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Thursday, July 23, 2020

7/23/2020 06:02:00 AM

सरपंच की कोठी में चल रही थी अवैध शराब फैक्ट्री, लाखों का माल मिला, 3 गिरफ्तार

ग्वालियर। सरपंच की कोठी में चल रही थी अवैध शराब फैक्ट्री। आबकारी विभाग सोता रहा और पुलिस ने अवैध शराब फैक्ट्री पर छापा मारकर लाखों का माल, शराब बनाने और पैकेजिंग करने वाली मशीन जब्त की है। मौके से 3 हजार खाली चप्पे भी बरामद किए हैं। यह पूरा रैकेट शराब कारोबारी पंकज शिवहरे का है। इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं। शराब कारोबारी, सरपंच मुरारी किरार सहित 4 लोगों की तलाश जारी है। पूरा खुलासा बुधवार सुबह गुठीना चेकिंग प्वाइंट पर पकड़ी गई ओपी से भरी गाड़ी के बाद पुलिस कर सकी। यह पुलिस के लिए बड़ी सफलता है।
एसपी ग्वालियर नवनीत भसीन ने बताया कि महाराजपुरा थाना पुलिस ने बुधवार सुबह ओपी (शराब बनाने में आवश्यक तरल सामग्री) से भरी लोडिंग पकड़ी थी। यहीं से इनपुट मिला था कि यह माल भिंड के मालनपुर से बिजौली के सिंगारपुरा में सरपंच की कोठी पर जा रहा था। इसके बाद महाराजपुरा सर्कल के पुलिस अफसरों की टीम तैयार कर कड़ी कार्रवाई के लिए भेजी गई। पुलिस की टीमें सिंगारपुरा में मुख्य मार्ग पर हंसराज ढाबा के पीछे सरपंच मुरारी किरार की कोठी पर दबिश दी। यहां जब पुलिस पहुंची तो पुलिस अफसरों की आंखें खुली रह गईं। कोठी में सामान्तर अवैध शराब की फैक्ट्री चल रही थी। कोठी में शराब बनाने की मशीन, पैकेजिंग की मशीन के अलावा 2 ड्रम ओपी से भरे हुए और 3 हजार चप्पे जिन पर डिस्टलरी के जैसे रैपर लगे हुए थे। पुलिस ने सारा माल जब्त किया है। इसके अलावा यहां से खेराखड़ हाल विनय नगर निवासी अभिषेक राजपूत, मिथलेश राजपूत और सुनील राजपूत को गिरफ्तार किया है। सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
कोठी सरपंच की खेल शराब कारोबारी का
पुलिस ने जब पड़ताल शुरू की तो पता लगा कि शराब फैक्ट्री सरपंच मुरारी किरार की कोठी में चल रही थी पर यह खेल पूरा सागरताल निवासी शराब कारोबारी पंकज शिवहरे का था। वही सारी कच्ची सामग्री उपलब्ध कराता था। चप्पे से लेकर ओपी तक वही पहुंचाता था। तैयार माल को खपाने की जिम्मेदारी भी उसकी होती थी। शराब बनाने का पूरा काम मुरैना के दो कारीगर करते थे। पुलिस को सरपंच, शराब कारोबारी और मुरैना के दोनों कारीगरों की तलाश है।
यहां से मिला क्लू
बुधवार सुबह पुलिस महाराजपुरा के गुठीना के पास चेकिंग कर रही थी तभी भिंड की ओर से एक लोडिंग क्रमांक एमपी07 एल-0853 आते हुए दिखाई दी। पुलिस को देख लोडिंग से 2 युवक कूदकर भाग गए। पुलिस ने तत्काल लोडिंग को घेरकर पकड़ लिया। जब लोडिंग की तिरपाल खुलवाई तो अंदर 4 ड्रम व 11 केन में लगभग 1200 लीटर ओपी मिली थी। जिसकी कीमत 3 लाख रुपये बताई गई थी। इस माल के साथ लोडिंग से चालक लक्ष्मण चौरसिया पुत्र गोपाल चौरसिया निवासी गुढ़ा गुढ़ी का नाका को पकड़ा गया है। जिसने माल मालनपुर से सिंगारपुरा जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने यह पूरा खुलासा किया।

Sunday, May 31, 2020

5/31/2020 07:10:00 AM

उपचुनावों के घमासान से पहले BJP में अब कहां हैं सिंधिया, 16 सीटें जिताने की जिम्मेदारी महाराज पर

ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इन दिनों बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को लेकर लगाए गए उस पोस्टर के काफी चर्चे हैं जिसमें पूछा जा रहा है कहां गायब हैं सिंधिया? लापता सिंधिया के ये पोस्टर बेशक सियासत का हिस्सा हैं लेकिन सवाल जायज भी है कि वाकई बीजेपी में अब कहां हैं सिंधिया और एमपी की 24 सीटों के उपचुनाव हो जाने के बाद कहां होंगे?
24 में से ग्वालियर चंबल की 16 सीटें जिताने की नैतिक जिम्मेदारी सिंधिया के कंधों पर है जिसमें से 14 सीटें तो सीधे तौर पर सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों से जुड़ी हैं. बाकी मध्य, मालवा, बुंदेलखंड की पांच सीटें अलग. चुनाव के पहले चुनौती ये कि इनमें से कितने पूर्व विधायकों को सिंधिया मंत्री पद की शपथ दिलवा पाते हैं. फिर उन्हें चुनाव मैदान तक पहुंचाने की चुनौती अलग है. उम्मीदवार बनाए गए तो इनमें से 80 फीसद को जिताना भी है. सिंधिया के लिए बड़ा इम्तिहान बीजेपी के साथ जनता को ये बताना भी है कि वो शिवराज के मुकाबले के जननेता हैं. भीड़ उनके चेहरे पर भी जुटती है. क्या सिंधिया के ये इम्तिहान चुनाव के बाद भी खत्म हो पाएंगे?
राजनीति कयासों पर चलती है. लिहाजा इनकार नहीं किया जा सकता कि सिंधिया समर्थकों की वजह से बीजेपी में अगर बगावत बढ़ती है, तो बागी फिर मैदान में आएंगे और ये बागी चुनाव जीत गए तो तय है कि बीजेपी से हाथ भी मिलाएंगे. उस सूरत में सिंधिया क्या अपना रुतबा कायम रख पाएंगे. सवाल ये भी है कि बीजेपी वक्त देखकर दूल्हा किसी को भी बनाए. दामाद नहीं बनाती. चौधरी राकेश सिंह, प्रेमचंद गुड्डू , रामलखन सिंह, हरिवल्लभ शुक्ला, फूल सिंह बरैया, बालेंदू शुक्ला, लक्ष्मण सिंह...लंबी फेहरिस्त हैं ऐसे नामों की जो दूल्हा बनकर गए थे और बाराती बनकर कांग्रेस में लौट आए. तो 24 सीटों के उपचुनाव पर टिकी सिंधिया की सियासत क्या उनका ही सियासी भविष्य तय कर देगी और सवाल ये भी कि क्या अग्निपथ पर चल पड़े हैं सिंधिया?
दरअसल, इस वक्त बीजेपी एक तरह से चिंतामुक्त है. उसे पता है कि उपचुनाव जिताने की उससे ज्यादा चिंता सिंधिया को है. आलम ये है कि बीजेपी जानती है कि यदि सिंधिया बहुमत के आंकड़े के आगे भी निकलवा देते हैं और उसके बाद भी यदि दस सीटों पर उम्मीदवार हार जाते हैं तो भी सिंधिया वैसे ताकतवर नहीं रह जाएंगे, जैसे अभी खुद को वे और उनके समर्थक प्रोजेक्ट कर रहे हैं. यानी बीजेपी के इस वक्त दोनों हाथों में लड्डू हैं. वो बखूबी ये जानती है कि कांग्रेस छोड़ने के बाद सिंधिया के रास्ते उसी लड़की की तरह बंद हो गए हैं, जो प्रेमी के साथ घर से लड़-झगड़ कर भाग आती है. हां, यदि ये चुनाव सिंधिया अपने जलवे से जिता लाते हैं, तब जरूर ग्वालियर चंबल की सियासत नई करवट लेगी. तब नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा , जयभान सिंह पवैया जैसे नेताओं को भी न चाहते हुए सिंधिया के लिए बाहें भी फैलानी होंगी और उनके निर्णयों के साथ सहमति भी रखना होगा. वैसे ये अभी बहुत दूर की कौड़ी है.

Saturday, May 23, 2020

5/23/2020 05:10:00 AM

सिंधिया पर BJP ने घुमाई जादुई छड़ी, बागी EX MLA को मंत्री पद और टिकट दिलाने की जिद छोड़ी- सूत्र

ग्वालियर। मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल लाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनके 22 समर्थक पूर्व विधायक और सिंधिया के पीछे-पीछे आँख बंद कर चलने वाले करीब 200 कार्यकतार्ओं को आखिर भाजपा की चाल और चक्रव्यूह के आगे झुकना पड़ा है। जो बागी पूर्व विधायक कल तक हर हाल में विधानसभा चुनाव लड़ने की ताल ठोक रहे थे, आज उनके सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं, वहीं जो ज्योतिरादित्य सिंधिया कल तक बीजेपी को अपनी उँगलियों पर नचाने का दम भर रहे थे, वो भी अब बीजेपी और आरएसएस की शर्तों पर खुद ता-ता-थैया कर रहे हैं विधानसभा उपचुनाव को लेकर किए गए बीजेपी के आंतरिक सर्वे ने तो सिंधिया की पूरी बाजी ही पलट कर रख दी है। सर्वे की मानें तो जहां 19 सीटों पर बागियों की पराजय निश्चित है, वहीं तीन सीटों पर भी कांटे का मुकाबला देखने को मिलेगा। खरीद-फरोख्त के अतिरिक्त दो सदस्यों की मृत्यु के कारण खाली हुई सीट जौरा और आगर को तो पहले ही कांग्रेस की पक्की सीट माना जा रहा था, और अब इनके साथ 19 सीट और जुड़ने से कांग्रेस का पक्ष जहां बेहद मजबूत हो चुका है, वहीं बीजेपी के सामने कुआं और खाई में से किसी एक को चुनने का संकट चल रहा है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए इन 22 बागियों का टिकट कटना उनकी राजनीतिक सौदेबाजी की कीमत का शून्य होने जैसा है परन्तु यदि टिकट नहीं कटता है तो बीजेपी सरकार का भविष्य शून्य होना निश्चित है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी संगठन और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच बागियों को टिकट नहीं देने के सम्बन्ध में तीन दौर की बातचीत हो चुकी है और बहुत जल्द इसकी औपचारिक घोषणा भी कर दी जाएगी। दोनों के बीच तय नए फार्मूले के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा जाने और उनके केन्द्र में मंत्री बनने के मार्ग में इससे कोई रुकावट नहीं आएगी, और अब जल्द ही सिंधिया केन्द्र में मंत्री बन भी जाएंगे।

Friday, May 22, 2020

5/22/2020 04:39:00 AM

विधानसभा उपचुनाव : सिंधिया के क्षेत्र में सेंध लगाने के लिए कमलनाथ ने खेला ये बड़ा दांव

ग्वालियर. कोरोना काल में मध्य प्रदेश की सियासत अब उपचुनाव पर केंद्रित हो रही है। यही कारण है कि कांग्रेस ने उपचुनाव वाले इलाकों में अपने संगठन को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है, खासकर सिंधिया के सियासी असर वाले इलाके में।
दरअसल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जानते हैं कि उपचुनाव में अगर कमल अर्थात बीजेपी को हराना है तो सिंधिया के सियासी असर वाले इलाकों में संगठन को मजबूत करना ही होगा। यही कारण है कि बुधवार को कमलनाथ ने सियासी मैदान में अपनी 'टीम-11' उतार दी।
दरअसल, कमलनाथ की रणनीति है कि टीम-11 के जरिए चंबल-ग्वालियर संभाग की विधानसभा सीटों के उपचुनाव में फतह हासिल करना। ये वो इलाके हैं, जहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का खासा सियासी असर है।
सिंधिया के इलाके में कांग्रेस का बड़ा दांव:-
ग्वालियर ग्रामीण में अशोक सिंह को जिला अध्यक्ष नियुक्त कर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है। प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह को ग्वालियर ग्रामीण की कमान सौंपकर पार्टी ने साफ संदेश दे दिया है कि उपचुनाव से पहले पार्टी हर क्षेत्र में संगठन को मजबूत करेगी। यही नहीं, कांग्रेस ने सिंधिया के सबसे ज्यादा प्रभाव वाले गुना जिले की शहर और ग्रामीण इलाकों में भी नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए हैं।
24 सीटों पर होना है उपचुनाव:-
मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होना है। 24 में से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग से आती हैं। माना जाता है कि इन सीटों पर सिंधिया का खासा सियासी प्रभाव है। साथ ही कांग्रेस को पता है कि अगर फिर से सत्ता में वापसी करना है तो सिंधिया के इलाके में सेंध लगाना ही होगा। यही कारण है कि उपचुनाव में बीजेपी को परास्त करने के लिए कमलनाथ ने अपनी टीम-11 मैदान में उतारी है और इनके कंधे पर एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

Tuesday, May 19, 2020

5/19/2020 08:05:00 AM

सिंधिया BJP छोड़ कांग्रेस में लौटेंगे? एक ट्वीट से चर्चाएं हुई गर्म, पर कुछ और निकली सच्चाई

ग्वालियर। क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी छोड़ने वाले हैं? क्या दो महीने में ही उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया है? क्या सिंधिया कांग्रेस में घरवापसी कर रहे हैं? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके चलते मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में बीते दो दिनों से लगातार सरगर्मी बनी हुई है। कांग्रेस, बीजेपी या खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ओर से इन सवालों पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कयासों का दौर थमने का नाम नही ले रहा है।
ट्वीट से हुई शुरुआत:-
सिंधिया को लेकर इन सवालों की शुरुआत एक ट्वीट से हुई। एक न्यूज चैनल के पैरोडी अकाउंट से किए गए ट्वीट में बताया गया कि सिंधिया प्रदेश कैबिनेट में अपने समर्थकों को मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। उन्हें खुद भी केंद्र में मंत्री बनाने का वादा किया गया था, लेकिन ये अब तक पूरा नहीं हुआ और वे जल्द ही बीजेपी छोड़ कांग्रेस में घरवापसी कर सकते हैं।
वायरल ट्वीट से हलचल:-
इस ट्वीट को कुछ घंटों के अंदर ही करीब 12 हजार लोगों ने लाइक किया। राजनीतिक कानाफूसी भी तेज हो गई क्योंकि ट्वीट में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान पर सिंधिया के साथ धोखा करने का आरोप लगाया गया था। इसमें यह भी कहा गया था कि सिंधिया सोमवार तक दोबारा कांग्रेस ज्वाइन कर सकते हैं। लोग इस संभावना के आधार पर प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के भविष्य को लेकर भी कमेंट करने लगे। वहीं, कुछ लोग प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी के कयास भी लगाने लगे।
यहां हुई गड़बड़:-
ट्वीट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। अधिकांश लोग सिंधिया के साथ बीजेपी पर भी फिकरे कसने लगे। प्रतिक्रिया देने की जल्दी में यूजर्स ने ट्वीट करने वाले अकाउंट की सत्यता पर ध्यान नहीं दिया। उस अकाउंट के साथ लगी तस्वीर में ही स्पष्ट किया गया है कि यह न्यूज चैनल का फर्जी अकाउंट है।
कांग्रेस का हाथ:-
बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहायक ने भी ट्वीट के फर्जी और भ्रामक होने की पुष्टि की। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि यह जानबूझकर किया जा रहा है। उन्होंने मीडिया में आई कुछ अन्य खबरों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की आईटी सेल सिंधिया के बारे में झूठी खबरें प्रसारित कर रहा है। उन्होंने सिंधिया की घरवापसी की किसी भी संभावना को भी सिरे से नकार दिया।
होली के दिन बीजेपी में हुए शामिल:-
मध्य प्रदेश के गुना से पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया करीब 18 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद करीब दो महीने पहले होली के दिन बीजेपी में शामिल हुए थे। उनके साथ एमपी में कांग्रेस के 22 विधायकों ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी की सदस्यता ले ली थी। सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने से कमलनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार संकट में आ गई और उसे इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

Monday, May 18, 2020

5/18/2020 09:46:00 PM

MP-UP सीमा पर कामगारों का बवाल, झांसी में घुसने से रोका तो किया पथराव

ग्वालियर/रीवा। देश के कई राज्यों से मध्य प्रदेश होकर यूपी लौट रहे कामगारों को रोके जाने से शनिवार-रविवार को दोनों राज्यों की चार बॉर्डर पर बवाल हुआ। झांसी की रक्सा, दतिया की चिरुला, शिवपुरी की दिनारा व रीवा की चाक घाट पर उग्र श्रमिकों ने हंगामा किया। रक्सा व चाक घाट पर पथराव के बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर हालात काबू में किए।
आखिरकार यूपी प्रशासन ने रक्सा, दिनारा व चिरुला में प्रवासी मजदूरों व अन्य लोगों को प्रवेश व बसें भेजकर आने की इजाजत दी तब स्थिति सामान्य हुई। उधर रीवा में बसें कम भेजने पर कामगारों ने पथराव किया और फिर बेरिकेड तोड़कर यूपी में चले गए।
यूपी पुलिस ने रोका था शनिवार रात को:-
यूपी पुलिस ने श्रमिकों व अन्य लोगों से भरे वाहनों को झांसी के रक्सा और मप्र के दतिया की चिरुला और शिवपुरी की दिनारा बॉर्डर पर रोक दिया था। पुलिस का कहना था कि निजी वाहन से किसी भी मजदूर को नहीं जाने दिया जाएगा। यह कदम औरेया हादसे में 26 श्रमिकों की मौत के बाद उठाया गया था, लेकिन मजदूरों का कहना था कि वे अपने वाहनों को छोड़कर नहीं जाएंगे।
इसी बात को लेकर तीनों सीमाओं पर हंगामे की स्थिति बनी और झांसी में कोटा-शिवपुरी हाइवे पर 10 किमी लंबा और शिवपुरी के सिकंदरा बैरियर तथा दतिया के चिरुला बॉर्डर पर वाहनों की पांच कि मी लंबा जाम लग गया।
सुबह 10 बजे बाद रवानगी:-
रक्सा बॉर्डर के हालात पर नजर व नियंत्रण के लिए झांसी के कलेक्टर आंद्रा वामसी सहित जिले का पुलिस बल रविवार सुबह से ही मौके पर डटा था बवाल की सूचना मिलने पर दतिया और शिवपुरी पुलिस के अधिकारियों ने यूपी के अधिकारियों से बातचीत की। सुबह 10 बजे के बाद बसों से मजदूरों को यूपी में उनके जिलों तक रवाना किया गया। कुछ निजी वाहनों को भी प्रवेश दिया गया।
12 घंटे से अटके श्रमिकों का सूरज के साथ चढ़ा पारा:-
झांसी के अधिकारी प्रवासी मजदूरों को समझा रहे थे कि मजदूरों के लिए दो ट्रेन और कई बसों का इंतजाम किया गया है, तभी 12 घंटे से सड़क पर अटके मजदूरों का पारा सूरज की तपन बढ़ने के साथ चढ़ता चला गया और पथराव व लाठीचार्ज तक स्थिति बनी। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली व राजस्थान के थे श्रमिक यूपी बॉर्डर पर जिन मजदूरों को रोका गया, उनमें अधिकांश मजदूर महाराष्ट्र के नागपुर, नासिक, सांगली व मुंबई के थे।
इनके अलावा दिल्ली व गुजरात के अहमदाबाद और सूरत के अलावा राजस्थान के भी मजदूर शामिल थे। इन मजदूरों व अन्य लोगों को यूपी के कानपुर, ललितपुर और मप्र के छतरपुर, टीकमगढ़, बरुआसागर आदि जगहों पर जाना था।
बातचीत कर निकलवाए वाहन:-
दतिया के एएसपी आरडी प्रजापति ने बताया कि यूपी पुलिस की ओर से वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। सूचना मिलने पर अधिकारी मौके पर पहुंचे और उप्र के अधिकारियों से बातचीत की इसके बाद सभी वाहनों को वहां से निकलवाना शुरू किया।
रीवा में चाकघाट पर पथराव:-
उधर, रीवा के समीप मप्र-उप्र सीमा पर स्थित चाकघाट पर एकत्र करीब 10 हजार प्रवासी मजदूरों ने शनिवार देर रात उस समय हंगामा किया जब उन्हें लेने उप्र से 80 की बजाए 10 बसें ही पहुंचीं। उग्र मजदूरों ने नारेबाजी की और पत्थर फेंके। रीवा के एसपी आबिद खान ने बताया कि करीब 10 हजार श्रमिक चाकघाट बॉर्डर पर एकत्रित हो गए थे।
उन्हें उत्तर प्रदेश भेजने को लेकर प्रयागराज के कलेक्टर और यमुनापार एसपी से बातचीत की थी। उन्होंने 80 बसें भेजने की बात कही थी। बसों का इंतजार करते हुए शनिवार सुबह से शाम हो गई लेकिन उत्तर प्रदेश से बसों की व्यवस्था नहीं हुई। शनिवार रात आठ बजे तक 10 बसों को भेजा गया, जिनसे कुछ श्रमिकों को भेजा गया। बाकी श्रमिक भी दबाव बनाने लगे। इसी बीच हंगामा व पथराव शुरू हो गया।
नाका तोड़ उप्र में घुसे श्रमिक:-
बवाल के बाद चाक घाट बॉर्डर पर मौजूद श्रमिक उप्र पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़कर राज्य की सीमा में चले गए। श्रमिकों का गुस्सा देखकर उप्र पुलिस ने भी उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया। बवाल के बाद रविवार को हालात का जायजा लेने रीवा के आईजी चंचल शेखर व कमिश्नर डॉ. अशोक कुमार भार्गव चाकघाट पहुंचे। जहां उन्होंने श्रमिकों को आश्वासन दिया कि उप्र के बड़े अफसरों से बात हो चुकी है। जल्द ही उनको गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा।
5/18/2020 09:44:00 PM

सिस्टम फेलः कोरोना के चक्कर में डेडहाउस में शवों की कतार, फ्रीजर खराब, दुर्दशा का शिकार

ग्वालियर। कोरोना का असर आमजन पर तो पड़ा ही है, लेकिन मृत शरीर भी कोरोना का दर्द झेलने को मजबूर हैं। जेएएच प्रबंधन ने अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने पर सभी की कोरोना जांच को अनिवार्य कर दिया है, जिससे डेडहाउस में शवों का ढेर लग गया है। जबकि कोरोना की रिपोर्ट जल्दी नहीं आ रही है। इससे पीएम हाउस में तीन-तीन दिन से शव रखे हुए हैं। पहले से अपने के जाने का गम झेल रहे परिजन अब मौत के बाद भी उसका चेहरा नहीं देख पाने से बेहद दुखी हैं। हालत ये है कि लोग अपना गम दिल में छुपाए चेहरे पर मुस्कान बिखेरने को मजबूर हैं। क्योंकि घर पर अब तक किसी को बताया ही नहीं है कि उनका अपना उन्हें छोड़कर जा चुका है।
केस-1
न्यू साकेत नगर हजीरा निवासी आदित्य सेन उम्र 30 साल 8 मई की रात को सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। उनको इलाज के लिए जेएएच के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया था। जहां 14 मई को उनका कोरोना का सैंपल लिया गया था। 15 मई की सुबह मौत हो गई थी। शव को पीएम हाउस पहुंचा दिया गया था। शनिवार तक शव परिजनों को नहीं मिला है।
लापरवाहीः-मृतक की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। इसलिए शव का पीएम तक नहीं हो सका है। रिपोर्ट आने के बाद ही डॉक्टर मृतक का पीएम करेंगे। ऐसे में रविवार को ही शव परिजनों को सौंपा जा सकेगा।
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केस-2
सोनू सखवार निवासी ग्राम भाईघाई का पुरा देवगढ़ मुरैना ने 12 मई को जहर खा लिया था। 13 को उसे हॉस्पिटल रोड स्थित वेदांश हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। यहां पर उसकी मौत हो गई। निजी नर्सिंग होम ने पीएम के लिए शव को जेएएच भेज दिया। पुलिस ने आकर डॉक्टर को बताया कि कोरोना की जांच हुई है। शनिवार तक परिजन रोजाना पीएम के चक्कर लगाते रहे। जब फोरेंसिक साइंस विभाग के एचओडी डॉ एस जुगरान को पता चला तो कैजुअल्टी से खुद ही रिकार्ड निकलवाया गया। पता चला कि कोरोना का सैंपल ही नहीं हुआ है। तब मृतक का पीएम करके शव परिजनों को सौंपा गया।
लापरवाहीः-निजी नर्सिंग होम या कैजुअल्टी को फॉर्म पर लिखना चाहिए था कि सैंपल नहीं हुआ है। साथ ही यह जानकारी पुलिस को भी डॉक्टर को देना जरूरी थी। डॉक्टर रोज रिपोर्ट चेक कर रहे थे, लेकिन मृतक का नाम नहीं होने के कारण शव का पीएम नहीं हो पा रहा था।
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इन मृतकों को भी पीएम का इंतजारः-
-14 मई को एक अज्ञात का शव तिघरा से पीएम हाउस पहुंचा है। कोरोना का सैंपल हुआ है, लेकिन रिपोर्ट नहीं आने के कारण शव अब तक रखा हुआ है।
-15 मई को कृष्णा की बीमारी से जेएएच में मौत हो गई थी। मृतका का कोरोना का सैंपल हुआ है, इसलिए रिपोर्ट आने तक शव पीएम हाउस में ही रखा गया है।
-15 मई को गीता की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। शव को पीएम हाउस में रखा गया था। सैंपल की रिपोर्ट नहीं आने के कारण पीएम अटका हुआ है।
-15 मई को रविन्द्र की भी हादसे में मौत हुई थी। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही पीएम किया जाएगा। परिजन रोज चक्कर लगा रहे हैं।
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क्यों हो रही शवों की दुर्दशाः-
नहीं मान रहे आदेशः-शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि कोरोना संदिग्ध के शवों को पीएम हाउस में नहीं रखवाया जाए। इसके बाद भी शव पीएम हाउस में रखवाए जा रहे हैं। जहां पर पर्याप्त फ्रीजर नहीं होने से शवों को खुले में रखना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में देरीः-जीआर मेडिकल कॉलेज स्थित वायरोलॉजी लैब से तीन-तीन दिन पुराने मामलों में भी जांच रिपोर्ट नहीं आ रही है। जिससे डेडहाउस में शवों का ढेर बढ़ता जा रहा है।
शवों की संख्या बढ़ीः-आमतौर पर बीमार व्यक्ति का पीएम नहीं होता है। मगर कोरोना संकट के खतरे को देखते हुए बीमारी से मरने वालों की भी जांच कराई जा रही है। जेएएच में ही औसतन 5-7 मौत रोजाना होती है। ऐसे में शवों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
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4 फ्रीजर खराब, नहीं हुए रिपेयरः-जेएएच के पीएम हाउस में 12 फ्रीजर हैं। इसमें से 8 चालू और 4 बंद पड़े हैं। फोरेंसिक साइंस विभाग के एचओडी ने अब तक जेएएच प्रबंधन को कई पत्र लिखे हैं, फ्रीजर फिर भी चालू नहीं हो सके हैं। चूहों एवं छिपकली से शवों को सुरक्षित रखने के लिए जाल तो बनवा दिया है। मगर गर्मी के मौसम में खुले में रखे शव के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। विशेष रूप से तीन-तीन तक शव रखे रहने के बाद परिजनों के लिए घर तक ले जाना मुश्किल हो जाता है।
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घर पर बता नहीं सकते, दिल में छुपाया दर्दः-
जेएएच में कई लोग दूसरे राज्य या जिलों से इलाज कराने पहुंचते हैं। घर में मौजूद परिजन यही सोचते हैं कि उनके अपने का अस्पताल में इलाज चल रहा है। जबकि अस्पताल में मरीज की मौत के बाद अटेंडेंट यह साहस ही नहीं जुटा पाते कि घर में मौजूद लोगों को हकीकत बता सकें। क्योंकि कब पीएम होगा और कब शव मिलेगा इसका कोई अंदाजा ही नहीं है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि उनको शव मिल जाए तो वह घर पहुंचकर हकीकत बताकर दुख हल्का कर सकें।
होटल ना लॉज, अस्पताल ही सहाराः- लॉकडाउन के चक्कर में होटल, धर्मशाला सब बंद हैं। ऐसे में जेएएच में मरीज की मौत के बाद परिजनों के लिए कहीं रहने तक का ठिकाना नहीं है। लोग जेएएच में ही इधर उधर रात गुजारकर फिर अगले दिन पीएम हाउस पहुंच जाते हैं, इस इंतजार में कि शायद आज उनको अपने का चेहरा देखना नसीब हो जाएगा।
सुबह तक थे 12 शवः-पीएम हाउस में शनिवार की सुबह तक 12 शव रखे हुए थे। जिनमें से 8 फ्रीजर जबकि 4 बाहर ही रखे थे। शाम तक हालांकि 5 ही बचे थे, अधिकांश का पीएम हो चुका था। मगर डॉक्टरों की माने तो रात तक फिर शवों की संख्या बढ़ना तय है।
टेस्ट हो जाए सबकी मंशा, मगर रिपोर्ट जल्दी आ जाएः-
परिजन हो या फोरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर, सभी चाहते हैं कि कोरोना की जांच होनी चाहिए। मगर रिपोर्ट में हो रही देरी सभी को परेशान किए हुए हैं। परिजन शव मिलने में देरी से परेशान है तो पीएम हाउस में डॉक्टरों के लिए भी शवों की संख्या बढ़ना चिंता का कारण बना हुआ है।
जेएएच अधीक्षक डॉ अशोक मिश्रा से सीधी बातः-
सवालः-हादसे या बीमारी से मौत होने पर भी कोरोना की जांच कराई जा रही है?
जवाबः-यदि मृतक कंटेनमेंट जोन से होता है तो जांच जरूरी होती है। क्योंकि ऐसा नहीं होने पर शव के कारण परिजनों में भी संक्रमण फैल सकता है।
सवालः-रिपोर्ट आने में देरी से शव 3-3 दिन से पीएम हाउस में रखे हैं?
जवाबः-बीमार व्यक्ति में तो बिना जांच शव देना संभव नहीं है। क्योंकि इन दिनों बिना लक्षण वाले मरीज भी आ रहे हैं। मगर हम हादसों वाले मामले में कोशिश करेंगे कि ऐसे मामलों में यदि मृतक कंटनमेंट जोन से नहीं है तो बिना जांच कराए उसका पीएम हो सके।
सवालः-शव जल्दी मिल सके इसके लिए क्या प्रयास किए जाएंगे?
जवाबः-हम फोरेंसिक साइंस एवं माइक्रोबॉयलोजी विभाग के डॉक्टरों में समन्वय बनाने की कोशिश करेंगे। जिससे ऐसे मामलों में जल्दी रिपोर्ट मिल सके और परिजनों को शव सौंपा जा सके।
सवालः-चार फ्रीजर खराब है, शव खुले में रखना पड़ रहे हैं?
जवाबः-कुछ फ्रीजर खराब जरूरी है, लेकिन हमने सही कराने के निर्देश दे दिए हैं। लॉकडाउन में सामान मिलने में थोड़ी दिक्कत आ रही थी, इसलिए सही नहीं हो सके थे। अब जल्दी सही हो जाएंगे।
5/18/2020 09:41:00 PM

अनजाने कॉल से हुई दोस्ती फिर शादी का झांसा देकर 3 साल किया दुष्कर्म

ग्वालियर। निजी कंपनी में कर्मचारी को एक दिन अनजाना कॉल आया। उस समय तो मिस्ड कॉल समझकर बात हुई। लेकिन उसके बाद बातचीत का दौर शुरू हो गया। युवक ने मिलने बुलाया फिर दोस्ती कर शादी का वादा किया। एक दिन अपने दोस्त के यहां ले गया और दुष्कर्म किया। घटना करीब 3 साल से लगातार आज तक की है। पीड़िता की शिकायत पर कंपू थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
गोल पहाड़िया निवासी 23 वर्षीय युवती एक निजी कंपनी में जॉब करती है। 3 साल पहले उसे एक अनजाने नंबर से कॉल आया। उस समय तो युवती ने मिस्ड कॉल कहकर कॉल काट दिया। लेकिन उसके बाद युवक ने फिर कॉल किया। युवती से बातचीत शुरू कर दी। युवक ने अपनी पहचान बनवार चीनोर निवासी योगेन्द्र उर्फ कृष्णा जाट के रूप में बताई। बीच में एक दिन युवती को मिलने के लिए अपने दोस्त के घर जेएएच कैंपस के पास बुलाया। यहां उसे शादी का वादा कर दुष्कर्म किया। इसके बाद वह अक्सर युवती के साथ संबंध बनाता रहा। जब युवती ने शादी के लिए कहा तो वह मुकर गया। इसके बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत कंपू थाने में की है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

Saturday, May 16, 2020

5/16/2020 05:31:00 AM

ग्वालियर-चंबल अंचल में कोरोना का कहर पहली बार यहां मिले एक-साथ चार मरीज

ग्वालियर। प्रदेश के चंबल संभाग में कोरोना संक्रमित के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। अभी तक चंबल में 93 केस सामने आ चुके हैं। वहीं एक युवक की मौत हो चुकी है। गुरुवार की शाम को चंबल में एक साथ 12 मामले सामने आए। जिसमें पांच ग्वालियर,एक मुरैना व चार दतिया और दो भिण्ड के कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद जिले में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने संभाग के इन चारों जिले में तुंरत ही सारे एरिया को सील कर दिया और संक्रमित मरीज को अस्पताल में भर्ती करा दिया है।
यहां बता दें कि देश में 17 मई तक लॉकडाउन चल रहा है और इसके तीसरे चरण की शुरुआत भी चुकी है। प्रशासन,स्वास्थय विभाग और पुलिसकर्मी दिनरात कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के लिए जुटे हुए हैं। साथ ही संभाग के सभी जिलों को तीन जोन में बांट दिया गया है। जिसमें ग्वालियर रेड जोन और मुरैना ऑरेंज जोन में, जबकि दतिया, शिवपुरी, श्योपुर और भिण्ड ग्रीन जोन में शामिल हैं।
ग्वालियर में 42 हुए कोरोना के मरीज:-
ग्वालियर जिले में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 42 हो गई है। इनमें से 16 को अस्पताल से डिस्र्चाज कर दिया गया है। बाकि सभी का इलाज किया जा रहा है। साथ ही एक युवक की मौत भी हो चुकी है। फिलहाल, सुरक्षा के मद्देनजर शहर के 7 इलाकों को कंटेनमेंट एरिया घोषित किया गया है। साथ ही यह जिला रेड जोन में भी आता है। यहां बीते पांच दिनों से लगातार मामले सामने आ रहे हैं।
चप्पे चप्पे पर है पुलिस की तैनाती:-
शिवपुरी में अब तक कोरोना के चार मामले सामने आए हैं। जिसमें दो लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। फिलहाल, अब शहर का कोई भी इलाका कंटेनमेंट जोन में नहीं रखा गया है। यह जिला ग्रीन जोन में शामिल है। वहीं जिले के हर गली मोहल्ले व बाजार में चप्पे चप्पे पर पुलिस की तैनाती है।
मुरैना में संख्या 27 पर पहुंची:- 
मुरैना में कोरोना संक्रमितों की संख्या 27 हो गई है। हालांकि, इनमें से 09 मरीज की हालत स्थिर है, जबकि अन्य 18 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। अहतियाद के तौर पर शहर के 2 इलाके को अब कंटेनमेंट एरिया में रखा गया है। जिसमें वार्ड 15,19,20,21 और 32 व 33 शामिल है। यह जिला रेड जोन में आ गया है।
सभी मरीज स्वास्थ:-
श्योपुर में अब तक कोरोना के 4 पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं। खुशी की बात ये है कि, सभी मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। शहर के 1 इलाके को कंटेनमेंट एरिया घोषित किया गया था, जिसे अब हटा दिया गया है। यह जिला ग्रीन जोन में शामिल है।
जिले में अब तक 10 मामले आए:- 
भिण्ड जिले में अब तक 12 मामले सामने आए है। गुरुवार की शाम को फूफ के भदाकुर गांव निवासी राघवेंद्र उम्र 35 पुत्र भोजे सिंह और गोहद के धमसा निवासी योगेंद्र सिंह उम्र 31 पुत्र धनपाल सिंह 13 मई बुधवार को दिल्ली से भिंड आए थे। योगेंद्र ट्रेन से झांसी होते हुए ग्वालियर पहुंच था। जहां उसका सैंपल लेकर उसे घर भेज दिया गया था। जबकि राघवेंद्र ट्रक से इटावा होते हुए भिण्ड आया। यहां जिला अस्पताल में सैंपल लेकर उसे क्वारेंटाइन किया गया था। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इन सभी को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद आइसोलेट किया गया है। भिण्ड में कलेक्टर ने 17 मई तक टोटल लॉकडाउन और कफ्र्यू कर दिया है।
दतिया में पहली बार मिले चार मरीज:- 
दतिया जिले में छह मई को अहमदाबाद से लौटे सिरसा गांव के तीन लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इन लोगों के सैंपल तब लिए गए थे जब इनके साथ आए बेहट के दो लोगा कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। अहमदबाद से सिरसा के दस लोग लौटे थे। इनमें से तीन के अलावा शेष की रिपोर्ट निगेटिव आई है। हालांकि इनके संपर्क में आए अन्य लोगों को पहले ही क्वारेंटाइन कर दिया गया था। इधर मुंबई से लौटा दतिया के भलका गावं का एक युवक और पॉजिटिव पाया गया है। हालांकि वह अपने गांव अभी नहीं पहुंच पाया था।
चंबल में यह है आंकड़े:-
ग्वालियर 42, मुरैना 27, शिवपुरी 04, श्योपुर 04, भिण्ड 12, दतिया 04

Sunday, May 10, 2020

5/10/2020 07:04:00 AM

रोजा रख बगैर छुट्टी लिए कर रहे डयूटी संकटकाल में फर्ज निभाने में लगे ये कोरोना वॉरियर, 15 घंटे कुछ नहीं खाते-पीते

ग्वालियर। नाम-एमएस खान, जिम्मेदारी- डीसीएम (डिप्टी कम्युनिटी मोबिलाइजर)। 20 मार्च से लगातार ड्यूटी पर हैं। सुबह आठ बजे आते हैं, लेकिन शाम को जाने का कोई पता नहीं रहता। रमजान के पहले दिन से लगातार रोजा रख कर 15 घंटे बिना कुछ खाए-पिए अपनी धार्मिक आस्था को पूरा कर रहे हैं और बगैर नागा काम पर आकर अपने फर्ज को निभा रहे हैं। कमांड सेंटर पर आने के बाद दिन में कॉल आते ही आठ से दस बार अलग-अलग क्वारंटाइन सैंटर जाकर डॉक्टर के साथ मिलकर सैंपलिंग और स्वास्थ्य परीक्षण कराने में लगे हैं।
दरअसल, कोरोना संक्रमण को लेकर लगाए गए जनता कफ्र्यू के दो दिन पहले ही डीसीएम की ड्यूटी कमांड सेंटर पर लगाई गई थी। इसके बाद से इनको शहर में शुरू किए गए सभी इंस्टीटयूशन क्वरंटाइन सेंटर की जानकारी रखने का काम दिया गया था। इसके साथ ही रैपिड रिस्पांस टीम की जिम्मेदारी इनको दी गई थी। इसके बाद से हर दिन सुबह आठ बजे कमांड सेंटर पर आना और रात में काम पूरा करके घर जाना ही दिनचर्या बन गया है। काम के बीच में ही समय निकालकर अपनी इबादत को भी समय दे रहे हैं।
बिना पानी पिए निकाल रहे पूरा दिन :-
रमजान का महीना शुरू होने के बाद हर वर्ष की तरह इस बार भी रोजा रखना शुरू किए थे। घर पर सभी ने संक्रमण काल में इबादत और काम के बीच सामंजस्य की मुश्किलें बताकर समझाने की कोशिश की। लेकिन आस्था और काम दोनों को बराबर तवज्जो देने की बात कहकर परिवार को समझा लिया। अब चौदह दिन निकल गए। हर दिन सहरी से लेकर अफ्तारी तक बिना कुछ खाए पिए दिन निकल रहा है। इसके बाद भी काम में कहीं ढील नहीं दे रहे। अधिकारियों के निर्देश और क्वारंटाइन होम तक जा रहे डॉक्टर्स का सपोर्ट करने में लगातार लगे हुए हैं।
धर्म अपनी जगह है, काम का अपना अलग महत्व है। हमारा काम दूसरों की सेवा करना ही है,हमारी कोशिश बस यही है कि अच्छे से काम करते रहें। 
-एमएस खान, डीसीएम-

Friday, May 8, 2020

5/08/2020 05:23:00 AM

सिंधिया का कांग्रेस पर हमला, कहा- राजनीतिक द्वेषता के कारण कांग्रेस सरकार ने बंद की थी योजना

ग्वालियर. मध्यप्रदेश में एक तरफ जहां कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। वहीं, दूसरी तरफ राजनीति भी जोरों पर हैं। कांग्रेस लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोल रही है। कांग्रेस के इन हमलों पर अब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवार किया है। कांग्रेस छोड़ने के बाद सिंधिया ने पहली बार कांग्रेस पर हमला बोला है। मध्यप्रदेश में संबल योजना फिर से शुरू होने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पर हमला बोला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि इस योजना को कांग्रेस ने राजनीतिक द्वेषता के कारण योजना बंद की गई थी।
क्या कहा सिंधिया ने:-
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करते हुए कहा- संबल योजना के तहत गरीब भाई-बहनों के बच्चों की पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई का खर्च मप्र सरकार उठाएगी। उच्च शिक्षा के लिए प्राइवेट कॉलेज की फीस भी सरकार भरेगी। गरीब अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें। मुख्यमंत्री संबल योजना सभी वर्ग के गरीब के लिए है। आमजन के कल्याण के बनी इस योजना को राजनीतिक द्वेषता के कारण पूर्व की कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया था। जिसे शिवराज सिंह जी ने आम जनता के लिए एक बार इस योजना को शुरू किया।
फिर से शुरू हुई योजना:-
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को 'संबल' योजना को रिलॉन्च किया। इसके तहत 1863 हितग्राहियों के खाते में 41.29 करोड़ रुपये सिंगल क्लिक से ट्रांसफर किए। दरअसल, असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए 2018 में मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना शुरू की गई थी। बाद में सत्ता परिवर्तन होने के बाद कमलनाथ सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया गया था और नया सवेरा योजना शुरू की थी। लेकिन 15 महीने बाद मध्यप्रदेश में एक बार फिर से भाजपा की सरकार बन गई और एक बार फिर से इस योजना को शुरू किया गया है।
क्या कहा कांग्रेस ने:-
संबल योजना फिर से शुरू होने पर कांग्रेस ने भाजपा पर हमला बोला। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए इस योजना को शुरू किया गया है। वहीं, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- जिन लोगों ने इस योजना पर सवाल उठाए थे वही लोग आज इसकी तारीफ कर रहे हैं। बता दें कि महेन्द्र सिंह सिसौदिया जब कांग्रेस में थे तो उन्होंने इस योजना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस योजना में 10 से 12 लाख लोग फर्जी हैं।

Thursday, May 7, 2020

5/07/2020 04:56:00 PM

सिंधिया ने कांग्रेस को दिया करारा जवाब, महाराज के निशाने पर कांग्रेस के ये दो कद्दावर नेता

ग्वालियर. भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अब कांग्रेस पर हमलावर हो गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया मे खुले तौर पर दिग्विजय सिंह और उनके बेटे जयवर्धन सिंह पर भी हमला बोला है। दरअसल, एमपी कांग्रेस लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोल रही है। अभी तक ज्योतिरादित्य सिंधिया खमोश थे। लेकिन संबल योजना और एक वायरल फोटो को लेकर उन्होंने कांग्रेस सरकार और दिग्विजय सिंह पर हमला बोला है।
सोशल मीडिया में वायरल हुई थी तस्वीर:-
पिछले दिनों टॉयलेट में क्वारंटीन एक परिवार की तस्वीर को शेयर करते हुए कांग्रेस ने इसे ज्योतिरादित्य सिंधिया संसदीय क्षेत्र का बताया, जहां से वह चुनाव लड़ते रहे हैं। अब सिंधिया ने भी वायरल तस्वीर पर करारा जवाब देते हुए दिग्विजय सिंह और उनके बेटे जयवर्धन सिंह पर हमला बोला है।
दरअसल, 4 मई को एमपी कांग्रेस ने अपने ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से टॉयलेट में क्वारंटीन की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि शौचालय में भोजन करने को मजबूर। सिंधिया के लोकसभा क्षेत्र की तस्वीर। बीजेपी नेता सिंधिया के लोकसभा क्षेत्र गुना की ये तस्वीर है, जिसमें गरीब परिवार को शौचालय में क्वारंटीन किया गया है। वो जो बात-बात पर सड़क पर उतरते थे, इस बात पर जनता की नजरों से उतर गए। वहीं, एमपी कांग्रेस ने एक ट्वीट को रिट्वीट किया था। जिसमें लिखा था- मध्यप्रदेश के गुना में आदिवासी इस तरह शौचालय में क्वॉरेंटाइन पर है। सोचिये किस कदर पशुओं जैसा सलूक हो रहा है। सिंधिया मध्यप्रदेश के इसी गुना के इलाके से चुनाव लड़ते व जीतते आये हैं। फिलहाल सत्ता में भी हैं। फिर भी आदिवासियों की ये हालात, वाकयी बेहद शर्मनाक है।
सिंधिया ने दिया जवाब:-
कांग्रेस के आरोपों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह तस्वीर दिग्विजय सिंह के पूर्व लोकसभा क्षेत्र राजगढ़ की है और उनके बेटे जयवर्धन सिंह के विधानसभा क्षेत्र राघौगढ़ की है। मैंने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि इस परिवार का ख्याल रखें। सिंधिया ने एक ट्वीट को भी रिट्वीट किया, जिसमें लिखा था कि यह तस्वीर राजगढ़ लोकसभा सीट और राघौगढ़ विधानसभा के ग्राम टोडरा ग्राम पंचायत की प्राथमिक शाला देवीपुरा की है। यहां दशकों से दिग्विजय सिंह के परिवार का सदस्य जनप्रतिनिधि के रूप में चुनता आ रहा है।
संबल के बहाने कांग्रेस पर हमला:-
वहीं, शिवराज सरकार के समय में शुरू की गई संबल योजना को कमलनाथ की सरकार ने बंद कर दिया था। शिवराज सिंह चौहान ने इसे मंगलवार को फिर शुरू किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संबल योजना सभी वर्ग के गरीब के लिए है। आमजन के कल्याण के लिए बनी इस योजना को राजनीतिक द्वेषता के कारण पूर्व की कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया था। जिसे आज शिवराज सिंह ने आम जनता के लिए एक बार फिर से इस योजना को शुरू किया।
5/07/2020 05:09:00 AM

क्वारंटाइन सेंटर से भागकर गर्लफ्रेंड के पास पहुंचा युवक, पुलिस ने पकड़ा गया

ग्वालियर। बिड़ला हॉस्पिटल में बने क्वारंटाइन सेंटर से भागकर गर्लफ्रेंड के घर विंडसर हिल्स पहुंचे युवक को पुलिस ने पकड़ा है। घटना शनिवार दोपहर विंडसर हिल्स सिरोल की है। इस युवक को 29 अप्रैल को पकड़ा गया था। यह गुरुग्राम हरियाणा से शिवपुरी के ई-पास पर आया था, लेकिन ग्वालियर में ही रुक गया था। इसे पकड़ने के बाद क्वारंटाइन किया गया था।
बिहार के बेगू सराहये निवासी अजीत (24) पुत्र रमेश भूमिहर फिलहाल हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) में रहता था। 29 अप्रैल को उसे ग्वालियर में पकड़ा गया था। तब पता लगा था कि वह गुरुग्राम से शिवपुरी के लिए मेडिकल इमरजेंसी का पास बनवाकर आया था, लेकिन ग्वालियर में ही रह गया।
यहां उसे निगरानी में लेकर बिड़ला हॉस्पिटल में क्वारंटाइन किया गया था। 13 मई तक उसे क्वारंटाइन सेंटर में ही रहना था। लेकिन शनिवार सुबह वह सेंटर से चकमा देकर निकल गया। कुछ ही देर में जब उसे बेड पर नहीं पाया गया तो हंगामा खड़ा हो गया। तत्काल अफसरों को सूचना दी गई। एसडीएम झांसी रोड अनिल बनवारिया को सूचना मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ उसकी हिस्ट्री खंगाली।
इसके बाद उसके सिरोल स्थित विंडसर हिल्स में अपनी गर्फफ्रेंड के घर होने की सूचना मिली। एसडीएम अनिल बनवारिया सिरोल थाना प्रभारी के साथ वहां पहुंचे। अजीत अपनी गर्लफ्रेंड के यहां बैठा मिला। तत्काल उसे निगरानी में लेकर पुलिस को सौंपा गया है। आरोपित के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 188. 269, 270 के तहत मालमा दर्ज कर वापस क्वारंटाइन किया गया है।
बहन और गर्लफ्रेंड के पास आता था:-
अजीत ने बताया कि यहां विंडसर हिल्स में उसकी मुंहबोली बहन रहती थी। जिसके यहां वह अक्सर आता था और रहता भी था। उसके पास ही उसकी गर्लफ्रेंड भी रहती है। भागकर आने के दौरान उसने विंडसर हिल्स के बाहर सिक्युरिटी गार्ड को भी झांसे में ले लिया, उस ने भी उसे नहीं रोका।

Monday, May 4, 2020

5/04/2020 08:18:00 AM

BJP की गोपनीय सर्वे रिपोर्ट से चिंता बड़ी: सिंधिया समर्थक एक दर्जन EX- MLA व मंत्रियों की स्थिति नाजुक

ग्वालियर। कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री और विधायकों को लेकर भाजपा आलाकमान इन दिनों बेहद हैरान है। हैरानी का कारण भाजपा द्वारा कराया गुपचुप सर्वे है, जिसमें इन 22 पूर्व विधायकों और मंत्रियों में से एक दर्जन से ज्यादा की सीट खतरे में दिखाई पड़ रही है। इसी कारण अब भाजपा भी मंत्रिमंडल विस्तार में इन पूर्व मंत्रियों की भागीदारी पर संशय कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा आलाकमान के इशारे पर एक सर्वे एजेंसी ने मध्यप्रदेश में इस्तीफा देने वाले कांग्रेस विधायकों और सरकार के उन मंत्रियों का सर्वे किया था जिस सर्वे में यह बात सामने आई तो आलाकमान परेशान हो गया है, जिसमें भाजपा के टिकट पर कांग्रेस के 13 पूर्व विधायक व मंत्रियों की हालत पतली दिखाई पड़ती है। बताया जाता है कि भाजपा आलाकमान इन सर्वे को लेकर चिंतित है और यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने मंत्रीमंडल विस्तार में कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों को स्थान देने में कंजूसी बरती है। अन्यथा वायदे के मुताबिक इस्तीफा देने वाले सभी मंत्रियों को पुनः मंत्री बनाया जाना था। अब संभावना इस बात की भी बन गई है कि अब मुख्यमंत्री अपना मंत्रीमंडल विस्तार इसी कारण फिलहाल लॉकडाउन का नाम लेकर कुछ समय को टाल भी रहे है। परंतु कुछ सिंधिया समर्थक उपचुनाव में अपनी सीट बचा लेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है। इनके लिए सिंधिया जी द्वारा की गई मेहनत भी जाया हो सकती है। सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार तो आलम यह है कि वर्तमान के सिंधिया समर्थक दोनों मंत्री भी अपनी सीट उपचुनाव में बचा पायेंगे या नहीं इसका भी कोई भरोसा नहीं है। वहीं पूर्व भाजपा प्रतिद्वंदियों ने भी अपनी अपनी सीटों से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इतना ही नही यदि भाजपा उनको टिकिट नही देती है तो वे पार्टी से विद्रोह कर कांग्रेस से भी चुनाव लड़ने व जीतने का दंभ भरते नजर आ रहे है। वही आम जनता भी इन पूर्व हो चुके कुछ विधायकों से नाराज चल रही है। और कांग्रेस भी उपचुनाव में अपनी सीटें वापसी करने पुर जोर लगाने के प्लान में है।
5/04/2020 08:11:00 AM

पूर्व मंत्री का पूर्व CM कमलनाथ से सवाल आखिर वह क्यों झेल रहे दिग्विजय सिंह को

ग्वालियर। पूर्व केबिनेट मंत्री और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए प्रद्युम्मन सिंह तोमर ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस बात का जवाब देना चाहिए कि वह कांग्रेस सरकार में दिग्विजय सिंह को क्यों झेलते रहे जिसके कारण कांग्रेस सरकार गिर गई। सिंधिया समर्थकों में गिने जाने वाले प्रद्युम्मन सिंह तोमर ने कहा कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने जो बयान दिया है जिसमें उन्होंने कमलनाथ से पूछा है कि ऐसी क्या मजबूरी थी जो कांग्रेस सरकार में कमलनाथ पहले दिन से दिग्विजय सिंह को बर्दाश्त करते रहे। अंतत: सरकार गिराने का खामियाजा भुगतना पड़ा। प्रद्युम्मन सिंह तोमर ने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने सही सवाल कमलनाथ से पूछा है और इसका जवाब कमलनाथ को देना चाहिए।
कमलनाथ सरकार में केबिनेट मंत्री रहे प्रद्युम्मन सिंह तोमर ने कहा कि पूर्व की कमलनाथ सरकार में अवैध उत्खननकर्ताओं को संरक्षण था। कमलनाथ सरकार को कुछ चंद लोग ही चला रहे थे। जब हम इस सरकार के कामकाज पर उंगली उठाते थे तो हमारी आवाज दबा दी जाती थी। जनता से जुड़े विकास कार्यों की हम बात करते तो बजट न होने की बात कहकर इन मामलों को दबा दिया जाता था। जबकि छिंदवाड़ा में विकास कार्यों को लेकर सीएम कमलनाथ प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से भेदभाव करते। प्रद्युम्मन सिंह तोमर ने कहा कि छिंदवाड़ा में विकास कार्यों व योजनाओं के लिए बजट की व्यवस्था हो जाती थी लेकिन जब हमारे अंचल के लिए कोई योजना मंजूर कराने जाते थे बजट न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता था। उन्होंने कहा कि हम छिंदवाड़ा में विकास के विरोधी नहीं लेकिन प्रदेश के दूसरे क्षेत्र व हमारे अंचल से कमलनाथ ने क्यों भेदभाव किया। इसका जबाव देना चाहिए। जब पानी ऊपर से गुजर गया तो हमने हमारे नेता ज्योतिरादित्य को इसके लिए अधिकृत किया और हमारे नेता के एक आदेश पर हमने जनता के ऊपर हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
सिंधिया जी की ईमानदारी पर हमें पूरा भरोसा:-
पूर्व केबिनेट मंत्री प्रद्युम्मन सिंह तोमर ने कहा कि भारत की राजनीति में शुचिता व ईमानदारी की परंपरा को कायम रखने वाले सिंधिया परिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य पर हमें पूरा भरोसा है। इसलिए सिंधिया जी को नीचे दिखाने की जो कोशिश कमलनाथ ने की थी उसके लिए उन्हे माफी मांगना चाहिए साथ ही दिग्विजय सिंह को लेकर भी जवाब देना चाहिए।

Sunday, May 3, 2020

5/03/2020 03:25:00 PM

MP के पूर्व मंत्री ने बेटे से साफ कराया पब्लिक टॉयलेट, उठवाया सड़क का कचरा, बेटे को गलती की सार्वजनिक सजा

ग्वालियर. मध्यप्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी तो मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर अपनी सफाई को लेकर सुर्खियों में थे। वो कभी टॉयलेट साफ करते थे तो कभी गंदी नालियां। अब उन्होंने अपने बेटे से भी टॉयलेट साफ कराया है इसके साथ ही उन्होंने अपने बेटे से गंदी बस्तियां भी साफ कराई। उन्होंने ये काम समाजसेवा के लिए नहीं बल्कि प्रायश्चित के लिए किया है।
देखिये वीडियो:-
दरअसल, मंत्री के बेटे रिपुदमन सिंह का ग्वालियर में लॉकडाउन के दौरान मास्क नहीं पहनने पर विवाद हो गया था। बेटे की गलती का प्रायश्चित कराने के लिए पूर्व मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर अपने बेटे को लेकर बाहर निकले और गंदी बस्ती में पहुंचे। उन्होंने अपने बेटे से सार्वजानिक टॉयलेट को साफ कराया और बस्ती में झाड़ू लगाकर कचरा भी फेंकवाया। इस दौरान उन्होंने अपने सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि बेटे में अहंकार की भावना दिखी है। अहंकार को खत्म करने के लिए माफी पर्याप्त नहीं थी इसलिए बेटे से श्रमदान कराया।
क्या है मामला:-
दरअसल, गुरुवार को मास्क ना लगाने को लेकर पुलिसकर्मी से विवाद हो गया था। इस दौरान मंत्री के बेटे ने रौब दिखाई हुए ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मी को फटकार लगाई थी। इसके बाद पूर्व मंत्री ने बेटे की गलती मांगी और 100 रुपए का चालान कटवाया और बेटे से सार्वजानिक रूप से माफी मंगवाई।
सिंधिया समर्थक नेता हैं तोमर:-
प्रद्युमन सिंह तोमर ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक नेता हैं। सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता और कमलनाथ सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। तोमर अपनी सफाई और चरण वंदना को लेकर कमलनाथ सरकार में सुर्खियों में थे। कमलनाथ सरकार में तोमर खाद्य मंत्री थे इस दौरान उन्होंने कई जिलों से दौरों में खुद ही सार्वजानिक स्थल की सफाई की थी। ग्वालिय में वो लगातार सफाई करते दिखाई देते हैं।

Saturday, May 2, 2020

5/02/2020 05:57:00 AM

रमज़ान : खुद पर नियंत्रण और बुराई से बचना सिखाता है रोज़ा, सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है रोजा

ग्वालियर। आज रमज़ान उल मुबारक का पहला जुमा है। हालांकि, रमज़ान अपने आप में ही बेहद खास महीना माना जाता है। लेकिन, इस दिन की और भी अहमियत बढ़ जाती है, जिस दिन जुमा होता है। आम दिनों में इस दिन दुनियाभर की सभी मस्जिदों में जोर शोर से इबादतें की जाती थी। जुमा की नमाज का खास अहतमाम होता था। हालांकि, इन दिनों कोरोना संकट के चलते सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने और लॉकडाउन का पालन करने के लिए सभी मस्जिदें बंद कर दी गई हैं। लोग अब अपनी नमाज़ें और इबादतें घर में ही अदा कर रहे हैं।
ये है रोज़े का खास मकसद:-
मुफ्ती फैय्याज आलम ने बताया कि, असल में रमजान का मकसद अकीदतमंदों को सिर्फ भूखे रखना मकसद नहीं है, बल्कि रोज़े का मकसद है कि, हम खुद पर नियंत्रण रखने की क्षमता को पहचानें, रोजा हमें बुराइयों से दूर रहना सिखाता है, गरीब-भूखों का दर्द महसूस कराता है, ताकि आपके दिल में इनकी फिक्र बनी रहे, रोजा हमें दूसरों की मदद करना और खुद को एक अच्छा इंसान बनाना सिखाता है। न बुरा देखो और न बुरा सुनो और न बुरा बोलो, कुछ ऐसा ही संदेश रमजान देता है।
घरों में रह कर करें इबादत:-
इस रमजान में हमारे मुल्क के साथ साथ पूरी दुनिया में दहशत का माहौल है। विश्व के तमाम देश कोरोना संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में इसका प्रभाव पर्व-त्योहारों पर पड़ना भी स्वभाविक है। मुफ्ती फैय्याज ने कहा कि, कोरोना को लेकर लॉक डाउन चल रहा है। जिसका सभी को पालन करना चाहिए। हम सभी को घर में ही रहकर इबादत करें। हमे घर में रहकर अल्लाह कि इबादत करते हुए अपने घरों को पाक वा पाकीज करें। अल्लाह की बारगाह में हम सब की दुआ है कि, जल्द से जल्द इस महामारी से हमारे देश के साथ पुरे विश्व को निजात मिले।
जनतरी से जाने सेहरी और इफ़्तार का सही वक्त

Friday, May 1, 2020

5/01/2020 12:59:00 PM

50 लाख कीमत की अवैध शराब पकड़ी, लॉकडाउन में भी धड़ल्ले से जारी है शराब कारोबार

ग्वालियर। यहां एक ओर देश मे लॉक डाउन है और शराब बेचने पर प्रतिबंध है शराब की सभी दुकानें बंद है। बावजूद इसके शराब माफिया सक्रिय है, ग्वालियर पुलिस को शराब माफिया के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने शहर के एक घर से लगभग 50 लाख कीमत की सैकड़ों बोतल अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है।
जानकारी के अनुसार पुलिस और जिला प्रशासन की सख्ती के बावजूद शराब माफिया उसे लगातार चुनौती दे रहा है। जिले में अवैध शराब का धंधा खूब फल फूल रहा है। लेकिन पुलिस ने बीती रात इसमें सेंध लगा दी। सीएसपी रवि भदौरिया के मुताबिक हजीरा पुलिस को गुरुवार की रात सूचना मिली कि गोसपुरा नंबर एक में ज्ञान वर्मा नामक व्यक्ति अपने घर से अवैध शराब का कारोबार कर रहा है। 

सूचना को पुख्ता करने के बाद पुलिस ने यहाँ छापा मारा और उसे भारी मात्रा में शराब का जखीरा मिला। पुलिस को मकान के तीन कमरों से लाखों रुपये कीमत की सेंकड़ों बोतल अवैध अंग्रेजी शराब मिली है। जब्त की गई शराब की कीमत 50 लाख से अधिक बताई गई है। सीएसपी का कहना है कि यहाँ बोट्लिंग की भी जानकारी मिली है। जिसकी तस्दीक की जा रही है। आरोपी ज्ञान वर्मा को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ये भी पता लगा रही है कि इसमें शराब का इतना बड़ा कारोबार कैसे खड़ा कर लिया। ये कहाँ से शराब ला रहा है और अब तक कहाँ कहाँ इसकी सप्लाई की है।

Wednesday, April 29, 2020

4/29/2020 05:02:00 AM

"हैलो, मैं सिंधिया बोल रहा हूं"- महामारी के बीच चुनावी मदद के लिए 'महाराज' के फोन से गरमाई सियासत- कांग्रेस बोली..

ग्वालियर। नए-नए भाजपाई बने महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया को कोरोना वायरस महामारी के बीच भी चुनाव की चिंता सता रही है। एक ओर जब प्रदेश सरकार और पूरा प्रशासनिक अमला वायरस के संक्रमण को रोकने के काम में लगा है, सिंधिया कार्यकर्ताओं को फोन कर चुनाव में मदद मांग रहे हैं। हालांकि, महाराज के फोन कॉल ने राज्य की सियासत गरमा दी है और कांग्रेस पार्टी को हमलावर होने का मौका दे दिया है।
कार्यकर्ताओं से ऐसे कर रहे संपर्क:-
प्रदेश में विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर छह महीने के अंदर चुनाव होने हैं। कांग्रेस से अलग होकर भाजपा में पहुंचे सिंधिया ने खुद अपने समर्थक विधायकों की जीत का बीड़ा उठाया है। वे कार्यकर्ताओं और नेताओं को फोन कर चुनाव के लिए तैयारी करने की ताकीद कर रहे हैं। सिंधिया ने सांवेर के कार्यकर्ता सुधीर को फोन लगा कर कहा, मैं सिंधिया बोल रहा हूं। उपचुनावों के लिए अच्छे से तैयारी करना। घर में भी सबसे बता देना कि मैंने फोन किया था।
सांवेर से विधायक थे तुलसी सिलावट:-
दरअसल, इंदौर जिले की सांवेर सीट से तुलसी सिलावट चुनाव जीते थे और फिलहाल शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में मंत्री हैं। इससे पहले वे कमलनाथ के नेतृत्व वाली कमलनाथ सरकार में भी स्वास्थ्य मंत्री थे। सिंधिया समर्थक सिलावट ने कांग्रेस छोड़ने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दिया था। मंत्री बने रहने के लिए उनका चुनाव जीतना जरूरी है। इसलिए, कोरोना की महामारी के बीच खुद सिंधिया ने उनकी जीत का बीड़ा उठा लिया है।
कांग्रेस ने साधा निशाना:-
सिंधिया के फोन कॉल के बाद कांग्रेस उनके खिलाफ हमलावर हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया प्रभारी नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट कर कहा है कि यह समय महामारीसे निपटने का है, लेकिन सिंधिया लोगों को फोन कर चुनाव जिताने की अपील कर रहे हैं। ऐसे माहौल में राजनीति करना ठीक नहीं है। इससे पता चलता है कि सिंधिया कैसे जनसेवक हैं।
इधर, जीतू पटवारी ने संभाली कमान:-
तुलसी सिलावट के लिए सांवेर की सीट बचाना उनकी राजनीतिक साख के लिए जरूरी है। कोरोना संकय काल में क्षेत्र के लोगों को मदद पहुंचाकर वे अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हैं। हालांकि, कांग्रेस भी इसमें पीछे नहीं है। पार्टी की मीडिया सेल के प्रभारी और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी भी मैदान में उतर चुके हैं। जिला कांग्रेस कमिटी के जरिये वे भी सांवेर के रहवासियों को मदद पहुंचा रहे हैं।

Saturday, April 25, 2020

4/25/2020 04:12:00 PM

10 मंजिला इमारत में आग, जान बचाने चौथी मंजिल से कूदे लोग

ग्वालियर। सिरोल रोड स्थित 10 मंजिला एमके सिटी के एफ ब्लॉक में शुक्रवार तड़के करीब 3.25 बजे भीषण आग लग गई। आग ग्राउंड फ्लोर की पार्किंग में लगी और कुछ ही मिनटों में चौथी मंजिल तक पहुंच गई। 10वीं मंजिल तक के फ्लैटों तक धुआं भर गया। तड़के गहरी नींद में सो रहे लोग गार्ड के चिल्लाने व धुएं से घुटन होने पर उठे।
घबराकर लोग बालकनी की तरफ भागे और बच्चों को उठाकर बचने का रास्ता तलाशने लगे। चौथी मंजिल से कूंदने के कारण ओपी गुप्ता, डोली गुप्ता के अलावा अंशुल जौहरी और एक नाइजीरिया का नागरिक घायल हो गया है। एक परिवार ने चादर बांधकर नीचे उतरकर अपनी जान बचाई।
वहीं दमकल दस्ते ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू किया। हाइड्रोलिक फायर बिग्रेड की ट्रोली से 22 लोगों को बहुमंजिला इमारत में फंसे लोगों को नीचे उतारकर जान बचाई। भवन के पीछे के साइड फंसे 7 लोगों को भी चादर से बांधकर नीचे उतारा।
पहली मंजिल पर स्थित राकेश कुमार का पूरा फ्लैट जल गया। 22 गाड़ी पानी की मदद से आग पर काबू पाया। सिरोल रोड पर स्थित 36 बीघा में बसी एमके सिटी एफ ब्लॉक के कर्मिशियल क्षेत्र भी जोड़ा होने के कारण 62 फ्लैट हैं। इसमें केवल एक-दो फ्लैट ही खाली हैं, शेष सभी में परिवार रह रहे हैं।
लॉकडाउन के चलते कई परिवार एक महीने से नीचे तक नहीं उतरे हैं। गुरुवार रात एमके सिटी के सभी ब्लॉकों में डुप्लेक्स में रहने वाले लोग गहरी नींद में थे। ग्राउंड फ्लोर में पार्किंग के लिए तय स्थान में बिल्डर ने बांस-बल्ली स्टोर कर रखे हैं। यहां सफाई कर्मचारी का परिवार भी रहता है।
प्रत्येक ब्लॉक की निगरानी के लिए चौकीदार है। राजू कुमार ने बताया कि गार्ड को पता ही नहीं था फायर सिस्टम कैसे काम करता है, फायर अलार्म कहां हैं? फायर सिस्टम खोलने पर पानी जमीन पर फैलने लगा। गार्डों के ट्रेंड नहीं होने के कारण हम लोग शोर मचाने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे थे।