाने में जांच एजेंसियां लगी हुई हैं. इसमें लाल रंग की ईको कार और एक युवक आरजू बशीर दो महत्त्वपूर्ण कड़ियां हो सकते हैं. दरअसल, सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज 18 को बताया, 'घटना के पहले बस नंबर 4 और 2 में बैठे जवानों ने हमलावर आदिल डार को लाल रंग की ईको कार में तीसरे नंबर की बस के पास आते हुए देखा था. वह कार को लगातार दाएं और बाएं मोड़ रहा था. तीसरे नंबर की बस के सुरक्षाकर्मी लगातार उसे दूर जाने को कह रहे थे, लेकिन करीब दो मिनट तक बस के साथ चलने के बाद कार को आदिल डार ने बस में भिड़ा दिया.
सीआरपीएफ के जवानों ने न्यूज 18 को बताया कि लाल रंग की ईको कार ने जम्मू से ही काफिले का पीछा करना शुरू कर दिया था. वह सबसे पिछली बस में कार को भिड़ाना चाहता था, लेकिन वह जब ऐसा नहीं हो पाया तो उसने तीसरे नंबर की बस को टक्कर मार दी. इस घटना में 40 सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गई.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक टीम और एनआईए को घटनास्थल से ईको कार का एक बंपर मिला जो कि चश्मदीदों की बताई हुई बात से मेल खाती है. जांच अधिकारी इस बात का भी पता लगाने में लगे हैं कि डार को विस्फोटक कहां से मिला? इस सवाल का जवाब संभवतः आरजू बशीर के पास है जिससे कभी जैश-ए-मोहम्मद ने उसी काम के लिए संपर्क किया था, जिसे अब आदिल डार ने अंजाम दिया.
बशीर ने 2017 में पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने कहा था कि जैश-ए-मोहम्मद ने सेना के काफिले पर हमला करने के लिए उससे संपर्क किया था. एक अधिकारी ने बताया कि जैश के जिस आदमी ने आरजू से संपर्क किया था और जिसने डार को विस्फोटक उपलब्ध कराया उसमें अगर कोई संबंध निकलता है तो इससे पुलवामा हमले के कई राज़ खुल सकते हैं.
इसी साल 26 जनवरी को मारे गए मुफ्ती अब्दुल्ला के तार भी इस घटना से जुड़े हुए नज़र आ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि श्रीनगर के बाहरी इलाके में खुनमू में मारा गया अब्दुल्ला आईईडी बनाने में काफी एक्सपर्ट था. इनकाउंटर के बाद जहां वह रहता था वहां काफी मात्रा में आईईडी बरामद हुआ था. न्यूज 18 को एक अधिकारी ने बताया, 'हम लोग इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जो विस्फोटक पुलवामा हादसे में प्रयोग किया गया क्या वह अब्दुल्ला के पास से बरामद किए गए आईईडी से मिलता-जुलता है या नही?' हालांकि, इस मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार है.
2/18/2019 06:06:00 AM

पुलवामा अटैक: दो साल में छह बार हिरासत में लिया गया था आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार

श्रीनगर। जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकवादी हमले को अंजाम देने वाला जैश-ए-मोहम्‍मद आतंकी आदिल अहमद डार सितंबर 2016 से मार्च 2018 के बीच छह बार पत्‍थरबाजी और आतंकवादी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा की मदद के आरोप में हिरासत में लिया गया था। हालांकि, हर बार आदिल अहमद को बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया।
आईबी और पुलिस के अधिकारियों ने हमारे सहयोगी अखबार मुंबई मिरर को इसकी जानकारी दी। पुलवामा जिले के गुंडीबाग गांव का रहने वाला आदिल दो साल के अंदर छह बार हिरासत में लिया गया, जो दर्शाता है कि वह एक ऐसा शख्‍स था जिस पर सुरक्षा एजेंसियों को नजर रखने की जरूरत थी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्‍या खुफिया खामियों की वजह से वह सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने में सफल रहा।
हालांकि, दोनों अधिकारियों ने स्‍पष्‍ट किया कि आदिल पर कभी भी औपचारिक रूप से आरोप नहीं लगाया और न ही एफआईआर दर्ज की गई। बता दें किपुलवामा आदिल ने 150 किलोग्राम विस्‍फोटक के साथ अपनी कार को जम्‍मू-कश्‍मीर नैशनल हाइवे पर सीआरपीएफ की बस से टकरा दी थी। इसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। पुलवामा के पुलिस अधिकारी ने बताया कि आदिल ने वर्ष 2016 में एक ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में काम करना शुरू किया था।
उन्‍होंने बताया कि आदिल लश्‍कर आतंकियों को छिपने में मदद करता था। इसके अलावा वह लश्‍कर कमांडरों और उनके साथ जुड़ने की इच्‍छा रखने वाले स्‍थानीय युवकों के बीच मध्‍यस्‍थ का काम भी करता था। अधिकारी ने बताया कि आदिल के परिवार के कुछ सदस्‍यों के आतंकवादियों के संबंध हैं। अधिकारी ने कहा, 'आदिल के जैश से जुड़ने से पहले हमने उसे सुरक्षा बलों पर पत्‍थर फेंकने के आरोप में दो बार हिरासत में लिया था। इसके अलावा लश्‍कर आतंकियों को सहयोग देने के आरोप में उसे 4 बार हिरासत में लिया गया था।'
आदिल के जैश से जुड़ने से पहले उसे सुरक्षा बलों पर पत्‍थर फेंकने के आरोप में दो बार हिरासत में लिया गया था। साथ ही लश्‍कर आतंकियों को सहयोग देने के आरोप में उसे 4 बार हिरासत में लिया गया था।
अधिकारी ने कहा कि आदिल ने सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में हिस्‍सा लिया था, जिसमें वह घायल हो गया था। उधर, आईबी के अधिकारी ने बताया कि आदिल मंजूर से बहुत ज्‍यादा प्रभावित था। मंजूर की मौत के बाद वह पूरी तरह से आतंकवादियों के साथ मिल गया। उन्‍होंने कहा, 'एक शीर्ष लश्‍कर कमांडर के साथ मंजूर की मौत के बाद आदिल अपने गृह कस्‍बे से लापता हो गया। उसे और कुछ अन्‍य स्‍थानीय युवकों को पाकिस्‍तान के जैश कमांडर ओमर हाफिज ने ट्रेनिंग दी। उसे कामरान और अब्‍दुल राशिद के नाम से भी जाना जाता है।'
आईबी अधिकारी ने बताया कि हाफिज पिछले साल घाटी में आया था और उसे आत्‍मघाती हमले के लिए ट्रेनिंग देने का काम दिया गया था। उन्‍होंने कहा, 'नए लोगों को लश्‍कर-ए-तैयबा में शामिल होने के लिए शर्त है कि उन्‍हें पुलिसवालों की हत्‍या या उनकी बंदूक को छीनना होगा। इससे आदिल लश्‍कर से न जुड़कर जैश-ए-मोहम्‍मद में शामिल हो गया, जहां ऐसी कोई शर्त नहीं है।' जैश ने पहले 9 फरवरी को अफजल गुरु की मौत के दिन इस हमले को अंजाम देने की साजिश रची थी, लेकिन खराब मौसम के कारण ऐसा नहीं हो सका।

Sunday, February 17, 2019

2/17/2019 07:04:00 AM

राजौरी में IED ब्‍लास्‍ट में सेना अधिकारी शहीद, LOC पर तलाशी के दौरान धमाका

राजौरी। पुलवामा हमले के 50 घंटे बाद ही सीमा पर नौशहरा के झंगड़ सेक्टर में आइईडी विस्फोट में एक मेजर शहीद हो गए। वहीं, एक जवान गंभीर रूप से घायल हुआ है। इसके अलावा नौशहरा के ही बाबा खोड़ी सेक्टर में पाक की ओर से दागे गए स्नाइपर शॉट में एक जवान को गंभीर रूप से घायल हो गया। शहीद मेजर की पहचान चित्रेश सिंह बिष्ट निवासी देहरादून, उत्तराखंड के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सात मार्च को मेजर चित्रेश की शादी होनी थी। इसके अलावा दोनों घायल जवानों को सैन्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।आइईडी विस्फोट के पीछे पाक की बैट टीम का हाथ होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। भारतीय सेना भी पाक सेना को कड़ा जवाब दे रही है। देर शाम तक दोनों तरफ से भारी गोलाबारी जारी रही। सूत्रों के अनुसार, पाक की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) ने सीमा से 200 से 300 मीटर अंदर आकर आइईडी लगाई थी।शनिवार शाम करीब चार बजे भारतीय सेना के जवानों ने नियंत्रण रेखा पर अग्रिम चौकियों के पास हलचल देखी। इस पर उन्होंने सर्च अभियान शुरू कर दिया। इस दौरान इंजीनियर यूनिट में तैनात सेना के मेजर ने कुछ संदिग्ध वस्तु देखी। वह अपने उपकरण से उसकी जांच कर ही रहे थे कि पास ही छिप कर बैठे पाक सेना के जवानों या बॉर्डर एक्शन टीम के सदस्यों ने रिमोट से आइईडी को ब्लास्ट कर दिया। इस विस्फोट में मेजर घटना स्थल पर ही शहीद हो गए, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। सोची समजी साजिश का हिस्सा था
आइईडी धमाका-
झंगड सेक्टर में आइईडी धमाका एक सोची समझी साजिश का हिस्सा था। पहले कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले में 40 जवानों की शहादत और अब सीमा पर आइइडी विस्फोट में मेजर का बलिदान। माना जा रहा है कि पाक सेना भारतीय सेना को उकसाने वाली कार्रवाई कर रही है, ताकि वह हड़बड़ाहट में कोई हरकत करे।
पिछले महीने भी मेजर और तीन जवान हुए थे शहीद-
पाक सेना और बॉर्डर एक्शन टीम के सदस्यों ने 11 जनवरी को लाम सेक्टर में भी भारतीय क्षेत्र के अंदर आकर आइईडी लगा दी थी। जिसके चलते तीन जवान मौके पर शहीद हो गए थे। वहीं, मेजर के घटना स्थल पर पहुंचते ही दूसरा धमका कर दिया गया था, जिसमें मेजर भी शहीद हो गए थे।

Friday, February 15, 2019

2/15/2019 06:32:00 AM

CRPF के काफिले पर बड़ा हमला, IED ब्लास्ट के बाद फायरिंग में सेना के 42 जवान शहीद यह है शहीदों के नाम

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पुलवाया के अवंतीपुरा में गुरुवार की दोपहर में हुए आतंकी हमले में जिस CRPF के काफिले में शामिल जिस बस को निशाना बनाया गया, उसमें सवार 42 बहादुर जवान शहीद हो गए। पुलवामा का रहने वाला आतंकी आदिल अहमद डार पिछले साल ही जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुआ था और उसी ने यह आत्मघाती हमले को अंजाम दिया। आदिल ने हमले के लिए जिस एसयूवी कार का इस्तेमाल किया था, उसमें 200 किलोग्राम विस्फोटक भरा हुआ था। इस आतंकी ने अपनी कार बस से टकरा दी। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि बस के परखच्चे उड़ गए और करीब 5 किलोमीटर तक इसकी आवाज सुनी गई। विस्फोट करने के बाद कुछ आंतकियों ने गोलियां चलाईं, हेंड ग्रेनेड फेंके और रॉकेट लांचर से भी हमला किया। 
जैश ने ली हमले की जिम्मेदारी-
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। बताया जा रहा है कि आदिल अहमद डार नाम के आतंकी ने इस काफिले पर हमले की साजिश रची थी। आदिल पुलवामा के काकापोरा इलाके का रहने वाला है। सीआरपीएफ की 54वीं बटैलियन के जवानों को इस हमले में आतंकियों ने निशाना बनाया। गुरुवार शाम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों पर अवंतिपोरा के गरीपोरा के पास हमला किया गया।
सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने इस इलाके में पहले हाइवे खड़ी एक कार में प्लांट की गई आईईडी में ब्लास्ट किया और फिर सीआरपीएफ जवानों के वाहनों पर ऑटोमैटिक हथियारों से फायरिंग की गई। इस हमले में सीआरपीएफ का वाहन भी आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गया। हमले के बाद जवानों को तुरंत श्रीनगर के हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का काम शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि काफिले की जिस बस को आतंकियों ने निशाना बनाया, उसमें 42 जवान सवार थे।
सीआरपीएफ के काफिले में 70 गाड़ियां-
दर्जनों घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराकर उनका इलाज किया जा रहा है। इनमें से कई जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जिस काफिले पर यह हमला हुआ, वह जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था और इसमें 2 हजार से अधिक जवान शामिल थे। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सीआरपीएफ के जिस काफिले पर हमला किया गया, उसमें 70 वाहन शामिल थे। इन्हीं में से एक गाड़ी आतंकियों के निशाने पर थी। सीआरपीएफ जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर आ रहा था। हमले के बारे में सीआरपीएफ के आईजी जुल्फिकार हसन ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस जांच कर रही है। घायल जवानों को अस्पताल शिफ्ट किया गया है और विस्फोट स्थल पर छानबीन की जा रही है।
दक्षिण कश्मीर में अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी-
इस हमले की जानकारी मिलने के बाद तत्काल पुलवामा में मौजूद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की अन्य कंपनियों को अवंतिपोरा भेजा गया। आतंकी वारदात के बाद सेना ने फिलहाल जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर ट्रैफिक बंद करते हुए अवंतिपोरा और आसपास के इलाकों में बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। इसके अलावा पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और श्रीनगर जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। हमले में घायल जवानों का इलाज लगातार जारी है और एजेंसियों के अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
पहले भी आतंकी निशाने पर आए थे जवान-
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर गुरुवार को हुआ यह हमला आतंकी हमले की पहली वारदात नहीं है। एक साल पहले 15 फरवरी 2019 को भी आतंकियों ने पुलवामा के पंजगाम स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक कैंप पर हमला किया था। इस वारदात के दौरान आतंकियों ने सीआरपीएफ के शिविर पर हमला कर कैंप में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन जवानों की सतर्कता के कारण कामयाब नहीं हो सके थे।
सीआरपीएफ के काफिले में शामिल बस में जो 42 बहादुर सैनिक शहीद हुए हैं उनकी लिस्ट इस प्रकार है...
शहीद हुए CRPF के 42 शहीदों की संपूर्ण लिस्ट
1. जयमाल सिंह - 76 बटालियन
2. नसीर अहमद - 76 बटालियन
3. सुखविंदर सिंह - 76 बटालियन
4. रोहिताश लांबा - 76 बटालियन
5. तिकल राज - 76 बटालियन
6. भागीरथ सिंह - 45 बटालियन
7. बीरेंद्र सिंह - 45 बटालियन
8. अवधेष कुमार यादव - 45 बटालियन
9. नितिन सिंह राठौर - 3 बटालियन
10. रतन कुमार ठाकुर - 45 बटालियन
11. सुरेंद्र यादव - 45 बटालियन
12. संजय कुमार सिंह - 176 बटालियन
13. रामवकील - 176 बटालियन
14. धरमचंद्र - 176 बटालियन
15. बेलकर ठाका - 176 बटालियन
16. श्याम बाबू - 115 बटालियन
17. अजीत कुमार आजाद - 115 बटालियन
18. प्रदीप सिंह- 115 बटालियन
19. संजय राजपूत- 115 बटालियन
20. कौशल कुमार रावत- 115 बटालियन
21. जीत राम- 92 बटालियन
22. अमित कुमार- 92 बटालियन
23. विजय कुमार मौर्य - 92 बटालियन
24. कुलविंदर सिंह - 92 बटालियन
25. विजय सोरंग - 82 बटालियन
26. वसंत कुमार वीवी - 82 बटालियन
27. गुरु एच - 82 बटालियन
28. सुभम अनिरंग जी - 82 बटालियन
29. अमर कुमार - 75 बटालियन
30. अजय कुमार - 75 बटालियन
31. मनिंदर सिंह - 75 बटालियन
32. रमेश यादव - 61 बटालियन
33. परशाना कुमार साहू - 61 बटालियन
34. हेमराज मीना - 61 बटालियन
35. बाबला शंत्रा - 35 बटालियन
36. अश्वनी कुमार कोची - 35 बटालियन
37. प्रदीप कुमार - 21 बटालियन
38. सुधीर कुमार बंशल - 21 बटालियन
39. रविंदर सिंह - 98 बटालियन
40. एम बाशुमातारे - 98 बटालियन
41. महेश कुमार - 118 बटालियन
42. एनएल गुर्जर - 118 बटालियन





Wednesday, February 6, 2019

2/06/2019 03:02:00 PM

जम्मू-कश्मीर सहित भारत के कई राज्यों में भूकंप के झटके हुए महसूस

दिल्ली। हिमाचल, जम्मू कश्मीर के अलावा पंजाब में भी मंगलवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। हिमाचल के लाहुल-स्पीति जिला के उदयपुर व केलंग में दोपहर 3ः55 बजे और मंडी जिले में शाम 7ः33 बजे भूकंप के झटके महसूस हुए। लाहुल में भूकंप के झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.2 मापी गई है, जबकि मंडी में शाम 7ः33 बजे आए झटकों की तीव्रता 3.8 मापी गई है। वहीं, जनवरी में भी उदयपुर में 12 भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उपायुक्त लाहुल-स्पीति ने भूकंप के झटकों की पुष्टि की है। उनका कहना है कि इससे किसी भी तरह से नुकसान की सूचना नहीं है।
कश्मीर में भी महसूस हुए झटके-
कश्मीर में मंगलवार को दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि इससे किसी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि पहला झटका शाम 7ः09 बजे श्रीनगर समेत वादी के विभिन्न हिस्सों में महसूस किया गया। इससे लोग डर गए और कई अपने घरों से बाहर निकल आए, लेकिन जल्द ही स्थिति सामान्य हो गई। उन्होंने बताया कि इसके बाद रात 10ः18 बजे भूकंप से फिर धरती डोली। इसका असर जम्मू संभाग के डोडा में भी महसूस किया गया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई। दोनों बार भूकंप का केंद्र बांडीपोरा से करीब 80 किलोमीटर दूर गुलाम कश्मीर में जमीन के 40 किलोमीटर अंदर था।
चंडीगढ़ में चार से पांच मिनट तक महसूस हुए झटके-
चंडीगढ़ में भी मंगलवार रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप का पता चलते ही लोग अपने ऑफिस और घरों से बाहर की तरफ दौड़े। यह झटके 4 से 5 मिनट तक महसूस किए गए। रात 10ः20 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। वहीं, पंजाब में भी रात रात 10ः17 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमान पर 6.5 मापी गई। हालांकि इससे जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।